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प्रधानमंत्री आवास योजना से बदल रही है ग्रामीण क्षेत्रों के  परिवारों की ज़िंदगी.....जिले में 74 हजार से अधिक आवास बन कर तैयार

 जशपुर 17 जुलाई 25/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शासन की योजनाओं का लाभ अब समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना से दूरस्थ अंचलों के लोगों को लाभान्वित किया जा रहा है और हितग्राही अपने खुद के मकान में सुकुन से जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
जिला पंचायत विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जशपुर जिले में 74 हजार 346 मकान पूर्ण हो चुके हैं।


जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम खटंगा के एक साधारण परिवार की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है, जहाँ शासन की तीन योजनाओं ने एक साथ उनकी ज़िंदगी को नई दिशा दी है।

श्री सुरेशराम की पत्नी श्रीमती सुमित्रा बाई बताती हैं, “पहले हम कच्चे घर में रहते थे। बरसात हो या गर्मी, हमेशा डर बना रहता था। पानी टपकता था, दीवारें गिरने का डर और रात-बिरात साँप, बिच्छू का डर अलग से। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला पक्का घर अब हमारे लिए एक नई दुनिया जैसा है। अब न डर है, न परेशानी… घर भी साफ-सुथरा है, और बच्चों को पढ़ने-लिखने का भी अच्छा माहौल मिल गया है।”

उनकी बेटी कुमारी संगीता बताती है, “जब कच्चा घर था, तब हम पढ़ाई भी ठीक से नहीं कर पाते थे। बरसात के दिन बहुत दिक्कत होती थी। अब जब पक्का घर मिला है, तो मन लगता है। हम अब बहुत खुश हैं।”

सुमित्रा बाई आगे बताती हैं, “प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से गैस सिलेंडर और चूल्हा मिलने से अब हम धुँआरहित खाना बना पाते हैं। पहले जंगल से लकड़ी लाना पड़ता था, आग जलाना — सब बहुत मुश्किल था। आँख में जलन, खाँसी और समय भी ज़्यादा लगता था। अब रसोई में आसानी से खाना बन जाता है।”

उन्होंने आगे बताया कि, “मुझे मुख्यमंत्री महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने ₹1000 मिलते हैं। उसी से हम तेल, नमक, साबुन जैसे ज़रूरी सामान खरीद लेते हैं। कभी बेटी को स्कूल के लिए कॉपी-किताब भी लेना हो, तो उसी से काम चल जाता है।”

परिवार ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार जताया।

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सांसद राधेश्याम राठिया की अध्यक्षता में खनिज क्षेत्र कल्याण योजना की समीक्षा बैठक संपन्न 

जशपुर 17 जुलाई 25/ लोक सभा सांसद रायगढ़ श्री राधेश्याम राठिया की अध्यक्षता में बुधवार को जिला पंचायत के सभाकक्ष में प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना की विस्तार से समीक्षा की। 
उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, अधोसंरचना पर किए गए खर्चों की विस्तार से जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
कलेक्टर ने बताया कि विगत वर्ष से जो खनिज न्यास निधि की राशि मिली थी उसका ही अभी तक उपयोग किया जा रहा है। इस वर्ष राशि प्राप्त नहीं हुई है। कलेक्टर ने आग्रह किया की जशपुर वनांचल जिला है यहां अधोसंरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल कौशल विकास, के लिए राशि मिल जाती तो विकास कार्यों में बल मिलता। 
सांसद राठिया ने कहा कि उच्च अधिकारियों को इस संबंध में चर्चा करके जानकारी जरुर देंगे ताकि विकास कार्यों का और बेहतर क्रियान्वयन किया जा सके।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविन्द भगत जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जुदेव ,नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री यश प्रताप सिंह जुदेव जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार सहायक कलेक्टर श्री अनिकेत अशोक और जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।
कलेक्टर ने समीक्षा बैठक में विगत वर्ष किए गए खर्च के संबंध में जानकारी दी ।

