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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की विशेष पहल : जशपुर के आगडीह हवाई पट्टी से पहली बार आदिवासी अंचल के युवाओं को मिला विमान उड़ाने का सुनहरा अवसर

जशपुर : जशपुर जिले के आदिवासी अंचल में पहली बार हल्के विमान उड़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह और रोमांच का माहौल बना हुआ है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की विशेष पहल से शुरू हुए इस ऐतिहासिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में 3 सीजी एयर स्क्वाड्रन एनसीसी रायपुर के चयनित कैडेट्स को पायलट बनने की दिशा में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हर सुबह जब ट्वीन-सीटर एसडब्ल्यू 80 विमान आसमान में ऊंची उड़ान भरता है, तो आस-पास के लोगों के लिए यह दृश्य किसी सपने के साकार होने जैसा लगता है।

युवाओं के सपनों को नई उड़ान

यह पहली बार है जब रायपुर से बाहर जशपुर में इस स्तर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आदिवासी अंचल के युवाओं के लिए यह न केवल एक सुनहरा अवसर है, बल्कि उनके पायलट बनने के सपने को साकार करने का मंच भी है। लगभग एक महीने तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में कुल 100 कैडेट्स को विमान उड़ाने की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसकी शुरुआत 10 कैडेट्स से हो चुकी है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा, "हमारी सरकार का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक युवा को अपने सपनों को साकार करने का अवसर देना है। जशपुर के आदिवासी युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, उन्हें सिर्फ सही मंच और मार्गदर्शन की जरूरत थी। यह प्रशिक्षण उन्हें वायुसेना में करियर बनाने के लिए एक नई दिशा देगा।"

प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कैडेट नितेश प्रजापति का कहना है, "हम पहली बार जशपुर में प्रशिक्षण के लिए आए हैं। यहां का स्वच्छ और सुंदर वातावरण हमें खास अनुभव दे रहा है। यह प्रशिक्षण हमारे लिए एयरफोर्स पायलट बनने की राह आसान बनाएगा।"

वहीं, कैडेट प्रांशु चौहान ने बताया कि, "यहां हवाई यातायात कम होने के कारण प्रशिक्षण बिना किसी रुकावट के हो रहा है। रनवे क्लीयर होने की वजह से उड़ान भरना आसान हो जाता है। जशपुर की खूबसूरत वादियों में यह अनुभव हमें हमेशा याद रहेगा।"

आगडीह हवाई पट्टी से गूंजती उम्मीदों की आवाज़

1200 मीटर लंबी और 25 मीटर चौड़ी आगडीह हवाई पट्टी से हर दिन जब विमान उड़ान भरते हैं, तो आसपास के ग्रामीण भी रोमांचित हो उठते हैं। ग्रामीण विकास लकड़ा और राजू कुजूर ने बताया कि, "रोजाना विमान को उड़ान भरते और उतरते देखना हमारे लिए अविश्वसनीय अनुभव है। इससे हमारे घरों और गांवों में भी पायलट बनने का सपना जन्म ले रहा है।"

एनसीसी कैडेट्स के लिए सुनहरा अवसर

कमांडिंग ऑफिसर ने बताया कि यह प्रशिक्षण कैडेट्स के उज्जवल भविष्य की नींव रख रहा है। उन्होंने कहा कि एनसीसी एयर विंग से C सर्टिफिकेट परीक्षा में अच्छे ग्रेड प्राप्त करने वाले कैडेट्स को सीधे भारतीय वायुसेना के इंटरव्यू के लिए पात्र माना जाता है। ऐसे में यह प्रशिक्षण युवा सपनों को हकीकत में बदलने का एक बड़ा मंच साबित हो रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल से शुरू हुआ यह प्रशिक्षण न केवल जशपुर के युवाओं को प्रेरित कर रहा है, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक नवाचार और अवसर का नया द्वार खोल रहा है। आदिवासी अंचल के युवाओं को इस क्षेत्र में करियर बनाने का अवसर देकर सरकार ने सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

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गृह ग्राम बगिया में गांव के बच्चों संग मुख्यमंत्री ने मनाई रंगों की होली,होली मेल-जोल, प्रेम और सौहार्द का पर्व :मुख्यमंत्री

जशपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज गांव के बच्चों के साथ होली का उत्सव हर्षोल्लास से मनाया और उनके संग रंगों की खुशियां साझा कीं। बगिया के मंझापारा गांव में होली के रंगों से सराबोर बच्चों का मुख्यमंत्री के प्रति उत्साह और अपनापन देखते ही बनता था, जब वे अपने गांव के पुरोधा और प्रदेश के मुखिया से मिलने उनके निवास पहुंचे, तो दृश्य किसी पारिवारिक उत्सव जैसा प्रतीत हुआ।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने निज निवास पर बच्चों की टोली का आत्मीय स्वागत किया और खुद भी उनके संग होली के रंगों में रंग गए। उनकी सहजता और सादगी ने बच्चों को बेझिझक उनसे मिलने और घुल-मिलकर बातचीत करने का अवसर दिया। मुख्यमंत्री श्री साय ने न केवल बच्चों से उनका हालचाल जाना, बल्कि उन्हें मिठाई खिलाई और उनके साथ ठहाके लगाते हुए हंसी-ठिठोली भी की।

बच्चों ने बताया कि वे पूरे गांव में होली खेलते हुए मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे हैं, और जब वे वहां पहुंचे, तो मुख्यमंत्री ने भी उनके संग पूरी आत्मीयता से रंग-गुलाल खेला। यह मिलन एक अनोखे उल्लास का प्रतीक बन गया, जिसमें प्रेम, स्नेह और भाईचारे के रंग घुल गए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि होली मेल-जोल, प्रेम और सौहार्द का पर्व है, जो समाज में भाईचारे को और भी मजबूत करता है। इस तरह के उत्सव हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं और हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं।

