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जागरूक शिक्षक संघ की चेतावनी : बस्तर जेडी जल्द नहीं हटाए गए तो जगदलपुर में करेंगे अनिश्चितकालीन चक्काजाम ....

जगदलपुर 15 अक्टूबर 2025 : 
 बस्तर जेडी राकेश पांडे द्वारा शिक्षकों से दुर्व्यवहार की बातें सोशल मीडिया में लगातार छाई हुई है। विगत दिनों जेडी राकेश पांडे द्वारा एक शिक्षक के पहनावे को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए उसे कार्यालय से भगा दिया गया था।
         जिससे प्रदेश का शिक्षक समाज काफी नाराज है। इस मामले में बस्तर के शिक्षकों ने एकजुटता दिखाते हुए पूर्व आईएएस अधिकारी एवं वर्तमान विधायक नीलकंठ को ज्ञापन सौंपा है।
        छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ ने दो टूक कहा है कि ऐसे अधिकारी जो शिक्षकों को प्रताड़ित एवं शोषण करें वह कतई बर्दाश्त नहीं। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जाकेश साहू ने राज्य सरकार को तीन दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि बस्तर जेडी को आगामी तीन दिवस के भीतर नहीं हटाया गया तो पूरे बस्तर संभाग के हजारों शिक्षकों द्वारा जगदलपुर हाईवे पर अनिश्चितकालीन चक्का जाम किया जाएगा।
        साथ ही बस्तर के सारे स्कूलों में अनिश्चितकालीन तालेबंदी कर दी जाएगी इसके जिम्मेदार बस्तर जेड राकेश पांडे होंगे। 
          संघ के प्रदेश अध्यक्ष जाकेश साहू, प्रदेश उपाध्यक्ष शिवकुमार साहू, प्रदेश महासचिव भोजराम साहू, गायत्री मंडलोई, महेश्वर कोटपरिहा, प्रदेश संयुक्त सचिव हरिशंकर पटेल,प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रोहित कुमार पटेल, अमर दास बंजारे, रामसेवक पैकरा, सहित संघ के सभी सदस्यों ने बस्तर जेडी राकेश पांडे को तत्काल हटाने की मांग राज्य सरकार से की है।

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विश्व हाथ धुलाई दिवस पर स्वच्छ संकल्प अभियान अंतर्गत बच्चों को स्वच्छता के प्रति किया गया जागरूक

जशपुरनगर 15 अक्टूबर 2025/ स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत चल रहे “स्वच्छ संकल्प अभियान” के अंतर्गत आज जिले के विभिन्न विद्यालयों में विश्व हाथ धुलाई दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को हाथ धोने के महत्व एवं इसके सही तरीकों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें दैनिक जीवन में स्वच्छ आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों द्वारा हाथ धोने के पांच चरणों का व्यवहारिक प्रदर्शन किया गया, जिसमें साबुन और स्वच्छ जल से हाथ धोने की विधि समझाई गई। विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लेकर सीखी गई विधि का अभ्यास किया। उपस्थित अतिथियों ने बताया कि नियमित रूप से हाथ धोने से अनेक संक्रामक बीमारियों से बचाव संभव है। इस अवसर पर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के जिला समन्वयक श्री मदन प्रमी, यूनिसेफ के जिला समन्वयक श्री शास्त्री कुमार, विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। अतिथियों ने बच्चों से जीवनभर स्वच्छता को आदत के रूप में अपनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज का निर्माण तभी संभव है जब स्वच्छता प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व बने।

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अखिल भारतीय सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा हेतु 30 अक्टूबर तक कर सकते हैं ऑनलाईन आवेदन

जशपुरनगर 15 अक्टूबर 2025/  सैनिक स्कूल अम्बिकापुर में शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 6 वीं और कक्षा 9वीं में बालक एवं बालिकाओं के प्रवेश हेतु राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित पेन एवं पेपर बहुविकल्पीय प्रश्न पेपर पैटर्न   आधारित अखिल भारतीय सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा का आयोजन जनवरी 2026 को किया जाएगा। जिसके लिए 30 अक्टूबर 2025 तक ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

           सैनिक स्कूल में प्रवेश के लिए परीक्षार्थियों की चयन प्रक्रिया दो चरणों में होगी। सर्वप्रथम उन्हें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा आयोजित अखिल भारतीय सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा में सफल होना होता है। जिसके पश्चात उत्तीर्ण परीक्षार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण होता है। स्वास्थ्य परीक्षण में फिटनेस तथा लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर प्रावीण्य सूची बनती है। केवल अंतिम प्रावीण्य सूची में चयनित होने वाले अभ्यर्थियों का ही सैनिक स्कूल अम्बिकापुर में प्रवेश होता है।  

           सैनिक स्कूल अम्बिकापुर में प्रवेश हेतु इच्छुक अभ्यर्थी ऑनलाईन आवेदन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के आधिकारिक वेबसाईट    www.nta.ac.in  या   https://exams.nta.ac.in/sainik-school-society   पर 30 अक्टूबर 2025 शाम 05ः00 बजे तक भर सकते है। कक्षा छठवीं की प्रवेश परीक्षा में बैठने के लिए विद्यार्थी की आयु 31 मार्च 2026 को 10 से 12 वर्ष के बीच होना चाहिए एवं प्रवेश के समय कक्षा पाचवीं उत्तीर्ण होना चाहिए। कक्षा नौवीं के लिए विद्यार्थी की आयु 31 मार्च 2026 को 13 से 15 वर्ष के बीच होना चाहिए तथा प्रवेश के समय अभ्यर्थी को कक्षा आठवीं उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। सामान्य, रक्षा (सेवारत/सेवानिवृत्त) एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (एनसीएल) के लिए 850.00  रुपये व अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति हेतु 700.00 रुपये परीक्षा शुल्क निर्धारित है जिसका भुगतान क्रेडिट कार्ड/डेबिट कार्ड/नेट बैंकिंग/पेटीएम वालेट/यूपीआई के माध्यम से ऑनलाईन करना होगा। ऑनलाइन फार्म के पंजीयन में केवल अभिभावक का ही ईमेल आईडी एवं मोबाइल नम्बर भरना होगा। ऑनलाइन फार्म भरते समय अभ्यर्थी के पासपोर्ट आकार का रंगीन फोटो, हस्ताक्षर, बाएं अंगूठे का निशान, जन्म प्रमाण पत्र के साथ अभ्यर्थी/अभिभावक के निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, रक्षा कर्मियों के सेवा/पेंशन दस्तावेज़ का स्केन कॉपी होना आवश्यक है। ऑनलाइन आवेदन करते समय अभ्यर्थी के जाति, वर्ग आदि के बारे में सही जानकारी भरना होगा, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की असुविधा ना हो।  प्रवेश परीक्षा से संबंधित अन्य जानकारी राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की वेबसाइट www.nta.ac.in   या  https://exams.nta.ac.in/sainik-school-society सैनिक स्कूल अम्बिकापुर के आधिकारिक वेबसाईट     https://sainikschoolambikapur.org.in/  से प्राप्त कर सकते है ।

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744 गांवों में डिजिटल फसल सर्वेक्षण कार्य पूर्ण...चार लाख से अधिक लगी फसल की जानकारी किया गया ऑनलाइन अपलोड