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*राज्यपाल के मुख्य आतिथ्य में उत्कृष्टता अलंकरण समारोह संपन्न......राजनीतिक प्रतिबद्धताओं से ऊपर उठकर लोकहित और लोक कल्याण को दें प्राथमिकता - राज्यपाल श्री रमेन डेका*

रायपुर. 16 जुलाई 2025. राज्यपाल श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में आज छत्तीसगढ़ विधानसभा परिसर में आयोजित "उत्कृष्टता अलंकरण समारोह" गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने समारोह की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत विशिष्ट अतिथि के रूप में समारोह में शामिल हुए। "उत्कृष्टता अलंकरण समारोह" में वर्ष-2024 के लिए श्रीमती भावना वोहरा और श्री लखेश्वर बघेल को उत्कृष्ट विधायक के रूप में सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट संसदीय रिपोर्टिंग के लिए दैनिक भास्कर के विशेष संवाददाता डॉ. राकेश कुमार पाण्डेय, सुदर्शन न्यूज़ चैनल के राज्य ब्यूरो प्रमुख श्री योगेश मिश्रा और सुदर्शन न्यूज़ के कैमरामेन श्री विश्वप्रकाश पुरेना को समारोह में सम्मानित किया गया।
 
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव और श्री विजय शर्मा, संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप, सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत, श्री बृजमोहन अग्रवाल और श्री विजय बघेल, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की धर्मपत्नी श्रीमती वीणा सिंह, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, मंत्रीगण और विधायकगण भी "उत्कृष्टता अलंकरण समारोह" समारोह में शामिल हुए। समारोह में छटवीं विधानसभा के लिए निर्वाचित विधायकों के प्रबोधन कार्यक्रम पर केन्द्रित पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।

"उत्कृष्टता अलंकरण समारोह" को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि यह समारोह न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों के सम्मान का अवसर है, बल्कि हमारी संसदीय परंपराओं को और अधिक सशक्त करने का माध्यम भी है। उन्होंने वर्ष-2024 के उत्कृष्ट विधायक के लिए चयनित श्रीमती भावना बोहरा और श्री लखेश्वर बघेल, तथा उत्कृष्ट संसदीय पत्रकारिता के लिए चयनित डॉ. राकेश कुमार पाण्डेय, श्री योगेश मिश्रा एवं श्री विश्वप्रकाश पुरेना को बधाई दी। 

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने समारोह में कहा कि आप सभी ने विधानसभा की गतिविधियों को ईमानदारी, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ जनता तक पहुंचाने का कार्य किया है। आपकी यह भूमिका लोकतंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ विधानसभा की स्वस्थ परंपरा है जहां न केवल विधायकों, बल्कि पत्रकारों को भी सम्मानित किया जाता है। मेरा आप सभी से आग्रह है कि अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धताओं से ऊपर उठकर सदैव लोकहित और लोक कल्याण को प्राथमिकता दें। 

राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि  छत्तीसगढ़ विधानसभा अपनी स्थापना के रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका है। यह अवसर हम सभी के लिए आत्ममंथन और नये संकल्प का क्षण है। हमारे संसदीय लोकतंत्र की आत्मा को जीवंत बनाए रखने के लिए  संसदीय परंपराओं और प्रक्रियाओं का आदरपूर्वक पालन आवश्यक है। किसी भी विधायी सदन की वास्तविक सार्थकता जनकल्याण में निहित होती है। देश और राज्य के समग्र विकास के लिए यह आवश्यक है कि सभी जनप्रतिनिधि दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर, एकजुट होकर समन्वय और सहयोग की भावना के साथ कार्य करें। 