गांव के बच्चों के उत्साह और मुख्यमंत्री की आत्मीयता ने इस होली को और भी यादगार बना दिया। यह अवसर केवल रंगों का नहीं था, बल्कि उसमें अपनत्व, स्नेह और खुशियों के अनगिनत रंग घुले हुए थे।

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बादलखोल अभ्यारण्य विभाग बेबस या लापरवाह? जंगल की आग पर कब लगेगी लगाम .....फायर वाचरों के व्यवस्था के बाद भी अब देखना होगा की विभाग जंगल की आग रोकने में कितना सफल होगा 

जलती हुई आग की धुंआ पूरे जंगल एवं पहाड़ी इलाकों में दिखाई दे रही है।

जशपुर/नारायणपुर : बादलखोल अभ्यारण्य के जंगल के विभिन्न बीटों में अभी से धू-धू कर जंगल जलना शुरू हो गया, जिसमें अनेक छोटे-छोटे पौधे व वन्य जीवों पर खतरा मड़रा रहा है। साथ ही पर्यावरण को हानि भी पहुंच रहा है। बावजूद इसके गेम रेंज  इन सब खबरों से बेपरवाह है

एक तरफ जहां पर्यावरण को सुरक्षित रखने व वन्य जीवों पौधों को बचाने के लिए पूरी दुनिया मुहिम चला रही है, तो वहीं बादलखोल अभ्यारण्य में अभी से जंगल में आग लगनी शुरू हो गई है। जहां इन आग से जंगल में छोटे-छोटे पौधे जलकर नष्ट हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ वन्यजीवों पर संकट के बादल भी मड़राने लगे हैं। जंगल मे आग लगने का सिलसिला हर साल बदस्तूर जारी रहता है, लेकिन नारायणपुर रेंज आज तक इस इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है।

श्रबादलखोल अभ्यारण में धधक रहे जंगल,  पिछले कई दिनों से जंगलों में आग लगने की घटना हो रही है, लेकिन वन विभाग आग लगाने वाले शरारती तत्वों का पता लगाने में नाकामयाब है.पिछले कई दिनों से आग लगने से जंगल झुलस रहे हैं, लेकिन यंहा आग बुझाने में नाकामयाब साबित हो रहा है विभाग इस बात का भी पता भी नहीं लगा पा रहा है कि आग कौन शरारती तत्व लगा रहा है.
शनिवार को बादलखोल अभ्यारण्य क्षेत्र के जंगल आग से धधक रहे थे. वहीं, आज सेन्द्रीमुंडा के पास जंगल में भीषण आग लगी हुई थी. नारायणपुर के आरा पहाड़,चेली टोंगरी जंगल में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं. आग की घटनाओं से जहां जंगल तबाह हो रहे हैं. साथ ही इन जंगलों में पाई जाने वाली औषधियों के साथ जंगली जानवरों की जान पर भी खतरा बना हुआ है।

इस अभ्यारण्य के जंगलों में कई जगह भीषण आग लगी है। बताया जा रहा है कि नारायणपुर क्षेत्र और सेन्द्रीमुंडा  के जंगलों में पिछले कई दिनों से लगातार आग लग रही  है दर्जनों एकड़ एरिया में लगी आग को बुझाने में वन अमला नाकाम है। तेंदूपत्ता तोड़ाई सीजन के पहले लगी आग का नुकसान सीधे तेंदूपत्ता तोड़ने वाले ग्रामीणों को भी हो रहा है।
जानकारी के मुताबिक, बादलखोल अभ्यारण्य के जशपुर वन मण्डल क्षेत्र नारायणपुर के जंगलों में आग लगी है। तेज हवाओं के कारण आग लगातार फैल रही है। जंगल में लगी भीषण आग का धुआं गांवों में भी पहुंच रहा है। 

आग पर काबू पाने के लिए हर बार  विभाग ने फायर वाचर दस्ते का गठन करता है। यह अग्नि रोधक दस्ता  जंगल में आग लगने की सूचना पर फौरन मौके पर जाना होता और वहां आग बुझाने का काम करता है। साथ ही जंगलों में गश्त कर यह देखना होता है कि कहीं आग तो नहीं लगी है। रेंज के प्रत्येक बिट में एक से दो फायर वाचरो को पूरे गर्मी के मौसम तक के लिए रखा जाता है, क्या कारण है कि इनके गस्ती करने के वावजूद भी जंगल मे आग लग रही है

वन विभाग की कोशिश नाकाम

ग्रामीणों द्वारा आगजनी की सूचना वन अमले को हमेशा दी जाती है, लेकिन सही समय पर गेम रेंज के स्टाफ आग पर काबू पाने में नाकाम रहती है। जिससे आग फैलते चला जाता है और बुझाते बुझाते कई एकड़ जंगल के छोटे छोटे पौधे नष्ट हो जाते है। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना के बाद भी आग बुझाने की तत्काल स्टापो के द्वारा कोशिश नहीं की जा रही है। 

जल रहे हैं पौधे, तेंदूपत्ता को भी नुकसान

वन मण्डल जशपुर के अंतर्गत आने वाले जंगल के कई इलाके में आग लगातार लग रही है। आग से छोटे पेड़ों के साथ ओषधि पौधे भी जल जा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि तेंदूपत्ता सीजन आने वाले कुछ महीनों में शुरू होने वाला  है। इस इलाके में ग्रामीण बड़ी संख्या में तेंदूपत्ता तोड़ने पहुंचते हैं। तेंदूपत्ता तोड़ने वाले ग्रामीणों को आग का नुकसान उठाना पड़ेगा।

वन विभाग द्वारा आगजनी की जानकारी सेटेलाइट से मिलने के दावे भी यहां नाकाम होते दिख रहे हैं। वन विभाग के अधिकारी अपने दायित्व का अच्छे से निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं. बादलखोल अभ्यारण्य की लापरवाही के कारण हर वर्ष क्षेत्र के जंगलों में आग लग रही है जंगल में आग लगने से विभाग के अधिकारियों को फायर की जानकारी मोबाइल पर मिल जाती है उसके बाद भी आग पर विभाग काबू नहीं पा रही हैं. इससे वनों को तो नुकसान होता ही है, साथ ही वन्य जीवों पर भी संकट खड़ा हो जाता है.