जशपुरनगर 15 अक्टूबर 2025/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास के मार्गदर्शन में जिले के सभी तहसीलों में एग्रीस्टैक परियोजना अंतर्गत डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इसके तहत जिले के कुल 744 गांवों के 4 लाख 3 हजार से अधिक खसरों में डीसीएस के माध्यम से तथा शेष खसरों में मैन्युअल गिरदावरी कर फसलों की ऑनलाइन प्रविष्टि की गई है। इसका उद्देश्य भूमि पर लगी फसल एवं उसके क्षेत्रफल का सटीक आंकलन कर पारदर्शिता एवं उत्पादकता का अनुमान सुनिश्चित करना है। डीसीएस एवं मैन्युअल गिरदावरी से प्राप्त डाटा का उपयोग राज्य शासन द्वारा धान खरीदी सहित अन्य कृषि योजनाओं में किया जाएगा। विशेष अभियान के तहत चलाए गए सर्वे कार्य में सर्वेक्षण कर्ताओं द्वारा किसानों के खेतों में पहुंचकर मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से  किस रकबे में कौन सी फसल लगाई गई है, इसकी जानकारी ऑनलाइन अपलोड की गई।


*ऑनलाइन देख सकेंगे खेत और फसल का विवरण* - किसान अपने गांव का गिरदावरी डाटा राजस्व विभाग के वेबसाइट में तथा भुइयां पोर्टल के माध्यम से मैन्युअल गिरदावरी का डाटा देख सकते है। यदि किसी किसान को डीसीएस अथवा मैन्युअल गिरदावरी के डाटा में त्रुटि दिखाई देती है, तो वे संबंधित तहसीलदार के समक्ष लिखित आवेदन देकर दावा-आपत्ति प्रस्तुत कर सकते हैं। प्राप्त शिकायतों का त्वरित निराकरण किया जाएगा।

*फसल सर्वेक्षण में डिजिटल तकनीक का उपयोग*-
इसके तहत मोबाइल इंटरफेस के माध्यम से सीधे खेत से डाटा एकत्र करने हेतु डिजिटल फसल सर्वेक्षण प्रणाली स्थापित की गई। यह प्रणाली प्रत्येक कृषि भूखंड की वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराती है, जिससे सटीक उत्पादन अनुमान लगाया जा सकेगा। 

*किसानों के डेटा की पूर्ण गोपनीयता सुनिश्चित* -
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अनुरूप एग्रीस्टैक विकसित किया गया है, जो किसानों के डेटा की गोपनीयता सुनिश्चित करता है। किसानों का अपने डेटा पर पूरा नियंत्रण होता है, जिसे केवल उनकी सहमति से अधिकृत संस्थाओं के साथ साझा किया जाता है। एग्रीस्टैक के माध्यम से सुरक्षित एपीआई और टोकन आधारित प्रमाणीकरण से डेटा तक नियंत्रित पहुंच सुनिश्चित की गई है।

*किसानों तक पहुंची डिजिटल सुविधा* - जिन किसानों के पास मोबाइल फोन नहीं हैं, उनके लिए किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), कृषि सखियों एवं कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से पंजीयन और सेवा प्राप्ति की सुविधा दी गई। जिले में विशेष शिविरों का आयोजन भी किया गया, ताकि कोई भी किसान एग्रीस्टैक के लाभ से वंचित न रहे। डिजिटल क्रॉप सर्वे से जिले में गिरदावरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है तथा किसानों को धान खरीदी, फसल बीमा और अन्य योजनाओं के लिए पात्रता की पुष्टि में सुविधा मिल रही है।

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अपर कलेक्टर ने साप्ताहिक समय सीमा की ली बैठक....मुख्यमंत्री जनदर्शन,मुख्यमंत्री की घोषणा और कलेक्टर जनदर्शन के आवेदनों का गंभीरता से निराकरण करने के दिए निर्देश 

जशपुर, 15 अक्टूबर 2025/ अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू  ने मंगलवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में साप्ताहिक समय सीमा की बैठक ली उन्होंने मुख्यमंत्री जनदर्शन , मुख्यमंत्री की घोषणा और कलेक्टर जनदर्शन के आवेदनों का गंभीरता से निराकरण करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के घोषणा के तहत स्वीकृति कार्यों को समय सीमा में पूर्ण करें इसके साथ ही गुणवत्ता का भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
 
  उन्होंने केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ हितग्राहियों को देने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि बिजली बिल के बोझ से मुक्ति एवं पर्यावरण संरक्षण संवर्धन के लिए इस योजना का लाभ अधिक से अधिक उठाएं योजना के तहत उपभोक्ताओं को आकर्षक सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।

अपर कलेक्टर ने  पीएम जनमन योजनांतर्गत कार्यों की समीक्षा करते हुए सभी योजनाओं का लाभ सभी हितग्राहियों तक पहुंचाना सुनिश्चित करने को कहा। 
          उन्होंने अधिकारियों को सभी विभागीय कार्यों को केवल ई-आफिस में माध्यम से निष्पादित करने हेतु निर्देश दिए। इसके साथ ही सभी विभागों का जीएसटी रिटर्न फाइल करने एवं सभी कर्मचारियों का ई-केवायसी पूर्ण करने के निर्देश दिए। 
 इस अवसर पर  सभी एसडीएम, डिप्टी कलेक्टर एवं विभागीय अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।

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सफलता : दीपावली पर्व के अवसर पर कलात्मक दीयों और पूजा सामग्री के बनाकर समूह की महिलाएं हो रही समृद्ध 

गौरेला पेंड्रा मरवाही, 15 अक्टूबर 2025/ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की आत्मनिर्भर भारत की संकल्प को पूरा करने की दिशा में स्वसहायता समूह की महिलाएं अपनी योगदान दे रहीं हैं। दीपावली पर्व के अवसर पर कलात्मक दीयों और पूजा सामग्री का निर्माण करके स्थानीय हाट बाजारों में बिक्री करके समृद्ध हो रहीं हैं। जिला प्रशासन एवं ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से पेंड्रा जनपद की पांच महिला स्वसहायता समूहों की 12 महिलाएं मिलकर अब तक 70 हजार मिट्टी के दीये तैयार कर लिए हैं। इसके साथ ही अगरबत्ती, बाती एवं तोरण तैयार कर स्थानीय बाजारों-कोटमी, नवागांव और कोड़गार हाट बाजार में बेच रही हैं। समूह द्वारा निर्मित दीये रायपुर में आयोजित सरस मेला में भी प्रदर्शित किया गया है और बेचे भी जा रहे हैं। समूह द्वारा अब तक 1 लाख 11 हजार 500 रूपये की दीयों एवं पूजा सामग्री का बिक्री की जा चुकी है।    

 समूह की सदस्य ग्राम झाबर निवासी श्रीमती क्रांति पुरी ने बताया कि इस काम से उन्हें करीब 9 हजार रुपये का मुनाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष की दिवाली उनके लिए बहुत खास बन गई है और वे इस आय से काफी खुश हैं। ब्लॉक मिशन प्रबंधक सुश्री मंदाकिनी कोसरिया ने जानकारी दी कि इस कार्य से सीधे तौर पर पांच महिला स्वसहायता समूहों के परिवारों को आर्थिक लाभ मिल रहा है। इससे महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में भी सक्षम हो रही हैं। यह पहल न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन कर रही है, बल्कि परंपरागत दीयों के उपयोग को भी बढ़ावा दे रही है। मिट्टी के दीयों की बिक्री से जहां महिलाओं की आमदनी बढ़ी है, वहीं पर्यावरण के लिए भी अनुकूल विकल्प है।

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छत्तीसगढ़ आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के क्रियान्वयन में देश में पहले पायदान पर...मिला श्रेष्ठ प्रदर्शन राज्य का सम्मान