समारोह को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के 90 विधायक राज्य की तीन करोड़ जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे सभी श्रेष्ठ हैं। हर वर्ष दो उत्कृष्ट विधायकों का चयन कठिन काम है। इस बार 50 नए विधायक चुनकर आए हैं। छत्तीसगढ की विधानसभा जीवंत विधानसभा है। इसने अपना ‘छत्तीसगढ़िया स्वभाव’ नहीं छोड़ा है। सदभाव और सहयोग से जनहित के मुद्दों पर सक्रियता और गंभीरता से चर्चा करते हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन हम सब के लिए खास है। ‘उत्कृष्टता अलंकरण समारोह‘ गर्व और प्रेरणा का अवसर है। विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर है। यहां पर जनहित के मुद्दों को उठाना विधायकों का धर्म है। संसदीय रिपोर्टिंग सजगता और जिम्मेदारी भरा कार्य है। इस कार्य में मीडिया प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इनकी मूल भूमिका को रेखांकित करने के लिए इन्हें सम्मानित करने की परंपरा हमारे विधानसभा में है।

श्री साय ने कहा कि हमारी विधानसभा की कार्यवाही को देशभर में सराहा जाता है। विधायकों की सक्रिय भागीदारी और मीडिया की निरंतर निगरानी ने छत्तीसगढ़ को लोकतंत्र की दृष्टि से एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित किया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा देश की पहली और एकमात्र ऐसी विधानसभा है, जहां गर्भगृह में किसी विधायक के प्रवेश करते ही वे स्वमेव निलंबित हो जाते हैं। इस विशिष्टता और आत्म-अनुशासन ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने बीते वर्षों में न सिर्फ़ आर्थिक व सामाजिक क्षेत्र में प्रगति की है, बल्कि यहां की विधानसभा और संसदीय कार्यप्रणाली भी पूरे देश में मिसाल बनकर उभरी है।

समारोह को संबोधित करते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सम्मानित विधायकों और पत्रकारों को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदन में सदस्यों में राज्य के मुद्दों को लेकर मतभेद रहा है , लेकिन आपस में मन का भेद कभी नहीं रहा। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के रूप डॉ. रमन सिंह के आने से सदन में पक्ष और विपक्ष का बेहतर समन्वय देखने को मिला है और हम सभी एकता और भाईचारे के साथ आगे बढ़ रहे हैं। संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप ने समारोह में शामिल अतिथियों और लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। विधानसभा के सचिव श्री दिनेश शर्मा ने स्वागत भाषण दिया।

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*राष्ट्रीय शिक्षा नीति और शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप प्रदेश में हुआ स्कूल और शिक्षक युक्तियुक्तकरण — मुख्यमंत्री विष्णु देव साय*

रायपुर : 16 जुलाई 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि शिक्षा की गुणवत्ता और सुगमता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता, संवेदनशीलता और नीति-आधारित दृष्टिकोण के साथ संपन्न किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में शिक्षकों के किसी भी पद को समाप्त नहीं किया गया है, बल्कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ और संगठित किया गया है।

राज्य में युक्तियुक्तकरण से पहले की स्थिति अत्यंत असंतुलित थी। प्रदेश में 0 दर्ज संख्या वाली 211 शालाएं संचालित थीं, जिनमें कुछ में शिक्षक पदस्थ भी थे। इसके अलावा, 453 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाईस्कूल तथा हायर सेकेण्डरी शालाएं शिक्षक विहीन थीं। साथ ही, 5936 शालाएं एकल शिक्षकीय थीं, जिनमें सभी स्तर की शालाएं सम्मिलित थीं। यह स्थिति निःसंदेह शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही थी।

वहीं दूसरी ओर, कुछ प्राथमिक शालाओं में अनुचित शिक्षक-संख्या की अधिकता देखी गई — 8 प्राथमिक शालाओं में 15 से अधिक शिक्षक, 61 में 10 से 14 शिक्षक, तथा 749 प्राथमिक शालाओं में 6 से 9 शिक्षक कार्यरत थे। पूर्व माध्यमिक स्तर पर भी यही असंतुलन था — 9 शालाओं में 15 या उससे अधिक, 90 में 10 से 14, तथा 1641 पूर्व माध्यमिक शालाओं में 6 से 9 शिक्षक कार्यरत पाए गए।