     लगातार भेजी जा रही है टीम

इस मामले में उप निदेशक एलिफेंट रिजर्व सरगुजा ने कलम की आवाज टीम से फोन पर बातचीत के दौरान कहा कि आगजनी की सूचना मिली है। आग बुझाने टीम भेजी गई है। टीम ने कुछ हद तक आग पर काबू पा लिया। जंहा जंहा आग लग रही है सभी में भी टीम भेजी जा रही है। जल्द ही आग पर पूरा नियंत्रण कर लिया जाएगा।

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शासकीय करण का वादा नही हुआ पूरा,इस मांग को लेकर पंचायत सचिव करेंगें विधानसभा का धेराव, कलेक्टर,जिला सीईओ,पुलिस अधीक्षक,एसडीएम एवं जनपद सीईओ को सौंपा ज्ञापन

जशपुर : छत्तीसगढ़ में पंचायत सचिवों के शासकीयकरण की मांग पूरी न होने पर राज्य भर के पंचायत सचिवों में भारी नाराजगी है। पंचायत सचिव संघ ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है।

सचिव संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 17 मार्च को विधानसभा का घेराव किया जाएगा। इसके बाद 18 मार्च 2025 से प्रदेशभर के जनपद मुख्यालयों में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होगी और 1 अप्रैल 2025 को मंत्रालय का घेराव कर प्रदेश सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।

प्रदेश भर के पंचायत सचिव संघ ने कहा कि विधानसभा के चुनाव समय में मोदी की गारंटी में प्रदेश के पंचायत सचिवों का शासकीयकरण करने का वादा किया गया था। डेढ़ वर्ष बीतने के बाद भी किया गया वादों पर आज पर्यन्त तक पूरा नहीं किया किया गया। 

सचिव संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि सचिवों के हड़ताल पर चले जाने से काम काज पर सीधा असर पड़ेगा। प्रदेश में कुल 10485 पंचायत सचिव कार्यरत हैं, सचिवों के आंदोलन का असर पूरे प्रदेश में पड़ेगा। पंचायत सचिव संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पंचायत सचिवों को नियमित करने के लिए बड़ी घोषणा की थी, पर आज तक अमल नहीं हुआ।

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मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को रंगों और उल्लास के महापर्व होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी


 
जशपुर :मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को रंगों और उल्लास के महापर्व होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने इस पावन अवसर पर सभी नागरिकों के जीवन में सुख, समृद्धि, आनंद और परस्पर प्रेम की कामना की है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि यह हमारे जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करने वाला पर्व है। यह त्यौहार हमें सिखाता है कि जीवन में प्रेम, सौहार्द और भाईचारे के रंग सबसे अनमोल हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि होली का त्यौहार सदियों से भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग रहा है, जहां भेदभाव मिट जाते हैं, और लोग आपसी स्नेह, उल्लास और उमंग के रंगों में घुल-मिल जाते हैं। यह पर्व हमें बुराई पर अच्छाई की विजय, प्रेम की जीत और समाज में सौहार्द्र को और मजबूत करने का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि हम सभी होली के पावन पर्व को प्रेम, सौहार्द और आनंद के साथ मनाएं, एक-दूसरे के जीवन में खुशियों के रंग भरें और छत्तीसगढ़ की समरसता और एकता को और अधिक सशक्त बनाएं।

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मुख्यमंत्री श्री साय सनातन समाज के अनुष्ठान कार्यक्रम में हुए शामिल,मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की 

जशपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय कांसाबेल विकास खंड के ग्राम टाटीडांड में होली के पावन अवसर पर  सनातन समाज के दुर्गा देवी संत समाज द्वारा आयोजित अनुष्ठान में अपनी धर्म पत्नी श्रीमती कौशल्या साय के साथ शामिल हुए उन्होंने भगवान राधा कृष्ण की पूजा अर्चना कर प्रदेश की सुख समृद्धि और खुशहाली की  कामना की इस अवसर पर गुरु महाराज स्व श्री धनपति पंडा के पुत्र श्री सहदेव पंडा उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि हर साल फागुन माह में होली के पावन पर्व पर सनातन समाज द्वारा अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है। और मुख्यमंत्री वर्षों से होली के पावन अवसर में शामिल होते हैं। 
उन्होंने सभी को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि होली रंगों और खुशियों का त्यौहार है सभी शान्ति और भाईचारे के साथ होली का पर्व मनाया।
उन्होंने कहा कि ग्राम टाटीडांड में होली के पावन पर्व पर सनातन समाज द्वारा अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है। वे वर्षों से इस अनुष्ठान में शामिल होते हैं। उन्होंने सभी लोगों को छत्तीसगढ़ शासन की योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 14 लाख लोगों को आवास बनाने के लिए स्वीकृत दी गई है। किसानों से धान खरीदी की जा रही है। और महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख महिलाओं को हर माह 1 हजार रूपए की राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि आगामी 21 मार्च से 27 मार्च तक कुनकुरी विकास खंड में सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर पहाड़ के पास महाशिवपुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। देश के प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित श्री प्रदीप मिश्रा कथा सुनाएंगे उन्होंने सभी को कथा सुनने के लिए आमंत्रित किया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की धर्म पत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने सभी को होली की शुभकामनाएं दी और अपने अनुभव साझा किए इस अवसर पर सनातन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को होली की दी शुभकामनाएं  बगिया में सरल सहज मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे लोगों और होली की दी शुभकामनाएं 

जशपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय बगिया में बड़ी संख्या में लोग होली की शुभकामनाएं देने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने सभी को आत्मीयता से मुलाकात करके गुलाल लगाया और अपनी शुभकामनाएं दी इस अवसर पर कलेक्टर श्री रोहित व्यास एस एस पी श्री शशि मोहन सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार जनप्रतिनिधिगण,आम नागरिक पत्रकार बंधु उपस्थित थे