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रायपुर 15 अक्टूबर 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के क्रियान्वयन उत्कृष्ट कार्य हुआ है। पिछले जनवरी 2025 छत्तीसगढ़ इस योजना के क्रियान्वयन में देश में सबसे पिछले पायदान पर था, लेकिन मुख्यमंत्री श्री साय की सतत मॉनीटरिंग के बाद पिछले नौ माह में छत्तीसगढ़ आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के क्रियान्वयन में देश में पहले पायदान पर आ गया है। भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण कॉन्क्लेव में छत्तीसगढ़ को श्रेष्ठ प्रदर्शन राज्य का सम्मान प्रदान किया गया है। 
  यह सम्मान राज्य के अथक प्रयासों और स्वास्थ्य क्षेत्र में अनुकरणीय कार्यशैली का प्रमाण है। सम्मान देने के मुख्य कारण पहचान किए गए सभी मुद्दों पर गहन फील्ड ऑडिट का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। आयुष्मान योजना के दावा प्रक्रिया में टर्नअराउंड टाइम को उल्लेखनीय रूप से घटाया गया, जिससे लाभार्थियों को त्वरित सेवाएं मिलीं। सभी संबंधित हितधारकों की विस्तृत संवेदनशीलता और जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन कर उन्हें जागरूक बनाया गया। एनएचए की पैनल्ड स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ प्रभावी संचार तंत्र स्थापित कर समन्वय को बेहतर किया गया। छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास राज्य के नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मील का पत्थर साबित हुआ है। मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ की इस उपलब्धि के लिए स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को बधाई दी है। 
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना भारत सरकार की एक स्वास्थ्य बीमा योजना है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करती है। यह योजना सार्वजनिक और निजी अस्पतालों में द्वितीयक और तृतीयक देखभाल के लिए है और इसका उद्देश्य परिवारों पर स्वास्थ्य खर्च के बोझ को कम करना है।

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जनजातीय विद्रोहों पर आधारित संग्रहालय को दिया जा रहा अंतिम स्वरूप....प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी राज्योत्सव के अवसर पर करेंगे उद्घाटन

रायपुर, 14 अक्टूबर 2025/ अंग्रेजी हुकूमत के काल में छत्तीसगढ़ के आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के शौर्य और बलिदान की स्मृति में नवा रायपुर, अटल नगर में निर्मित किए जा रहे भव्य संग्रहालय-सह-स्मारक को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी राज्योत्सव के अवसर पर इस संग्रहालय का उद्घाटन करेंगे। मुख्य सचिव श्री विकास शील ने आज निर्माण स्थल पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर बनाया जा रहा यह संग्रहालय देश का पहला पूर्णतः डिजिटल संग्रहालय होगा। इसमें स्वतंत्रता आंदोलन के समय छत्तीसगढ़ में हुए 14 प्रमुख आदिवासी विद्रोहों के साथ-साथ जंगल सत्याग्रह और झंडा सत्याग्रह पर अलग-अलग गैलरियाँ बनाई जा रही हैं। संग्रहालय में आगंतुकों को इन जनजातीय आंदोलनों की जीवंत झलकें देखने और सुनने को मिलेंगी।

निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव श्री शील ने कहा कि संग्रहालय में प्रदर्शित की जाने वाली सभी वस्तुओं और सामग्री को उनके मूल स्वरूप में ही प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि ओरिएंटेशन रूम में प्रदर्शित की जाने वाली डाक्यूड्रामा हल्बी-गोंडी या अन्य जनजातीय बोलियों में तैयार की जाए, ताकि यह स्थानीय संस्कृति से जुड़ाव का सशक्त माध्यम बन सके। उन्होंने प्रधानमंत्री जी के कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए सभी गैलरियों का भ्रमण किया और आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने संग्रहालय में प्रदर्शित किए जाने वाले आदिवासी विद्रोहों का संक्षिप्त परिचय देते हुए पूरे रूट चार्ट के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने आज ही संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर लोकार्पण की तैयारियों की समीक्षा की। श्री बोरा ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण अवसर है कि देश का पहला पूर्णतः डिजिटल आदिवासी संग्रहालय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कर-कमलों से लोकार्पित होने जा रहा है। उन्होंने सभी विभागों से आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का आग्रह किया।

प्रमुख सचिव श्री बोरा ने प्रधानमंत्री जी के लोकार्पण रूट-प्लान के अनुसार अनिवार्य सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने, संग्रहालय तक आने वाले पूरे मार्ग पर स्ट्रीट लाइट, रंग-रोगन एवं सौंदर्यीकरण के कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संग्रहालय क्षेत्र में चौबीसों घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए तथा गार्डनिंग और वृक्षारोपण की आवश्यक तैयारियाँ भी समय पर पूरी हों।

उल्लेखनीय है कि शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय देश का पहला पूर्णतः डिजिटल संग्रहालय होगा। इसमें स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान छत्तीसगढ़ में हुए प्रमुख आदिवासी विद्रोहों—हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम विद्रोह, परलकोट विद्रोह, तारापुर विद्रोह, लिंगागिरी विद्रोह, कोई विद्रोह, मेरिया विद्रोह, मुरिया विद्रोह, रानी चौरिस विद्रोह, भूमकाल विद्रोह, सोनाखान विद्रोह, तथा झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह—के वीर नायकों के संघर्ष और शौर्य को 14 गैलरियों में जीवंत रूप से प्रदर्शित किया जा रहा है।

बैठक में संभागायुक्त श्री महादेव कावरे, आयुक्त आदिम जाति विकास विभाग डॉ. सारांश मित्तर, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के आयुक्त श्री अवनीश शरण, कलेक्टर श्री गौरव सिंह, नगर निगम रायपुर के आयुक्त श्री विश्वजीत, संचालक टीआरटीआई श्रीमती हिना अनिमेष नेताम, संचालक अंत्यावसायी विकास निगम डॉ. जगदीश कुमार सोनकर, अतिरिक्त कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेंद सिंह, डीआईजी छत्तीसगढ़ अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं श्री सुरेश ठाकुर, एनआरडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल के मुख्य अभियंता, तथा लोक निर्माण विभाग रायपुर के मुख्य और कार्यपालन अभियंता सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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एकता परेड-2025 में छत्तीसगढ़ की झांकी का हुआ चयन .....एकता, विकास और सांस्कृतिक गौरव का संदेश देगा छत्तीसगढ़ की झांकी : मुख्यमंत्री

रायपुर 14 अक्टूबर 2025/ राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर) के अवसर पर गुजरात के एकता नगर (स्टैच्यू ऑफ यूनिटी) में आयोजित होने वाली एकता परेड-2025 में छत्तीसगढ़ राज्य की झांकी का चयन किया गया है। यह जानकारी भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची में दी गई है, जिसमें छत्तीसगढ़ के साथ जम्मू-कश्मीर, गुजरात, महाराष्ट्र, मणिपुर, उत्तराखंड, पुडुचेरी, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, एनडीआरएफ और एनएसजी की झांकियाँ भी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए छत्तीसगढ़ राज्य के जनसम्पर्क विभाग की पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह चयन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता, लोक परंपरा और एकता के भाव की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है। एकता परेड में प्रस्तुत होने वाली यह झांकी हमारे राज्य की ‘एकता में विविधता’ की अद्भुत परंपरा को सजीव रूप में प्रदर्शित करेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की झांकी इस वर्ष बस्तर की बदलती पहचान और विकास यात्रा पर केंद्रित होगी। राज्य शासन के जनसम्पर्क विभाग द्वारा तैयार की जा रही यह झांकी बस्तर की जनजातीय अस्मिता, पारंपरिक लोकनृत्य, वेशभूषा, ढोकरा धातु कला, आदिवासी चित्रकला और आधुनिक विकास के समन्वय को प्रदर्शित करेगी। झांकी का मुख्य संदेश होगा कि बस्तर अब बदलाव की राह पर है — संघर्ष से विकास की ओर, भय से विश्वास की ओर। इसमें दर्शाया जाएगा कि जिस भूमि ने कभी संघर्ष और असमानता के दौर देखे, आज वही क्षेत्र शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और बुनियादी ढांचे के माध्यम से शांति और समृद्धि की नई पहचान गढ़ रहा है।