प्रदेश में कई स्थानों पर एक ही परिसर में प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी शालाएं अलग-अलग प्रशासनिक नियंत्रण में संचालित थीं, जिससे प्रबंधन में भी जटिलताएँ उत्पन्न हो रही थीं।
इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में 10 से कम दर्ज संख्या वाली शालाएं, 01 किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित दूसरी शालाओं के समानांतर संचालित थीं। शहरी क्षेत्रों में यह स्थिति और भी अधिक घनत्व वाली थी — 500 मीटर से कम दूरी पर 30 से कम दर्ज संख्या वाली शालाएं कार्यरत थीं। इस असमानता को समाप्त करने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के उद्देश्यों को धरातल पर लागू करने के लिए युक्तियुक्तकरण आवश्यक था।

*प्रथम चरण — विद्यालयों का समायोजन*

इस प्रक्रिया के पहले चरण में, शासन द्वारा निर्धारित मापदंडों और निर्देशों के आधार पर विकासखंड स्तर पर युक्तियुक्तकरण योग्य विद्यालयों का चयन किया गया, जिसे जिला स्तरीय समिति द्वारा परीक्षण एवं अनुशंसा उपरांत शासन को भेजा गया। इसके आधार पर कुल 10538 विद्यालयों का युक्तियुक्तकरण किया गया, जिसमें 10372 एक ही परिसर में संचालित विद्यालय, 133 ग्रामीण क्षेत्र की 01 कि.मी. से कम दूरी की शालाएं, तथा 33 शहरी क्षेत्र की 500 मीटर से कम दूरी वाली शालाएं सम्मिलित हैं।

*द्वितीय चरण — शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण*

शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण हेतु अतिशेष शिक्षकों का चिन्हांकन एवं गणना प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के प्रावधानानुसार निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई। इन शिक्षकों को काउंसिलिंग प्रक्रिया के माध्यम से शिक्षक विहीन, एकल शिक्षकीय तथा विषयवार आवश्यकता वाली शालाओं में समायोजित किया गया।

युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप कुल 15165 शिक्षकों एवं प्राचार्यों का समायोजन किया गया जिससे पूर्व में 453 शिक्षक विहीन शालाएं अब पूर्णतः शिक्षक युक्त हो गई हैं। 5936 एकल शिक्षकीय शालाओं में से अब केवल 1207 प्राथमिक शालाएं शिक्षक अनुपलब्धता के कारण शेष हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में कोई भी पद समाप्त नहीं किया गया है, बल्कि प्रत्येक विद्यालय के लिए आवश्यक शिक्षक संख्या का निर्धारण शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुसार दर्ज संख्या के अनुपात में किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भविष्य में यदि किसी विद्यालय की दर्ज संख्या में वृद्धि होती है, तो वहां शिक्षकों की व्यवस्था स्वीकृत पदों के अनुसार की जाएगी।

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*कोण्डागांव की बालिका ने ताईवान में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतकर रचा इतिहास – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दी बधाई*

रायपुर 16 जुलाई 2025/ छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले की बालिका रंजीता कोरेटी ने ताइपे (ताईवान) में आयोजित एशियन कैडेट जूडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद बालगृह बालिका कोण्डागांव की रंजीता ने कई देशों के खिलाड़ियों को पराजित करते हुए यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस गौरवशाली उपलब्धि पर रंजीता को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह न केवल कोण्डागांव जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि रंजीता जैसी बेटियाँ राज्य की उम्मीद और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं, जो यह सिद्ध कर रही हैं कि छत्तीसगढ़ की बेटियाँ अब वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बना रही हैं।

रंजीता की इस उपलब्धि के पीछे जिला बाल संरक्षण इकाई, महिला एवं बाल विकास विभाग एवं बालगृह संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सतत मार्गदर्शन और सहयोग से रंजीता मानसिक और शारीरिक रूप से निरंतर सशक्त होती गई। खेलों में विशेष रुचि और विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए उसे आईटीबीपी के सहयोग से जूडो का प्रशिक्षण दिलवाया गया। रंजीता ने वर्ष 2021 में चंडीगढ़ में आयोजित ओपन नेशनल जूडो टूर्नामेंट में 40 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी खेल यात्रा की प्रभावशाली शुरुआत की।