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गर्मी आते ही बिजली की आंख मिचौली से उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी

 

नारायणपुर : क्षेत्र में गर्मी आते ही विद्युत व्यवस्था को लेकर आम जनता की परेशानी भी शुरू होते दिख रही है। आजकल नारायणपुर में  गर्मी के मौसम में बिजली की आंख मिचौली की समस्या के साथ-साथ ग्रामीण अंचल के लोग भी खासा परेशान व त्रस्त है।

 गर्मी के इस मौसम में नारायणपुर में आजकल कई बार बिजली के आंख मिचौली का सामना करना पड़ रहा हैं। लोगों का कहना है कि तेज धूप व गर्मी की शुरुआत होते ही बिजली की आंख मिचौली व अघोषित कटौती इस समय आग में घी डालने का काम करती है। किसी भी वक्त बिजली गुल हो जाती है, एक दिन में कई बार बिजली गुल होना आम बात हो गई है 

क्षेत्र में कब बिजली आएगी और कब कटेगी, इसका कोई समय-सारणी ही नहीं है। बिजली की आंख मिचौली ने लोगों का जीना हराम कर दिया है। बिजली विभाग द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बिजली की आंख मिचौली को लेकर सब स्टेशन में कारण पूछने पर जवाब भी सीधा न देकर यह कहा जाता है कि लाइन फाल्ट है जब लाइन पूरा बन्द हो जाएगा तब पता चलेगा फाल्ट का। फिर कहा जाता है कि हवा चलने से ऐसा हो रहा है।  कई तरह के जबाब देकर उपभोक्ताओं  को गुमराह में रखा जाता है।गर्मी के मौसम में लोगों को नियमित रूप से बिजली न रहने से परेशानी और भी बढ़ गई है. मौसम में परिवर्तन आने के बाद बिजली की आपूर्ति में भी परिवर्तन होने लगा है. जिसका सबसे अधिक असर छात्रों व किसानों पर पड़ रहा है।गर्मी के मौसम में लोगों को नियमित रूप से बिजली नहीं मिलने से परेशानी और भी बढ़ गई है।

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मिनीमाता जयंती पर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें किया नमन,नारी शिक्षा और मजदूरों के कल्याण के लिए उनके प्रयास ऐतिहासिक रहे


 रायपुर :मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महान समाजसेविका एवं छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद मिनीमाता की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि मिनीमाता जी का संपूर्ण जीवन समाज में व्याप्त छुआछूत, गरीबी, अशिक्षा और पिछड़ेपन को दूर करने के लिए समर्पित था।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नारी शिक्षा और मजदूरों के कल्याण के लिए उनके प्रयास ऐतिहासिक रहे हैं। उन्होंने सामाजिक बुराइयों के खिलाफ न केवल आवाज उठाई, बल्कि उन्हें समाप्त करने के लिए संघर्ष भी किया। वंचितों, शोषितों और महिलाओं के सशक्तिकरण में उनका योगदान अमूल्य है। श्री साय ने कहा कि मिनीमाता जी का सेवाभावी, कर्मठ और प्रेरणादायी व्यक्तित्व सभी के लिए मार्गदर्शक है। उनके विचार और कार्य हमें समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए सदैव प्रेरित करते रहेंगे।

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छत्तीसगढ़ का पहला स्थल कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान विश्व धरोहर की सूची में हुआ शामिल,बस्तर को मिलेगी अंतर्राष्ट्रीय पहचान

रायपुर :छत्तीसगढ़ के  कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान (KVNP) को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में प्राकृतिक श्रेणी के अंतर्गत शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि ये छत्तीसगढ़ के लिये बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि ये हर्ष का विषय है कि यूनेस्को द्वारा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया है । कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान न केवल जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, बल्कि यह स्थानीय जनजातीय संस्कृति और इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देता है। इस सूची में शामिल होने से बस्तर क्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी एवं पर्यटन को और भी बढ़ावा मिलेगा । यह उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है ।
उल्लखेनीय है कि यह उद्यान तीन महत्वपूर्ण मापदंडों—प्राकृतिक सौंदर्य, भूवैज्ञानिक विशेषताएँ, और जैव विविधता पर खरा उतरता है।  कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन द्वारा उद्यान को  यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार को प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था,  जिसे यूनेस्को द्वारा अपने अस्थाई सूची में चयन किया गया है।
कांगेर घाटी में प्राकृतिक सौंदर्य और अनूठी संरचनाएँ
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपने मनमोहक प्राकृतिक दृश्यों, हरी-भरी घाटियों, गहरी खाइयों और झरनों के लिए प्रसिद्ध है। तीरथगढ़ जलप्रपात, जो कांगेर नदी से निकलता है, 150 फीट की ऊंचाई से गिरता हुआ एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। कांगेर नदी अपने स्वच्छ जल और अनूठी चट्टानी संरचनाओं के कारण महत्वपूर्ण पर्यटन  स्थल है। इसके अलावा, कोटमसर, कैलाश, दंडक और ऐसी १५ से अधिक गुफाएँ अपने अद्वितीय प्राकृतिक स्वरूप और ऐतिहासिक महत्व के कारण देश और विदेश के पर्यटकों और वैज्ञानिकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।
भूवैज्ञानिक विशेषताएँ और जैव विविधता
यह उद्यान अपनी भूवैज्ञानिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की कार्स्ट संरचनाएँ, चूना पत्थर की गुफाएँ, जल संरचनाएँ और चट्टानी परतें वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन का एक महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इस क्षेत्र में भूवैज्ञानिक परिवर्तन देखे जाते हैं।  चूना पत्थर की गुफाएँ पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है |
 जैवविविधता से भरपूर यह उद्यान में विभिन्न वनस्पति, वन्यजीव और विशेष प्रजाति के प्रजातीय पाए जाते है| 963 प्रकार की वनस्पतियाँ, जिनमें 120 फ़ैमिली  और 574 प्रजातियाँ शामिल हैं। यहाँ दुर्लभ ऑर्किड की 30 प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं। 49 स्तनपायी, 210 पक्षी, 37 सरीसृप, 16 उभयचर, 57 मछलियाँ और 141 तितली प्रजातियाँ है । बस्तर हिल मैना (छत्तीसगढ़ का राज्य पक्षी), ट्रैवणकोर वुल्फ स्नेक, ग्रीन पिट वाइपर, मोंटेन ट्रिंकेट स्नेक जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ है ।
बस्तर क्षेत्र में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करता है। यहाँ गोंड और धुरवा जनजातियाँ रहती हैं, जो अपनी पारंपरिक रीति-रिवाजों, नृत्य, लोकगीतों और त्योहारों के लिए प्रसिद्ध हैं। इस क्षेत्र में स्थानीय आदिवासियों द्वारा हस्तशिल्प कला जैसे  बांस शिल्प कलाकृतियाँ विशेष रूप से लोकप्रिय हैं।  यहाँ के आदिवासी समुदाय प्रकृति से गहराई से जुड़े हुए हैं और जंगलों से जुड़ी अनेक कहानियाँ और मान्यताएँ पीढ़ियों से चली आ रही हैं। इको-टूरिज्म और साहसिक पर्यटन गतिविधियों में  जंगल सफारी, बर्ड वॉचिंग, ट्रेकिंग ,कयाकिंग बम्बू राफ्टिंग , कैम्पिंग , होमस्टे , गुफा भ्रमण और फोटोग्राफी के  बेहतरीन अवसर मिलते हैं, जिससे यह रोमांचक पर्यटन स्थल बनता है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक गुफाएँ, वन्यजीव, और सांस्कृतिक विरासत इसे छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करते हैं। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान  के विशेषता को देखते हुए इसे यूनेस्को ने अस्थायी सूची में शामिल किया गया है । उद्यान को यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया जाने से बस्तर क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर से इंद्रावती नदी की मुख्य धारा में पानी छोड़ा गया


 रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर में जल प्रवाह को नियंत्रित कर इंद्रावती नदी की मुख्य धारा में पानी छोड़ा गया है। ओडिशा सरकार की सहमति के बाद स्ट्रक्चर में रेत की बोरियां डालकर पानी का प्रवाह सुनिश्चित किया गया, जिससे इंद्रावती नदी में जल स्तर में वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देश पर जल संसाधन मंत्री श्री केदार कश्यप ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल से इंद्रावती नदी के जल संकट के समाधान हेतु चर्चा की। इस पर केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा के मुख्यमंत्रियों को समस्या के निराकरण हेतु आवश्यक निर्देश दिए। जिसके परिणामस्वरूप उड़ीसा राज्य की सहमति से जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर को अस्थायी रूप से एक फीट ऊंचा किया गया, जिससे इंद्रावती नदी के जल प्रवाह में सुधार हुआ।
इसके अतिरिक्त, इंद्रावती नदी के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में जमा रेत को हटाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, जिसे अप्रैल के पहले सप्ताह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस संबंध में कलेक्टर श्री हरिस एस के मार्गदर्शन में अपर कलेक्टर श्री सी.पी. बघेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री महेश्वर नाग और जल संसाधन विभाग के ईई श्री वेद पांडेय ने स्थानीय किसानों को जिला कार्यालय के प्रेरणा सभा कक्ष में पूरी जानकारी दी।
इंद्रावती नदी और जोरा नाला की समस्या
इंद्रावती नदी का उद्गम ओडिशा राज्य के कालाहांडी जिले के रामपुर धुमाल गांव से हुआ है। यह नदी 534 किलोमीटर की यात्रा के बाद गोदावरी नदी में मिलती है। नदी का कैचमेंट एरिया 41,665 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें ओडिशा में 7,435 वर्ग किमी, छत्तीसगढ़ में 33,735 वर्ग किमी और महाराष्ट्र में 495 वर्ग किमी शामिल हैं।
ओडिशा राज्य की सीमा पर ग्राम सूतपदर में इंद्रावती नदी दो भागों में बंट जाती है। एक भाग इंद्रावती नदी के रूप में 5 किमी बहकर ग्राम भेजापदर के पास छत्तीसगढ़ में प्रवेश करता है, जबकि दूसरा भाग जोरा नाला के रूप में 12 किमी बहते हुए शबरी (कोलाब) नदी में मिल जाता है। पहले जोरा नाला का पानी इंद्रावती में आता था, लेकिन धीरे-धीरे इसका बहाव बढ़ने से इंद्रावती का जल प्रवाह कम हो गया।
समस्या गंभीर होने पर दिसंबर 2003 में ओडिशा और छत्तीसगढ़ के प्रमुख अभियंताओं की बैठक में जोरा नाला के मुहाने पर जल विभाजन के लिए कंट्रोल स्ट्रक्चर बनाने का निर्णय लिया गया। यह स्ट्रक्चर ओडिशा सरकार द्वारा बनाया गया, जिसकी डिज़ाइन केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने तैयार की। निर्माण के बाद भी जोरा नाला में अधिक पानी जाने से छत्तीसगढ़ को ग्रीष्म ऋतु में औसतन 40.71% और ओडिशा को 59.29% जल प्रवाह मिला।
राज्य सरकार की पहल से समाधान की दिशा में प्रगति
इंद्रावती नदी में न्यूनतम जल प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने कई प्रयास किए। 6 जनवरी 2021 को ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण किया। इस निरीक्षण में कंट्रोल स्ट्रक्चर के अपस्ट्रीम में जलभराव रोकने के लिए रेत और बोल्डर हटाने तथा जोरा नाला के घुमाव को सीधा करने का अनुरोध किया गया।
वर्ष 2018 के बाद इंद्रावती नदी में सतत जल प्रवाह कम होने की समस्या बनी हुई थी। अब राज्य सरकार के प्रयासों से ओडिशा सरकार का सहयोग प्राप्त हुआ है, जिससे नदी के जल प्रवाह को संतुलित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इससे इंद्रावती नदी में जल प्रवाह बढ़ेगा और किसानों को सिंचाई के लिए पानी की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