राज्य सरकार की पुनर्वास एवं विकासोन्मुख नीतियों ने नक्सल प्रभावित इलाकों में स्थायी परिवर्तन की दिशा में नई ऊर्जा का संचार किया है। यह झांकी न केवल बस्तर की सांस्कृतिक आत्मा को प्रदर्शित करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, एकता और लोकगौरव की झलक भी पेश करेगी।

राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आयोजित इस भव्य परेड में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह स्वयं उपस्थित रहेंगे और  चयनित राज्यों की झांकियों का अवलोकन करेंगे। इस आयोजन का उद्देश्य भारत की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर लाना है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की झांकी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के संकल्प को सशक्त करेगी और देश के सामने राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, विकास यात्रा और सामाजिक एकता का उज्ज्वल उदाहरण प्रस्तुत करेगी।

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कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों पर त्वरित और प्रभावी अमल सुनिश्चित करें : मुख्य सचिव श्री विकास शील

रायपुर 14 अक्टूबर 2025/ मुख्य सचिव श्री विकास शील ने कहा कि कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा दिए गए निर्देशों पर त्वरित और प्रभावी अमल सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सभी विभागीय सचिवों को सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य सहित अन्य प्राथमिक क्षेत्रों के लिए ठोस एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव आज मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में विभिन्न विभागों के भारसाधक सचिवों के साथ योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना में शामिल विभागों के एक्शन प्लान्स की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन कार्यों का शिलान्यास किया जा चुका है, उन्हें निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण कर लोकार्पण सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार ने प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना तथा जेम पोर्टल के माध्यम से शासकीय विभागों में की जा रही खरीदी की प्रक्रिया पर प्रस्तुतीकरण दिया। इसी प्रकार, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. रवि मित्तल ने जनसम्पर्क विभाग द्वारा शासन की योजनाओं के प्रचार-प्रसार से संबंधित गतिविधियों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह एवं जेल श्री मनोज कुमार पिंगुआ, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, आदिम जाति तथा अनुसूचित जनजाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सहित सभी विभागों के सचिव उपस्थित थे।

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विश्व मानक दिवस के अवसर पर आयोजित मानक महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री,दिलाई गुणवक्ता की शपथ

रायपुर, 14 अक्टूबर 2025/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि जीवन के हर क्षेत्र में मानकों का पालन पारदर्शिता, गुणवत्ता और उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा वस्तुओं को मानक चिन्ह प्रदान कर उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जा रही है और इसके माध्यम से मिलावट व नकली वस्तुओं के कारोबार पर प्रभावी रोक लगी है।

मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में विश्व मानक दिवस के अवसर पर आयोजित मानक महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने उपस्थित जनों को गुणवत्ता शपथ दिलाते हुए मानकीकृत उत्पादों को बढ़ावा देने और बीआईएस के प्रयासों में भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मानकों की स्थापना में विशेष योगदान देने वाले मानक क्लबों, संस्थाओं और मेंटर्स का सम्मान किया। उन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था देशभर में गुणवत्ता की संस्कृति विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि एक समय था जब सोने जैसी धातुओं की शुद्धता का पता लगाना कठिन था, लेकिन आज हर उपभोक्ता बीआईएस हॉलमार्क देखकर ही आभूषण खरीदता है। बीआईएस का हॉलमार्क अब उपभोक्ता भरोसे का प्रतीक बन चुका है।

उन्होंने बताया कि बीआईएस द्वारा बोतलबंद पानी, हेलमेट, खिलौने, गहनों से लेकर करीब 22 हजार वस्तुओं को मानक चिन्ह प्रदान किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उपभोक्ताओं के बीच मानक चिन्हों के प्रति जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को बढ़ावा मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मानकों की अहम भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि स्वदेशी उत्पादों की गुणवत्ता और मानकीकरण के कारण आज देश के गांव और कस्बों में बने उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बना रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने उपस्थित जनों से मानक चिन्हों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि “विकसित भारत का संकल्प उपभोक्ता अधिकारों की मजबूती से ही पूरा होगा।” उन्होंने कहा कि गुणवत्ता ही आत्मनिर्भर भारत की वास्तविक पहचान है।

कार्यक्रम में खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल ने कहा कि विश्व मानक दिवस का उद्देश्य उपभोक्ताओं और समाज में मानकीकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह हमारे वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के प्रयासों को सराहने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि देश तेजी से विकास कर रहा है और गुणवत्ता सुधार अब केवल नीति नहीं, बल्कि एक संकल्प बन चुका है।

श्री बघेल ने कहा कि “जागो ग्राहक जागो” का संदेश उपभोक्ताओं को सजग और जागरूक रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे इस कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान को समाज में आगे बढ़ाएं, ताकि उपभोक्ता संरक्षण और अधिक सशक्त हो सके।

भारतीय मानक ब्यूरो रायपुर शाखा कार्यालय के निदेशक श्री एस. के. गुप्ता ने कहा कि बीआईएस का प्रत्येक मानक उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा को समर्पित है। उन्होंने बताया कि उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और ब्यूरो इस दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

श्री गुप्ता ने ब्यूरो द्वारा संचालित गतिविधियों और विभिन्न उत्पादों के मानकीकरण की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बीआईएस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में निर्मित हर उत्पाद वैश्विक गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरे।

*मुख्यमंत्री ने मानक महोत्सव में विभिन्न स्टालों का किया अवलोकन*

विश्व मानक दिवस के अवसर पर आयोजित मानक महोत्सव में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) तथा अन्य संस्थानों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने मानक स्थापना से जुड़ी गतिविधियों और संस्थाओं की कार्यप्रणाली की जानकारी ली और उनके प्रयासों की सराहना की।

सिपेट रायपुर के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि संस्था प्रदेश के युवाओं को लघु एवं दीर्घकालीन कौशल प्रशिक्षण प्रदान करती है, साथ ही उद्योगों को गुणवत्ता परामर्श और तकनीकी सलाह भी उपलब्ध कराती है। मुख्यमंत्री ने सिपेट की पहल की सराहना की और इसे उद्योग-शिक्षा समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

बीआईएस की रायपुर शाखा द्वारा लगाए गए स्टॉल में उपभोक्ता जागरूकता संबंधी गतिविधियों की जानकारी दी गई। प्रतिनिधियों ने बताया कि बीआईएस केयर ऐप के माध्यम से उपभोक्ता स्वयं आईएसआई, एचयूआईडी और हॉलमार्क युक्त आभूषणों की प्रमाणिकता जांच सकते हैं।

ऐप के जरिए उत्पाद की गुणवत्ता से संबंधित शिकायतें दर्ज करने और आईएसआई मुहर के दुरुपयोग की सूचना देने की सुविधा भी उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने इस पहल को उपभोक्ता सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया।

*शैक्षणिक संस्थानों के नवाचारी स्टॉल बने आकर्षण का केंद्र*

मानक महोत्सव में स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा लगाए गए नवाचार आधारित स्टॉल सभी के आकर्षण का केंद्र बने। मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों द्वारा प्रदर्शित नवाचारों का अवलोकन किया और उनके रचनात्मक प्रयासों की सराहना की।

गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल बिरकोनी के विद्यार्थियों ने रक्तचाप जांचने की मशीन और मिट्टी की नमी मापने की मशीन तैयार की। पंडित आर. डी. तिवारी गवर्नमेंट इंग्लिश मीडियम स्कूल के छात्रों ने “एक्सप्लोरर रोबोट” प्रस्तुत किया, जो अंधेरे और दुर्गम स्थानों में रास्ता खोजने में सक्षम है। यह रोबोट खदानों और औद्योगिक स्थलों पर उपयोगी सिद्ध हो सकता है।