इसके पश्चात् वर्ष 2022 में भोपाल में आयोजित ओपन नेशनल जूडो प्रतियोगिता में रंजीता ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। वर्ष 2024 में केरल में आयोजित खेलो इंडिया नेशनल जूडो टूर्नामेंट में 52 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल प्राप्त किया। इसी वर्ष महाराष्ट्र के नासिक में आयोजित खेलो इंडिया रीजनल जूडो प्रतियोगिता में उसने गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके साथ ही त्रिशूर (केरल) में 52 किलोग्राम वर्ग में पुनः स्वर्ण पदक प्राप्त कर अपनी श्रेष्ठता को दोहराया। पुणे में आयोजित राष्ट्रीय ओपन नेशनल जूडो चैंपियनशिप में रंजीता ने असम, तेलंगाना, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे प्रमुख राज्यों की खिलाड़ियों को पराजित करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, पटना (बिहार) में भी उसने जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक प्राप्त कर जिले और राज्य को गौरवान्वित किया।

राष्ट्रीय स्तर पर निरंतर उपलब्धियों के पश्चात रंजीता ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। अप्रैल 2025 में जॉर्जिया में आयोजित कैडेट यूरोपियन कप 2025 में रंजीता ने 52 किलोग्राम वर्ग में 5वाँ स्थान प्राप्त किया। इसके बाद ताशकंद (उज़्बेकिस्तान) में वर्ष 2025 में आयोजित एशियन कैडेट चैंपियनशिप में भी उसने अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन जारी रखा। अंततः 12 जुलाई से 15 जुलाई 2025 तक ताइपे (ताईवान) में आयोजित एशियन कैडेट जूडो चैंपियनशिप में रंजीता ने स्वर्ण पदक जीतकर भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल हासिल किया।

रंजीता की इस प्रेरणादायक यात्रा को देखते हुए जनवरी 2023 में उसका चयन भोपाल स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) में हुआ, जहाँ वह वर्तमान में शिक्षा के साथ-साथ जूडो का उच्चस्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह सफलता यह दर्शाती है कि यदि बेटियों को अवसर, संसाधन और सही मार्गदर्शन मिले, तो वे किसी भी ऊँचाई को छू सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार बेटियों को सशक्त बनाने के लिए हर स्तर पर प्रतिबद्ध है, और रंजीता कोरेटी जैसे उदाहरण छत्तीसगढ़ की शक्ति और संभावना का प्रतीक हैं।

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*दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी एवं कपास की फसल लेने वाले किसानों को भी मिलेगा  उन्नति योजना के तहत प्रति एकड़ दस हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि*

रायपुर. 16 जुलाई 2025 : राज्य सरकार की कृषक उन्नति योजना का फायदा धान के अलावा दलहन, तिलहन, मक्का, लघु धान्य फसल, कोदो, कुटकी, रागी एवं कपास की फसल लेने वाले किसानों को भी मिलेगा। उन्हें प्रति एकड़ दस हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। राज्य शासन के कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग ने योजना के क्रियान्वयन के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 

कृषि विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य का अधिकांश क्षेत्र वर्षा आधारित होने से मौसमीय प्रतिकूलता एवं कृषि आदान लागत में वृद्धि के कारण कृषि आय में अनिश्चितता बनी रहती है। इनके कारण किसान फसल उत्पादन के लिए आवश्यक आदान जैसे उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक, यांत्रिकीकरण एवं नवीन कृषि तकनीकी में पर्याप्त निवेश नहीं कर पाते हैं। राज्य सरकार द्वारा कृषि में पर्याप्त निवेश एवं काश्त लागत में राहत देने के लिए कृषक उन्नति योजना प्रारंभ की गई गई है। राज्य शासन ने फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन देने, दलहन व तिलहन फसलों के क्षेत्र विस्तार तथा इनके उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के साथ चिन्हित अन्य फसलों पर आदान सहायता राशि देने का निर्णय लिया है।
 