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वाहन चेकिंग के दौरान इनोवा कार में बनाये गए लाकर से निकले डेढ़ करोड़ से अधिक की नगदी नोट, रुपये के साथ दो अन्तर्राजीय आरोपी गिरप्तार

रायपुर पुलिस द्वारा प्रतिदिवस वाहन चेकिंग का विशेष अभियान चलाया जा रहा है,इसी तारतम्य में आज थाना आमानाका के द्वारा टाटीबंध थाना के पास वाहन चेकिंग की जा रही थी वाहन के दौरान सभी वाहन के डिक्की को चेक किया जा रहा था वाहन इनोवा क्रिस्टा क्रमाक 23-BH-8886J को रोका गया जिसमे दो व्यक्ति बैठे हुये थे जिन्से पुछताछ पर नागपुर जाना बताये एंव और पुछता करने पर घबराने लगे वाहन के पीछे डिक्की को चेक करवाने से मना करने लगे तब शंका होने वाहन के पीछे डिक्की को अच्छी तरीके से चेक किया गया जिसमे सीट के नीचे एक पृथक से लॉकर बनाया गया था जिसे खुलवाने पर लॉकर मे भारी मात्रा मे पैसा रखा हुआ मिला जिस सबंध मे थाना प्रभारी आमानाका द्वारा तत्काल जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दिया गया दोनो व्यक्तियों से उक्त रूपये के सबंध पुछताछ किया गया जो सही जवाब नही दे पाये वाहन एंव आरोपी तथा पैसो को समक्ष गवाहन के जप्त किया पैसो की गिनती की गई जो 1,66,99,900/- रूपये होना पाया गया आरोपियो के विरूद्ध धारा 106 बीएनएस के तहत कार्यवाही की गई है।स्रोत एजेंसी

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर होली के अवसर पर अम्बेडकर अस्पताल में 24 घंटे जारी रहेगी आपात चिकित्सा सेवा  


रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल और स्वास्थ्य मंत्री श्री श्यामबिहारी जायसवाल के दिशानिर्देश पर होली के त्योहार को ध्यान में रखते हुए अम्बेडकर अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने की व्यवस्था की गई है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य संबंधित विभागों को अलर्ट मोड में रहने के लिए निर्देशित किया है।
होली के दौरान किसी भी प्रकार की दुर्घटना या आपातकालीन चिकित्सा स्थिति के संभावित मामलों को देखते हुए आपात चिकित्सा सेवाओं को चौबीसों घंटे चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं। होली के दिन 14 मार्च को शासकीय अवकाश होने के कारण ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) बंद रहेगा, लेकिन इमरजेंसी सेवाएं पूर्ववत 24 घंटे उपलब्ध रहेंगी।
आपात चिकित्सा सेवाओं को लेकर विशेष प्रबंध
आपातकालीन वार्डों में जीवन रक्षक दवाओं और आवश्यक संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। मेडिकल स्टाफ को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता दी जा सके। सभी डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को इमरजेंसी ड्यूटी के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है। मरीजों को समय पर इलाज मिल सके, इसके लिए ट्रॉमा और इमरजेंसी यूनिट को विशेष रूप से सशक्त किया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था भी होगी चाक-चौबंद
अस्पताल परिसर में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा गार्ड और बंदूकधारी गार्ड तैनात किए गए हैं।  सिक्योरिटी सुपरवाइजर को विशेष सतर्कता बरतने और सुरक्षा स्टाफ को चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। आपात स्थिति में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस से समन्वय किया गया है।
डीकेएस अस्पताल तक एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध
गंभीर मरीजों को आवश्यकतानुसार  चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए डीकेएस अस्पताल स्थित सुपर स्पेश्यलिटी विभाग में भेजने की  प्रक्रिया को तेज और सुगम बनाने के लिए अम्बेडकर अस्पताल से डीकेएस अस्पताल तक एम्बुलेंस सेवा 24 घंटे सक्रिय रहेगी। अस्पताल प्रशासन ने सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि होली का त्योहार सावधानीपूर्वक मनाएं और किसी भी आकस्मिक चिकित्सा स्थिति में घबराए बिना अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं का लाभ उठाएं।

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छत्तीसगढ़ व्यवसायिक परीक्षा मंडल द्वारा मत्स्य निरीक्षक भर्ती परीक्षा 23 मार्च को  


रायपुर : छत्तीसगढ़ व्यवसायिक परीक्षा मंडल द्वारा 23 मार्च 2025 को संचालनालय मछली पालन विभाग के अंतर्गत मत्स्य निरीक्षक भर्ती परीक्षा (FF124) का आयोजन 23 मार्च 2025 को किया जाएगा। अभ्यर्थी 13 मार्च 2025 से छत्तीसगढ़ व्यवसायिक परीक्षा मंडल की आधिकारिक वेबसाइट से अपने प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त अभ्यर्थी पंजीकृत मोबाईल नंबर पर प्राप्त एसएमएस के यूआरएल को क्लिक कर सीधे अपने मोबाईल से प्रवेश पत्र प्राप्त कर प्रिंट आउट ले सकते है। प्रवेश पत्र के बिना किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। परीक्षा केंद्र में मूल फोटो पहचान पत्र अनिवार्य रूप से लाना होगा। अधिक जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 0771-2972780 एवं मो. नं. +91-82698-01982 पर संपर्क किया जा सकता है।

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आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा राज्य में मृत्यु के कारणों के चिकित्सकीय प्रमाणीकरण पर कार्यशाला हुआ आयोजित