वहीं गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल अंडा के विद्यार्थियों ने स्मार्ट ट्रेन का मॉडल तैयार किया, जो विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए उपयोगी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों से चर्चा की, उनके नवाचारी कार्यों की जानकारी ली और उनकी रचनात्मकता की सराहना करते हुए कहा —“युवाओं की सोच में जब गुणवत्ता और नवाचार जुड़ता है, तभी भारत विकसित राष्ट्र बनने की ओर तेजी से अग्रसर होता है।”

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गुणवत्ता सिर्फ उद्योग या उत्पादन तक सीमित नहीं, बल्कि यह जीवन के हर पहलू का संस्कार बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि “मानक केवल नियम नहीं, राष्ट्र निर्माण की रीढ़ हैं।” मुख्यमंत्री ने अधिकारियों, संस्थाओं और विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे “क्वालिटी को क्वांटिटी से पहले रखें” और छत्तीसगढ़ को मानकीकरण, नवाचार और पारदर्शिता में देश का अग्रणी राज्य बनाएं। उन्होंने कहा —“जब हर नागरिक गुणवत्ता को अपना धर्म समझेगा, तभी सच्चे अर्थों में विकसित भारत का स्वप्न साकार होगा।”

इस अवसर पर एनआईटी रायपुर के निदेशक श्री एन. व्ही. रमन्ना राव, चेम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष श्री सतीश थोरानी, इस्पात प्राधिकरण के कार्यकारी निदेशक श्री ए. के. चक्रवर्ती, कैट के अध्यक्ष श्री परमानंद जैन, छत्तीसगढ़ स्टील रिरोलर्स निर्माता संघ के अध्यक्ष श्री संजय त्रिपाठी और छत्तीसगढ़ ज्वेलर्स संघ के अध्यक्ष श्री कमल सोनी उपस्थित थे।ं

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जिला एवं तालुका स्तर के पैरालीगल वॉलिटियर की प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

जशपुरनगर 14 अक्टूबर 2025 /राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देशानुसार प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश व अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जशपुर के  श्री सत्येन्द्र कुमार साहू की अध्यक्षता में जिला एवं तालुका स्तर के अंतर्गत कार्यरत अधिकार मित्रों की विगत दिवस 13 अक्टूबर को जिला न्यायालय जशपुर के सभाकक्ष में प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
     विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत आमजनों एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के ध्येय वाक्य न्याय सबके लिए तथा नालसा द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत आम नागरिकों एवं जन समुदाय तक कानूनी सहायता व सलाह उपलब्ध कराये जाने तथा उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किये जाने के प्रयोजनार्थ प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित की गई।
        प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्री सत्येन्द्र कुमार साहू द्वारा मर्यादा एवं कानून के दायरे में रहकर आमजनों एवं जनसमुदाय के मध्य विधिक सलाह एवं सहायता प्रदान करने तथा उनके अधिकारों के हितों की रक्षा करने एवं अन्य कानूनी सेवाएं प्रदाय किये जाने के संबंध में अधिकार मित्रो (पैरालीगल वॉलिटियर्स) को सहभागिता से कार्य करते हुये जरूरतमंद व्यक्तियो को विधिक सहायता व सलाह हेतु सहभागिता से कार्य करते हुये अपनी उपलब्धिता सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया।
          जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) श्री जनार्दन खरे द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया कि पैरालीगल वॉलिण्टियर का अर्थ अर्द्ध न्यायी स्वयंसेवक है। समाज के कमजोर वर्गों एवं दूरस्थ अचलों तक न्याय की पहुंच को सुनिश्चित करने हेतु नालसा द्वारा कानूनी प्रचार-प्रसार हेतु स्वैच्छिक रूप से इच्छुक व्यक्तियों को पैरालीगल वॉलिण्टियर के रूप में कार्य करने हेतु प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। जिलों में नियुक्त पैरालीगल वॉलिण्टियर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है।
        न्यायिक मजिस्ट्रेट वरिष्ठ श्रेणी जशपुर श्री क्रांति कुमार सिंह द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया कि पैरालीगल वॉलिण्टियर को जमानत प्रकरणों, पीडित क्षतिपूर्ति प्रकरणों एवं अन्य प्रकरणों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस तामिली एवं आर्थिक प्रतिवेदन को प्राथमिकता से समय पर तामिल कर तामिली सूचना प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करना है। उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला तथा तालुका स्तर में कार्यरत 22 पैरालीगल वॉलिटियर्स उपस्थित रहे।

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जशपुर में तीन दिवसीय स्टेट लेवल ओपन चेस टूर्नामेंट के स्पर्श खंडेलवाल बने ओवरऑल चैंपियन....प्रतियोगिता में राज्य के 18 जिलों के कुल 204 खिलाडियों ने लिया भाग

जशपुरनगर, 14 अक्टूबर 2025/ छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव अंतर्गत कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में जशपुर में आयोजित तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ स्टेट लेवल ओपन चेस टूर्नामेंट का सोमवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस राज्य स्तरीय स्पर्धा में प्रदेश के 18 जिलों के कुल 204 खिलाड़ियों ने भाग लिया।
टूर्नामेंट में राजनांदगांव के स्पर्श खंडेलवाल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए ओवरऑल चैंपियन का खिताब जीता। उन्हें 31 हजार रुपये की पुरस्कार राशि और ट्रॉफी प्रदान की गई। वहीं दूसरे स्थान पर दुर्ग के 10 वर्षीय खिलाड़ी वी. विराट अय्यर रहे, जिन्हें 21 हजार रुपये और ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। तीसरा स्थान संकल्प कश्यप को प्राप्त हुआ, जिन्हें 11 हजार रुपये की राशि और ट्रॉफी प्रदान की गई। स्पर्धा में विभिन्न आयु वर्गों, महिला वर्ग एवं दिव्यांग श्रेणी में भी विजेताओं और उपविजेताओं को पुरस्कार राशि और ट्रॉफी प्रदान की गई।
     समापन समारोह के मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय ने सभी विजेता खिलाड़ियों को बधाई दी और आयोजनकर्ताओं को बेहतर आयोजन के लिए सराहना भी की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खूबसूरती के लिए मशहूर जशपुर खेल के क्षेत्र में भी आगे है। यहां से निकले खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय खेलों में भी अच्छा प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जशपुर में खेलों को आगे ले जाने विशेष रूप से प्रयासरत हैं। यहां पर खेल के लिए अधोसरंचना विकास के साथ विभिन्न खेलों का आयोजन किया जा रहा है ताकि खिलाड़ी उभर का सामने आए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय महामंत्री श्री योगेश बापट ने सभी खिलाड़ियों उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि शतरंज खेल हमारे सोचने और समझने की क्षमता का विकास करता है। हम इससे सटीकता, रणनीति निर्माण की कला सीख सकते हैं। हम जितना ज्यादा प्रैक्टिस करते हैं उतना की निखरते जाते हैं। नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत ने अपने संबोधन में सभी विजेता खिलाड़ियों को बधाई दी और कहा कि इस तरह के आयोजन से उभरते खिलाड़ी प्रेरित होंगे और आगे की स्पर्धाओं में निखर का सामने आएंगे। 