कृषक उन्नति योजना का लाभ केवल उन्ही कृषकों को मिलेगा जिन्होने एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन कराया है। विगत खरीफ मौसम में एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीकृत ऐसे कृषक जिन्होंने धान की फसल ली है तथा प्रदेश की सहकारी समितियों में समर्थन मूल्य पर धान विक्रय किया है, ऐसे किसानों द्वारा धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसल के लिए किसान पोर्टल में पंजीयन तथा गिरदावरी में रकबे की पुष्टि के उपरांत मान्य रकबे पर 11 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। खरीफ मौसम में दलहन, तिलहन, मक्का, लघु धान्य फसल, कोदो, कुटकी, रागी एवं कपास उगाने वाले किसानों को एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन तथा गिरदावरी में रकबे की पुष्टि उपरान्त मान्य रकबे पर दस हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता  प्रदान की जाएगी। 

कृषक उन्नति योजना के नवीन दिशा-निर्देशों के अनुसार विधिक व्यक्तियों जैसे ट्रस्ट, मण्डल, प्राइवेट लिमिटेड, समिति, केन्द्र एवं राज्य शासन की संस्था, महाविद्यालय आदि संस्थाओं को योजना से लाभ लेने की पात्रता नहीं होगी। जो कृषक प्रमाणित धान बीज उत्पादन कार्यक्रम लेते हैं, और सामान्य धान भी सहकारी समितियों में विक्रय करते है, उनके द्वारा कुल विक्रय की जाने वाली धान की मात्रा, उनके कुल धारित रकबे की सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए। इसे छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित एवं छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड द्वारा आपसी समन्वय से सुनिश्चित किया जाएगा। कृषकों को आदान सहायता राशि का भुगतान कृषि भूमि सीलिंग कानून के प्रावधानों के अध्याधीन किया जाएगा। कृषकों को आदान सहायता राशि उनके बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से की जाएगी। खरीफ सीजन-2025 में प्रदेश के किसानों से उपार्जित धान की मात्रा पर धान (कॉमन) पर 731 रुपए प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 15 हजार 351 रुपए प्रति एकड़ तथा धान (ग्रेड-ए) पर 711 रुपए प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 14 हजार 931 रुपए प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। 
 
बीज उत्पादक किसानों द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड को विक्रय किए गए धान बीज पर निर्धारित आदान सहायता राशि की कृषकवार मांग का विवरण बीज निगम द्वारा संचालक कृषि को प्रेषित किया जाएगा। संचालक कृषि द्वारा मांग अनुसार राशि छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड को उपलब्ध कराई जाएगी। योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी या कृषि विभाग के विकासखण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्यालयों से जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

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*बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा-सुकमा में शासन की रणनीति सफल — दूरस्थ अंचलों में भी पहुँच रही स्वास्थ्य सेवा.....61.8% बिना लक्षण वाले मरीज समय पर पहचाने गए*

रायपुर 16 जुलाई 2025/छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान (12वां चरण) की अब तक की प्रगति से स्पष्ट है कि राज्य शासन की घर-घर स्क्रीनिंग रणनीति और सक्रिय जनसंपर्क के माध्यम से मलेरिया की जड़ पर प्रहार किया जा रहा है। 25 जून से 14 जुलाई 2025 तक हुए सर्वेक्षण में 1884 मलेरिया पॉजिटिव मरीजों की पहचान की गई, जिनमें से 1165 मरीज (61.8%) बिना लक्षण (Asymptomatic) वाले थे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार की नीति स्पष्ट है—बीमारी की प्रतीक्षा मत करो, बीमारी से पहले पहुँचो। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और कहा कि यह अभियान राज्य को मलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा।

कुल 1,39,638 लोगों की मलेरिया जांच की गई। 1884 लोग पॉजिटिव पाए गए, जिनमें से 1165 (61.8%) बिना किसी लक्षण के थे — यानी यदि ये स्क्रीनिंग नहीं होती, तो संक्रमण आगे बढ़ता। कुल मामलों में से 75% से अधिक बच्चे हैं, जो विशेष रूप से संवेदनशील वर्ग हैं। 92% से अधिक मलेरिया केस Plasmodium falciparum (Pf) प्रकार के हैं — जिसकी त्वरित पहचान से गंभीर जटिलताओं को टाला गया।