 रायपुर :आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा राज्य में मृत्यु के कारणों के चिकित्सकीय प्रमाणीकरण (एमसीसीडी) विषय पर राजधानी रायपुर में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में राज्यभर के चिकित्सकों, जनगणना निदेशालय, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यशाला में आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के अपर संचालक ने एमसीसीडी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए अस्पतालों से अधिक संख्या में एमसीसीडी प्रपत्र प्राप्त करने और आंकड़ों की गुणवत्ता सुधारने करने, एमसीसीडी की प्रक्रिया को बेहतर बनाने और विभिन्न विभागों में समन्वय पर जोर दिया। जनगणना कार्य निदेशालय छत्तीसगढ़ के उप निदेशक ने एमसीसीडी में अब तक किए गए प्रयासों की जानकारी दी और राज्यभर के अस्पतालों से एमसीसीडी प्रपत्रों के संग्रहण की आवश्यकता पर जोर दिया।
एम्स रायपुर के विशेषज्ञों का तकनीकी सत्र
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. स्वप्निल अखाड़े ने एमसीसीडी एवं आईसीडी-10 (International Classification of Diseases&10) के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने फॉर्म-4 को सही तरीके से भरने, मृत्यु के कारणों को क्रमबद्ध लिखने और अंग्रेजी में स्पष्ट एवं बोल्ड अक्षरों में दर्ज करने की तकनीकी जानकारी दी। साथ ही एमसीसीडी आंकड़ों के आधार पर स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण में सरकार को होने वाले लाभ पर भी चर्चा की।

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विधानसभा परिसर में आज होली मिलन समारोह में हुआ रंग-गुलाल से सराबोर,विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष सहित सभी विधायकों ने खेली होलीमंत्री-विधायकों ने फाग गीतों पर जमकर झूमे

रायपुर : विधानसभा परिसर में आज होली मिलन समारोह का रंगारंग आयोजन हुआ, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित तमाम विधायकों ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएँ दीं। आयोजन का पूरा माहौल होली के उल्लास में सराबोर रहा। मंत्रियों और विधायकों ने पारंपरिक फाग गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिस पर विधानसभा सदस्य झूमते नजर आए।
मंत्री-विधायकों के फाग गीतों से गूंजा विधानसभा परिसर
होली मिलन समारोह में लोक परंपरा का विशेष रंग देखने को मिला। मंत्री-विधायकों द्वारा गाए गए फाग गीतों से विधानसभा परिसर में सांस्कृतिक समृद्धि की झलक दिखी।
  राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने मुख मुरली बजाए, छोटे से श्याम कन्हैया गीत की मधुर प्रस्तुति दी।विधायक श्री अनुज शर्मा ने का तैं मोला मोहिनी डाल दिये रे और रंग बरसे गीत गाकर समां बांध दिया। विधायक श्री कुंवर सिंह निषाद ने फागुन मस्त महीना और चना के डार राजा गीत गुनगुनाया। विधायक श्री दिलीप लहरिया ने नदिया के पार म, कदली कछार म गीत सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विधायक श्री रामकुमार यादव और श्रीमती चातुरी नंद ने भी फाग गीतों से समां बांधा।
डॉ. सुरेंद्र दुबे की कविताओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बढ़ाया रंग
    लोकप्रिय कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे ने अपनी हास्य और होली की रंगीन कविताओं से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अलावा श्री राकेश तिवारी और उनकी टीम ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने डॉ. सुरेंद्र दुबे, श्री राकेश तिवारी व उनकी टीम को सम्मानित किया।
    इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वनमंत्री श्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल, श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, विधायक श्री अजय चंद्राकर, श्री धर्मलाल कौशिक, श्री पुरंदर मिश्रा, श्री धर्मजीत सिंह, श्री मोतीलाल साहू, श्री सुशांत शुक्ला, श्री संदीप साहू, गुरु खुशवंत साहेब, श्री भैयालाल राजवाड़े, श्री ईश्वर साहू, श्री कुंवर सिंह निषाद, श्री रिकेश सेन, श्री रामकुमार यादव, श्रीमती भावना बोहरा, श्री योगेश्वर राजू सिन्हा, श्री अटल श्रीवास्तव, श्री ललित चंद्राकर सहित विधानसभा के अधिकारी, कर्मचारी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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बस्तर पंडुम 2025: लोकसंस्कृति और परंपराओं का भव्य उत्सव,बस्तर पंडुम का लोगो मुख्यमंत्री ने किया अनावरण,बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की अनूठी पहल 