204 खिलाडियों ने लिया भाग, जशपुर के लगभग 137 खिलाड़ियों ने भी लिया हिस्सा

इस प्रतियोगिता में राज्य के 18 जिलों के कुल 204 खिलाडियों ने भाग लिया। सबसे ज्यादा भागीदारी जशपुर जिले की रही, यहां से लगभग 137 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। स्पर्धा के  तीसरे और अंतिम दिन पूरे आठ राउंड के खेल के बाद विजेताओं का चयन किया गया। जिसमें 09 आयुवर्ग में वेदांश यादव विजेता रहे। इसी तरह 11 आयुवर्ग में प्रांजल सिंह, 13 आयुवर्ग में देवांश जैन, 15 आयुवर्ग में सानिध्य गुप्ता, महिला 09 आयुवर्ग में अनिरुद्धि अनंत, महिला 11 आयुवर्ग में सावी गौरी, महिला  13 आयुवर्ग में श्रेया शिल्पी, महिला 15 आयुवर्ग में अंशिका मिंज विजेता रही। इसी प्रकार से दिव्यांग श्रेणी में रूपेश कुमार मिश्रा विजेता रहे। बेस्ट जशपुर वर्ग के विजेता अमन कुमार रवानी, सरगुजा डिविजन वर्ग के विजेता मुहम्मद हसनैन अली, वेटरन श्रेणी में विजेता सेनगुप्ता दीपांकर और बेस्ट महिला श्रेणी वर्ग का खिताब मादके इशिका ने जीता। सभी को चार-चार हजार रुपए की पुरस्कार राशि और ट्रॉफी प्रदान की गई। सभी खिलाड़ियों ने बेहतर आयोजन और  सुविधा प्रदान किए जाने के लिए जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया।

सफल बनाने में आयोजनकर्ताओं की रही प्रमुख भूमिका
  
टूर्नामेंट का आयोजन छत्तीसगढ़ स्टेट चेस एसोसिएशन के सहयोग से कराया जा रहा है। आयोजन समिति के अध्यक्ष एसडीएम श्री विश्वास राव मस्के और सचिव जिला खेल अधिकारी श्री समीर बड़ा थे। चेस एसोसिएशन की ओर से आर्बिटर अनीश अंसारी, रॉकी देवांगन, हर्ष शर्मा, शुभम बसोने, शेष रतन जायसवाल, प्रदीप कुमार मंडल और अनिल शर्मा ने खिलाड़ियों को गाइड करने के साथ ही निर्णायक की भी भूमिका निभाई। समापन समारोह में छत्तीसगढ़ शतरंज संघ के सचिव श्री हेमंत खूंटे, बाल कल्याण समिति जशपुर के अध्यक्ष  श्री नितिन राय, डिप्टी कलेक्टर श्री हरिओम द्विवेदी, आयोजन समिति के जॉइंट सेक्रेटरी विनोद गुप्ता की भी मौजूदगी रही।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में ‘सुशासन संवाद’ कार्यक्रम सम्पन्न — जिलों के नवाचारों पर हुई विस्तृत चर्चा

रायपुर, 13 अक्टूबर 2025/ मंत्रालय महानदी भवन के पंचम तल स्थित ऑडिटोरियम में आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में ‘सुशासन संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, विभागीय सचिव, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, डीएफओ सहित राज्य के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

नवाचार जनसेवा के केंद्र में हो - मुख्यमत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नवाचार ऐसे हों जो दीर्घकालिक रूप से व्यवहारिक हों, नागरिकों की सुविधा बढ़ाएं, और शासन की फ्लैगशिप योजनाओं को सहयोग दें। राज्य सरकार नवाचारों का स्वागत करती है, परंतु यह ध्यान रखना आवश्यक है कि बुनियादी प्रशासनिक कार्य इससे प्रभावित न हों।  उन्होंने कहा कि नवाचार तुगलकी प्रयोग न बनें, बल्कि नागरिक जीवन को सरल बनाने का माध्यम बनें।

स्थायी और व्यावहारिक नवाचारों पर जोर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि जो भी नवाचार हों, उनमें लोगों की राय अवश्य शामिल की जाए और उनके प्रभाव का फीडबैक लिया जाए। उन्होंने कहा कि कई बार जिले में किए गए नवाचार आने वाले अधिकारियों की प्राथमिकता में नहीं रहते, इसलिए इनकी स्थायित्व और उपयोगिता पर विशेष ध्यान दिया जाए। नवाचार का उद्देश्य जनता की सेवा और पारदर्शिता में वृद्धि होना चाहिए।

लोक सेवा गारंटी अधिनियम पर सख्त रुख

मुख्यमंत्री श्री साय ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम को सरकार की सबसे महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी सेवाएं निर्धारित समय में गुणवत्तापूर्ण ढंग से दी जाएं और यदि देरी होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि अगली समीक्षा में यह देखा जाएगा कि कितने मामलों का समय पर निराकरण हुआ और कितने अधिकारियों पर कार्रवाई की गई।

कार्यालयीन अनुशासन और स्वच्छता पर विशेष बल

सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आरंभ किए गए ‘पुराने दस्तावेज हटाओ’ अभियान की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यालयों में वर्षों पुराने अनुपयोगी फाइलें न केवल जगह घेरती हैं, बल्कि नागरिकों में गलत छवि भी बनाती हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी कलेक्टर अपने कार्यालयों को व्यवस्थित करें ताकि पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ सके।

ई-ऑफिस प्रणाली का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करें

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम ई-ऑफिस प्रणाली है। उन्होंने सभी विभागों को निर्धारित समय सीमा में इसे पूरी तरह लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मैनुअल प्रक्रिया पर निर्भरता घटाना आवश्यक है और सभी लंबित फाइलों को डिजिटल माध्यम में लाना होगा ताकि पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित हो सके।

ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज डिजिटल गवर्नेंस का युग है। सभी कलेक्टर सुनिश्चित करें कि ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर अधिकाधिक सेवाएं उपलब्ध हों और जनता ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठा सके। उन्होंने निर्देश दिया कि नागरिकों में डिजिटल सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक सेवा को डिजिटल करना ही पारदर्शी शासन की दिशा में सबसे बड़ा कदम है।

शिकायतों के समाधान में पारदर्शी व्यवस्था

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनता की शिकायतों का त्वरित और पारदर्शी निराकरण प्रशासन की जिम्मेदारी है। सभी कलेक्टर शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर सूचीबद्ध करें और डिजिटल माध्यम में उनके समाधान की स्थिति उपलब्ध कराएं। इससे नागरिकों का भरोसा बढ़ेगा और भ्रष्टाचार की संभावनाएं समाप्त होंगी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों में मैनुअल गवर्नेंस से भ्रष्टाचार बढ़ा, जबकि डिजिटल प्रणाली जवाबदेही सुनिश्चित करती है।

फील्ड विजिट और निरीक्षण की स्थायी प्रणाली बने

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केवल आकस्मिक निरीक्षण से प्रशासन नहीं सुधरता। फील्ड विजिट को स्थायी प्रक्रिया के रूप में अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि जैसे पानी की गहराई का अंदाजा पानी में उतरे बिना नहीं होता, वैसे ही योजनाओं की सच्चाई फील्ड में जाकर ही पता चलती है। नियमित निरीक्षण से न केवल सुधार होता है बल्कि आंकड़ों की बाजीगरी पर भी नियंत्रण रहता है।

मुख्य सचिव श्री विकास शील ने कहा कि ब्यूरोक्रेसी को ट्रांसफॉर्म करने का समय आ गया है। नई कार्य संस्कृति और तकनीक को अपनाए बिना सुशासन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि जनता में विश्वास बढ़ाना है, तो उच्चाधिकारियों को खुद उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। उन्होंने कहा कि जब हम स्वयं समय पर दफ्तर पहुंचेंगे, तभी नीचे तक अनुशासन की संस्कृति बनेगी।

जिलों के नवाचारों की प्रस्तुति और कॉफी टेबल बुक का विमोचन

कार्यक्रम में रायपुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, जशपुर और उदंती वन अभयारण्य के नवाचारों की विस्तृत प्रस्तुति दी गई। मुख्यमंत्री ने जिलों में हो रहे नवाचारों पर आधारित ‘कॉफी टेबल बुक’ का विमोचन किया और अधिकारियों को सराहा जिन्होंने जमीनी स्तर पर योजनाओं को परिणाममुखी बनाया।