दंतेवाड़ा जैसे दूरस्थ और भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण जिले में 12.06% लक्ष्य प्राप्ति दर और 706 मलेरिया पॉजिटिव मामलों की पहचान एक बड़ी सफलता है। खास बात यह है कि इनमें से 574 मरीज बिना लक्षण वाले (Asymptomatic) थे, जिन्हें शासन की सक्रिय रणनीति के कारण समय रहते उपचार उपलब्ध कराया गया। यह दिखाता है कि जंगल क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य तंत्र की पहुँच, निगरानी, और सेवा वितरण प्रभावशाली तरीके से हो रहा है।

सुकमा में 15,249 व्यक्तियों की जांच के दौरान 372 मलेरिया पॉजिटिव केस मिले, जिनमें से 276 मरीज बिना लक्षण वाले थे। यह आँकड़ा स्पष्ट रूप से बताता है कि शासन की प्रो-एक्टिव स्क्रीनिंग के चलते साइलेंट संक्रमण के चक्र को तोड़ा जा रहा है। जनजातीय क्षेत्रों में भी मेडिकल एक्सेस और सामुदायिक भागीदारी के चलते संक्रमण पर नियंत्रण पाया जा रहा है — यह प्रशासन की रणनीतिक सफलता है।

मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के 12वें चरण अंतर्गत 27266 घरों में स्क्रीनिंग टीमों की पहुँच हुई। 1247 गर्भवती महिलाओं की जाँच की गई, जिनमें से मात्र 10 पॉजिटिव पाई गईं – यानी केवल 0.08%। LLIN (लार्ज लास्टिंग मच्छरदानी) का उपयोग 92% घरों में सुनिश्चित हुआ। Indoor Residual Spray कवरेज 68.73% तक पहुँचा। 614 घरों में मच्छर लार्वा मिलने पर त्वरित कार्रवाई की गई।

यह अभियान दर्शाता है कि स्वास्थ्य सेवा सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि जागरूकता, समयबद्धता और पहुँच का नाम है। शासन द्वारा वैज्ञानिक पद्धति से स्क्रीनिंग, मच्छर नियंत्रण, जागरूकता और फॉलोअप व्यवस्था के संयुक्त प्रयास से ही संभव हो सका है कि 61.8% बिना लक्षण वाले मरीजों को इलाज मिला और संक्रमण की कड़ी टूट सकी।

छत्तीसगढ़ सरकार आने वाले समय में इस मॉडल को और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि राज्य को मलेरिया मुक्त बनाना सिर्फ लक्ष्य नहीं, बल्कि वास्तविकता बने।

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छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने शासन के नाम 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आज एस डी एम कुनकुरी नंदजी पाण्डेय को सौंपा ज्ञापन

 कुनकुरी: 16 जुलाई 2025 :- प्रांतीय आह्वान पर छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन, कुनकुरी शाखा ने 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आज एस डी एम नंदजी पाण्डेय को  मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन के नाम ज्ञापन सौंपा।प्रतिनिधि मंडल में फेडरेशन के अध्यक्ष अरविन्द मिश्रा, उपाध्यक्ष वाई आर कैवर्त,सचिव प्रभुशंकर श्रीवास्तव , शिक्षक संघ के प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य अनिल सिंह एवं बिहारी नायक,पंचायत सचिव संघ के अध्यक्ष विनय यादव,घनश्याम सिंह,कृष्ण यादव, कृषि विस्तार अधिकारी संघ के पदाधिकारी अजय राय,कमलेश्वर पैंकरा,पंचायत विभाग के जनक साय पैंकरा सहित शासन के विभिन्न विभागों शिक्षा विभाग, कृषि विभाग, पंचायत विभाग,राजस्व विभाग एवं अन्य विभागों के कर्मचारी तथा अधिकारी सम्मिलित रहे।।     