रायपुर : बस्तर के लोग जीवन का हर पल उत्सव की तरह जीते हैं और अपनी खुशी की अभिव्यक्ति के लिए उनके पास समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। बस्तर में शांति स्थापना के लिए हम तेजी से अपने कदम बढ़ा रहे हैं और बस्तर पंडुम के माध्यम से बस्तर के लोकजीवन और लोकसंस्कृति को सहेजने के साथ ही उनकी उत्सवधर्मिता में हम सहभागी बनेंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष में मांदर की थाप पर नाचते कलाकारों की मौजूदगी में बस्तर पंडुम 2025 के लोगो का अनावरण किया और यह बातें कही। उन्होंने बस्तर पंडुम के सफल आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह आयोजन सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ ही बस्तर के प्रतिभाशाली कलाकारों को सशक्त मंच प्रदान करेगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने बस्तर पंडुम के बुकलेट का विमोचन किया।
 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद बस्तर का विकास और वहां के लोगों को मुख्य धारा से जोड़ना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल रहा है। बस्तर को माओवाद से मुक्त करने की दिशा में हमने तेजी से अपने कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक और हाल ही में आयोजित अबूझमाड़ पीस हॉफ मैराथन में भी बस्तर वासियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। यह दर्शाता है कि बस्तर वासियों का विश्वास लगातार शासन के प्रति बढ़ा है और वे क्षेत्र में शांति और अमन-चैन चाहते हैं।
        मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमने बजट में नक्सली हिंसा से ग्रसित रहे पुवर्ती गांव में भी अस्पताल खोलने का बड़ा निर्णय लिया है। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से हम बस्तर वासियों के मूलभूत जरूरत को तेजी से पूरा कर रहें हैं।
        मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के लोग अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं और हर मौके को अपने खास अंदाज में सेलिब्रेट करते हैं । बस्तर पंडुम के माध्यम से बस्तर के असल जीवन को और करीब से देखा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम में नृत्य, गीत, लोककला, लोकसंस्कृति, नाट्य, शिल्प, रीति- रिवाज, परंपरा और व्यंजन सहित विभिन्न 7 विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी। श्री साय ने कहा कि बस्तर में खुशहाली हो, लोग भयमुक्त होकर अपने अंदाज में जिये और उन्हें शासन की सभी सुविधाओं का लाभ मिले।
       इस मौके पर उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, विधायक श्री किरण देव, विधायक सुश्री लता उसेंडी, विधायक श्री विनायक गोयल, संस्कृति विभाग के सचिव श्री अन्बलगन पी. और संचालक संस्कृति श्री विवेक आचार्य मौजूद रहे।
बस्तर की पहचान को दर्शा रहा है बस्तर पंडुम का लोगो
     बस्तर पंडुम के लोगो में बस्तर के लोकजीवन को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया है और यह उनकी सांस्कृतिक पहचान से गहरे से जुड़ा हुआ है। बस्तर के विरासत को बहुत ही कलात्मक ढंग से दिखाने का प्रयास इसमें किया गया है।  "बस्तर पंडुम" गोंडी का शब्द है जिसका अर्थ है बस्तर का उत्सव। प्रतीक चिन्ह में बस्तर की जीवनरेखा इंद्रावती नदी, चित्रकूट जलप्रपात, छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु वनभैंसा, राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना, बायसन हॉर्न मुकुट, तुरही, ढोल, सल्फी और ताड़ी के पेड़ को शामिल गया है। इस प्रतीक चिन्ह के माध्यम से सरल, सहज और उम्मीदों से भरे अद्वितीय बस्तर को आसानी से जाना और समझा जा सकता है।
नृत्य, गीत समेत 07 प्रमुख विधाओं पर केंद्रित होगा आयोजन
‘‘बस्तर पंडुम 2025’’ में जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, पारंपरिक वेशभूषा एवं आभूषण, शिल्प-चित्रकला और जनजातीय व्यंजन एवं पारंपरिक पेय से जुड़ी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। ये स्पर्धाएं तीन चरणों में संपन्न होंगी। जनपद स्तरीय प्रतियोगिता 12 से 20 मार्च, जिला स्तरीय प्रतियोगिता 21 से 23 मार्च, संभाग स्तरीय प्रतियोगिता दंतेवाड़ा में 1 से 3 अप्रैल तक सम्पन्न होगी। प्रत्येक स्तर पर प्रतिभागियों को विशेष पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।
बस्तर के लोकजीवन और परंपराओं पर आधारित आयोजन होंगे प्रमुख आकर्षण
    बस्तर पंडुम में बस्तर की पारंपरिक नृत्य-शैली, गीत, रीति-रिवाज, वेशभूषा, आभूषण और पारंपरिक व्यंजनों का शानदार प्रदर्शन होगा। प्रतियोगियों के प्रदर्शन को मौलिकता, पारंपरिकता और प्रस्तुति के आधार पर अंक दिए जाएंगे। आयोजन में समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नागरिकों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा। प्रतियोगिता के विजेताओं के चयन के लिए एक विशेष समिति बनाई गई है, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ आदिवासी समाज के वरिष्ठ मुखिया, पुजारी और अनुभवी कलाकार शामिल रहेंगे। इससे प्रतियोगिता में पारदर्शिता बनी रहेगी और पारंपरिक लोककला को न्याय मिलेगा।

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स्कूलों में चढ़ा होली का रंग : माय छोटा स्कूल जशपुर ने मना होली महोत्सव,नन्हे मुन्हे हुए रंग से सराबोर,गाने में थिरकते रहे बच्चे और शिक्षिकाएं

जशपुर : आज स्कूल की छुट्टी होते ही छात्र छात्राओं ने एक दूसरे को खूब रंग गुलाल लगाया। इस मामले में शिक्षक भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने भी होली खेली और एक दूसरे को होली की बधाई दी।
माय छोटा स्कूल जशपुर (प्ले स्कूल) बिजली टोली में बुधवार को छोटे छोटे बच्चो ने स्कूल में खूब होली खेली। छात्र-छात्राओं ने एक दूसरे को जमकर गुलाल लगाया। वहीं शिक्षकों ने भी बच्चों के साथ इस होली मिलन कार्यक्रम को उत्सुकता के साथ इस कार्यक्रम को मनाया। स्कूल के संचालक मनीष गुप्ता ने बताया कि होली प्रेम और सौहार्द तथा आपसी भाईचारे का त्योहार है। उन्होंने सभी बच्चों को होली का त्योहार सावधानी पूर्वक मनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा की प्राकृतिक रंगों से ही होली खेलें। छुट्टी के बाद घर जाने वाले छात्र छात्राएं अबीर व गुलाल से सराबोर दिखाई दिए।
*होली के गानों में थिरके बच्चे*

शहर के माय छोटा स्कूल जशपुर (प्ले स्कूल) बिजली टोली में बुधवार को होली सेलिब्रेशन हुआ। जिसमें बच्चों ने खूब मस्ती की। साथ ही कई शिक्षाप्रद बातें भी सीखी। नीला रंग आकाश और समुद्र का रंग है। इसे अक्सर गहराई और स्थिरता से जोड़ा जाता है। नीला रंग विश्वान ज्ञान, आत्मविश्वास, बुद्धि और सच्चाई का प्रती अवसर पर नन्हे मुन्ने बच्चो ने होली के गानों पर थिरकते हुए नजर आए।
इस अवसर पर संस्था की प्राचार्या  मनीषा गुप्ता , शिक्षिका अर्चना मुखर्जी, वर्षा पांडे, कल्पना खेस, जयंती गुप्ता, सरोजनी यादव, किरण बेक, रेणु बेक सहित स्कूल के नंन्हे मुन्ने बच्चे शामिल थे।

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