कार्यक्रम के दौरान ‘जशप्योर’ ब्रांड के स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों की सफलता का उल्लेख किया गया। महुआ को सुपरफूड के रूप में स्थापित करने वाला भारत का पहला ‘महुआ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ जशपुर में संचालित है। जशप्योर उत्पाद अब पाँच राज्यों में बिक रहे हैं और विक्रय में 300 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। नारायणपुर जिले के 'डेटा प्लेटफॉर्म’ द्वारा नक्सल गतिविधियों की ट्रैकिंग और दंतेवाड़ा में ब्लॉकचेन तकनीक से 7 लाख भूमि अभिलेखों के डिजिटाइजेशन को मुख्यमंत्री ने अत्यंत सराहनीय बताया। उन्होंने अबूझमाड़ और दंतेवाड़ा में प्रशासन के हाई-टेक सिस्टम की प्रशंसा करते हुए कहा कि यही आधुनिक छत्तीसगढ़ की दिशा है।

सुशासन संवाद में रायपुर जिले में जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त पहल ‘टीम प्रहरी’ के कार्यों पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। इस पहल के तहत अवैध अतिक्रमणों को हटाने, यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और नागरिकों की शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। नारायणपुर जिले में ‘इंटिफाई’ डेटा मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुतिकरण दिया गया, जिसके माध्यम से नक्सल गतिविधियों की प्रभावी ट्रैकिंग की जा रही है तथा शासकीय योजनाओं से संबंधित सभी आंकड़ों को एक ही प्लेटफॉर्म पर एकत्रित किया गया है। वहीं दंतेवाड़ा जिले में ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करते हुए 7 लाख भूमि अभिलेखों का डिजिटाइजेशन किया गया है, जिससे भूमि संबंधी मामलों में पारदर्शिता और त्वरित समाधान सुनिश्चित हुआ है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुशासन कोई एक दिन का लक्ष्य नहीं, बल्कि निरंतर सुधार की प्रक्रिया है। इसके लिए हर अधिकारी को अपने भीतर से बदलाव लाना होगा। उन्होंने कहा कि “हमारे छोटे-छोटे प्रयास ही विकसित छत्तीसगढ़ की बड़ी तस्वीर बनाएंगे।” मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों से अपेक्षा की कि वे जनता के बीच जाकर योजनाओं का वास्तविक प्रभाव देखें, तकनीक और अनुशासन को प्रशासन की संस्कृति बनाएं और राज्य को वर्ष 2047 तक विकसित भारत की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करें।

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लघु वनोपजों से आत्मनिर्भरता की राह — मुख्यमंत्री श्री साय ने तय किया हरित विकास का रोडमैप

रायपुर, 13 अक्टूबर 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित कलेक्टर–डीएफओ संयुक्त कॉन्फ्रेंस में प्रदेश के वन प्रबंधन, तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित, लघु वनोपजों के मूल्य संवर्द्धन (वैल्यू एडिशन), ईको-टूरिज्म, औषधीय पौधों की खेती और वनों से जुड़ी आजीविका के विविध आयामों पर विस्तृत चर्चा हुई। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहक हितग्राहियों की संख्या आज 12 लाख से अधिक हो चुकी है, जो हमारे सामूहिक प्रयासों की सफलता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के लिए आप सभी बधाई के पात्र हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब आवश्यकता इस बात की है कि हम वन उपज का अधिकतम वैल्यू एडिशन करें। उन्होंने कहा कि राज्य में वन धन केंद्रों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है, ताकि ग्रामीणों को अधिक आय के साधन मिल सकें और वे आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि प्रदेश में अब 46 प्रतिशत वन आवरण हो चुका है, जो लगभग दो प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि में कैम्पा योजना और “एक पेड़ मां के नाम” जैसी अभिनव पहल का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कॉन्फ्रेंस में जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि तेंदूपत्ता संग्राहकों को भुगतान सात से पंद्रह दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए। साथ ही भुगतान की जानकारी एसएमएस के माध्यम से सीधे संग्राहकों के मोबाइल पर भेजी जाए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। बैठक में बताया गया कि लगभग 15 लाख 60 हजार संग्राहकों की जानकारी ऑनलाइन दर्ज हो चुकी है और सभी भुगतान बैंक खातों के माध्यम से किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने तेंदूपत्ता संग्रहण प्रक्रिया के पूर्ण कंप्यूटरीकरण की पहल को और तेज करने के निर्देश दिए।

कॉन्फ्रेंस में औषधीय पौधों की खेती के विस्तार हेतु प्रचार-प्रसार गतिविधियों को बढ़ाने और इसके लिए कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के मैदानी अमले की सहायता लेने पर भी चर्चा की गई।

बैठक में बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर जिलों में पिछले सीजन में हुए तेंदूपत्ता संग्रहण की समीक्षा की गई। साथ ही आगामी सीजन के लिए पूर्व-कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए, ताकि संग्राहकों को समय पर लाभ मिल सके और किसी प्रकार की देरी न हो।

लघु वनोपज आधारित स्टार्टअप और वन धन केंद्रों को मिलेगा प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लघु वनोपजों को वनांचल क्षेत्रों में आजीविका के प्रमुख साधन के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। बैठक में लघु वनोपज आधारित स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने और वन धन केंद्रों को सुदृढ़ करने पर सार्थक चर्चा हुई, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सके।

छत्तीसगढ़ हर्बल और संजीवनी ब्रांड के उत्पादों के प्रचार-प्रसार पर विशेष बल दिया गया। बैठक में निर्देश दिए गए कि इन उत्पादों की बिक्री ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में बढ़ाई जाए, ताकि स्थानीय उत्पादों के लिए एक मजबूत मार्केट नेटवर्क विकसित हो सके। साथ ही, उत्पादों के जैविक प्रमाणीकरण (Organic Certification) की प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करने पर बल दिया गया।

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि पहली बार वन अधिकारियों की बैठक आयोजित कराने के लिए वे मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सभी कलेक्टर और वन अधिकारी समन्वय स्थापित कर संयुक्त रूप से कार्य करें, तो इसके अत्यंत अच्छे परिणाम सामने आएंगे।

वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि बस्तर और सरगुजा संभागों में विशेष रूप से ईको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसे आजीविका से जोड़ने के लिए ठोस रणनीति बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अब 75 प्रकार की लघु वनोपजों की खरीदी करने जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि लाख उत्पादन में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर है, और यदि ठोस कार्ययोजना बनाकर लक्षित रूप से कार्य किया जाए तो प्रदेश देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर सकता है।

औषधीय पौधों की खेती के विस्तार की नई पहल

बैठक में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। धमतरी, मुंगेली और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिलों में औषधीय पौधों की खेती से संबंधित विषयों पर उपस्थित डीएफओ को विस्तृत जानकारी दी गई।

बैठक में बताया गया कि औषधीय पौधों की खेती न केवल लोगों की आजीविका बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि पारंपरिक उपचार पद्धतियों के ज्ञान को भी आगे बढ़ाएगी। औषधीय पादप बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने इस क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं और लोगों की आय में वृद्धि के अवसरों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

इस अवसर पर सभी संभागायुक्त, जिला कलेक्टर  एवं वन मंडलाधिकारी उपस्थित थे।

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अपर कलेक्टर ने जनदर्शन में सुनी आम जनता की समस्याएं....समयबद्ध निराकरण को दिए निर्देश

जशपुरनगर, 13 अक्टूबर 2025/ अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू ने सोमवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित जनदर्शन में आम नागरिकों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने प्राप्त सभी आवेदनों का गंभीरता से अवलोकन किया और संबंधित विभागों के अधिकारियों को इनका समयबद्ध एवं पारदर्शी निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
    अपर कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक आवेदक को उनके आवेदन पर की गई कार्यवाही की जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए। जनदर्शन के दौरान आज लगभग 32 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें मुख्य रूप से राजस्व प्रकरण, साफ-सफाई, अधोसंरचना निर्माण, आजीविका संबंधी और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने संबंधित आवेदन शामिल थे।

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कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस — अपराधियों में हो कानून का भय और जनता में हो सुरक्षा का अहसास — मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर, 13 अक्टूबर 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि पुलिस की छवि ऐसी होनी चाहिए, जिससे अपराधियों में कानून का भय और आम नागरिकों में सुरक्षा का अहसास उत्पन्न हो। मुख्यमंत्री श्री साय आज मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।

कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस में प्रदेश की कानून-व्यवस्था की समग्र स्थिति, मादक पदार्थ नियंत्रण, सड़क सुरक्षा, साइबर अपराधों की रोकथाम और प्रशासनिक समन्वय को सुदृढ़ करने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस अवसर पर गृह मंत्री श्री विजय शर्मा, मुख्य सचिव श्री विकास शील, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री मनोज पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है। जिन जिलों में दोनों के बीच समन्वय मजबूत है, वहां बेहतर परिणाम प्राप्त हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि कानून-व्यवस्था के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई को प्रशासनिक उदासीनता माना जाएगा और ऐसे मामलों में कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सड़कों पर अव्यवस्था फैलाने, चाकूबाजी और हत्या जैसे जघन्य अपराधों पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाए। गौ-तस्करी और धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मामलों पर सघन निगरानी रखी जाए और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जिन जिलों ने अपराध नियंत्रण में उल्लेखनीय सुधार किया है, उनके अनुभवों को अन्य जिलों में मॉडल के रूप में लागू किया जाए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने नशाखोरी और मादक पदार्थों की अवैध तस्करी पर सख्त रुख अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशा अपराधों की जड़ है, और इसे समाप्त करना ही कानून-व्यवस्था सुधार की पहली शर्त है। मुख्यमंत्री श्री साय ने एनकॉर्ड (NCORD) के तहत राज्यव्यापी अभियान चलाने, सीमावर्ती जिलों में तस्करी पर रोक लगाने और एनडीपीएस एक्ट के तहत समय-सीमा में कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में घुसपैठियों की पहचान और नियंत्रण के लिए विशेष टास्क फोर्स (STF) गठित की गई है। उन्होंने निर्देश दिए कि सीमावर्ती जिलों में सघन जांच की जाए और संदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो। उन्होंने यह भी कहा कि अपराधों की अनदेखी अक्सर गंभीर अपराधों को जन्म देती है, इसलिए प्रत्येक मामले में समयबद्ध कार्रवाई आवश्यक है।

बैठक में आत्मसमर्पित माओवादियों के पुनर्वास और आजीविका सशक्तिकरण पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति में माओवादियों का विश्वास बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। आत्मसमर्पित माओवादियों को कौशल विकास प्रशिक्षण देकर स्थानीय रोजगार या स्वरोजगार से जोड़ा जाए, ताकि वे मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकें।

कलेक्टर एसपी कॉन्फ्रेंस में सड़क सुरक्षा को लेकर भी गहन मंथन हुआ। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और यातायात व्यवस्था सुधार हेतु कठोर कदम उठाने पर जोर दिया गया। हेलमेट, सीट बेल्ट और यातायात नियमों का पालन न करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। साथ ही, ब्लैक स्पॉट की पहचान कर सुधारात्मक कार्य किए जाने, रात 10 बजे के बाद डीजे या लाउडस्पीकर के उपयोग पर रोक लगाने और नशे में वाहन चलाने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। सड़क पर आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भी प्रभावी कदम उठाने को कहा गया।

कॉन्फ्रेंस में साइबर अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया कि साइबर अपराध आधुनिक युग का सबसे जटिल खतरा बन चुका है। इसे रोकने के लिए पुलिस बल को निरंतर तकनीकी प्रशिक्षण दिए जाने पर बल दिया गया। साथ ही  साइबर हेल्पलाइन नंबर का प्रचार-प्रसार जनसंपर्क विभाग के सहयोग से व्यापक स्तर पर किए जाने के निर्देश दिए गए। बैठक में निर्देश दिए गए कि साइबर अपराधों के नए-नए तरीकों को देखते हुए प्रत्येक जिले में जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि आम नागरिक ठगी, फिशिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे अपराधों से सुरक्षित रह सकें।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन, टीम भावना और साझा उत्तरदायित्व ही विकसित छत्तीसगढ़ की वास्तविक नींव है। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन तभी सशक्त बन सकते हैं, जब प्रत्येक अधिकारी अपने दायित्व को ईमानदारी से निभाए और टीम के रूप में मिलकर परिणाम दे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि योजनाओं की सफलता केवल नीतियों पर नहीं, बल्कि उन्हें लागू करने वाली टीम की पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही पर निर्भर करती है। यही भावनात्मक और प्रशासनिक समन्वय “विकसित छत्तीसगढ़” को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।

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रजत जयंती विशेष सप्ताह में आयुष विभाग द्वारा  सामूहिक योगाभ्यास,औषधीय पौधों की जानकारी और निःशुल्क जिला स्तरीय स्वास्थ्य शिविर लगाकर मरीजों को किया गया उपचार

जशपुरनगर 13 अक्टूबर 2025/ छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वां वर्ष पूर्ण होने पर रजत जयंती के अवसर पर कलेक्टर श्री रोहित व्यास निर्देशन एवं जिला आयुष अधिकारी जशपुर के मार्गदर्शन में रजत जयंती विशेष सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। 
         इसी कड़ी में आयुष विभाग के द्वारा विगत् दिवस 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शासकीय आयुर्वेद औषधालय जशपुर में सामूहिक योगाभ्यास किया गया एवं 11 अक्टूबर को स्कूली छात्र छात्राओं द्वारा जिले के समस्त आयुष संस्थाओं में हर्बल गार्डन भ्रमण किया गया एवं औषधीय पौधों शतवारी, सहिजन, एलोवेरा, अपराजिता, एरण्ड, अमलतास, नीम, तुलसी इत्यादि के बारे में जानकारी दी गयी।
         रजत जंयती विशेष सप्ताह के जिला नोडल एवं आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिकृष्ण श्रीवास और आयुष विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा  
रजत जयंती विशेष सप्ताह के रविवार को जशपुर के बाजारडांड में निःशुल्क जिला स्तरीय स्वास्थ्य शिविर एवं औषधीय पौधों के प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। शिविर में कुल 446 रोगियों का उपचार किया गया। इनमें आयुर्वेद पद्धति से 248 एवं होम्योपैथी पद्धति से 198 रोगियों का तथा रक्त परीक्षण से 56 रोगीयों को लाभान्वित किया गया। 
         आयुष स्वास्थ्य शिविर का शुभारंभ नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत  के द्वारा किया गया। नगर पालिका अध्यक्ष ने कहा कि आयुर्वेद एक प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति है, जिसका प्रयोग जीर्ण रोगों में अत्यंत कारगर है। जशपुर जिला वनौषधियों का भण्डार है। औषधियों की पहचान एवं उपयोग की आवश्यकता है। आयुर्वेद की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि औषधियों की पहचान एवं उनकी रोगों में उपयोग की जानकारी जनता तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण पहल आयुष विभाग द्वारा किया जा रहा है। जो अत्यंत सराहनीय है।
        शिविर प्रभारी आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. एल.आर. भगत द्वारा आयुष विभाग की विभिन्न गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गयी। शिविर में आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिकृष्ण श्रीवास, डॉ. कपिल श्रीवास्तव आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी, डॉ. अम्बिका नायक होम्योपैथी चिकित्सा अधिकारी, डॉ. योग्या यादव आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी, डॉ. निकिता मिंज आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी, डॉ. पूजा भगत आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी, शरद साहू आयुर्वेद फार्मासिस्ट, कृष्ण कुमार दिनकर पंचकर्म सहायक इत्यादि ने शिविर को सफल बनाने में सहयोग प्रदान किया।

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