      विदित हो कि कर्मचारी एवं अधिकारी मोदी की गारंटी के तहत चुनावी घोषणा पत्र के अनुसार केंद्र के समान महंगाई भत्ता देय तिथि से जारी करने,वेतन विसंगति दूर करने,पुरानी पेंशन का लाभ पूर्ण सेवा अवधि के आधार पर देने,चार स्तरीय वेतनमान जारी करने,अर्जित अवकाश का नकदीकरण  मध्यप्रदेश के समान 300 दिन करने,क्रमोन्नत वेतनमान जारी करने,कैशलेस चिकित्सा,संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण आदि को लेकर आंदोलन की राह पर हैँ।

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*सांसद की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक संपन्न.....हेलमेट लगाकर ही वाहन चलाने की अपील* 

जशपुरनगर 16 जुलाई 2025 :  लोक सभा सांसद रायगढ़ श्री राधेश्याम राठिया की अध्यक्षता में बुधवार को जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक जिला पंचायत के सभाकक्ष में आयोजित की गई।
        सांसद श्री राधेश्याम राठिया ने लोगों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए कहा और दो पहिया वाहन चलाने वाले वाहन चालकों को हेलमेट अनिवार्य रूप से लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि धीरे चले और सुरक्षित पहुंचे लोगों यातायात के नियमों की जानकारी देने के भी निर्देश दिए।
        इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविन्द भगत,  उपाध्यक्ष श्री यश प्रताप सिंह जूदेव,  कलेक्टर श्री रोहित व्यास, एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार, सहायक कलेक्टर श्री अनिकेत अशोक, पुलिस विभाग की डीएसपी मंजुलता बाज और जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।
            कलेक्टर श्री व्यास ने बताया कि दुर्घटना को रोकने के लिए लोगों में जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को हेलमेट लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने वाले वाहन चालकों पर चलान काटने की कार्रवाई की जा रही है। जिन जगहों पर ज्यादा दुर्घटना होती है, उन जगहों को सुधारा जा रहा है और संकेत चिह्न भी लगाया गया है।
            जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय ने दुर्घटना को रोकने के लिए सीसीटी कैमरा लगवाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि बड़े शहरों में तेज रफ्तार से वाहन चलाने पर तत्काल ऑनलाइन चलान कट जाता है वैसे प्रकिया अपनाया जा सकता है।
          एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने बताया कि यातायात नियमों के उलंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध चालानी कार्रवाई की जा रही है। वर्तमान में 1 जनवरी से 13 जुलाई  तक 9983 प्रकरणों को दर्ज किया गया है और 4368300 राशि का जुर्माना काटा गया है। इसके साथ ही यातायात नियमों का उलंघन करने वाले 52 वाहन चालकों का लाईसेंस निलंबित किया गया है। एसएसपी श्री सिंह ने बताया कि लोगों में जन जागरूकता अभियान के तहत स्कूल और कॉलेजों में यातायात प्रशिक्षण कार्यक्रम, हेलमेट रैली, निःशुल्क हेलमेट वितरण, स्कूल बसों और आटो वाहन का फिटनेस चेक, नुक्कड़ नाटक, यातायात जागरूकता रैली, नेत्र परीक्षण, लाइसेंस शिविर का आयोजन, वाहनों में रेडियम पट्टी, आदि अभियान चलाया जा रहा है।

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*मुख्यमंत्री ने ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान पर आधारित पुस्तिका का किया विमोचन*

रायपुर : 15 जुलाई 2025 : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा परिसर स्थित अपने कक्ष में ‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए इस विशेष अभियान ने जल संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में अभूतपूर्व चेतना उत्पन्न की है। विमोचन कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, प्रमुख सचिव पंचायत श्रीमती निहारिका बारीक, आयुक्त मनरेगा और संचालक प्रधानमंत्री आवास योजना श्री तारण प्रकाश सिन्हा सहित अनेक अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ग्राम पंचायतों की सक्रियता और जनता की स्वप्रेरित भागीदारी के चलते यह अभियान अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। लोग स्वेच्छा से जल संरक्षण जैसे पुनीत कार्यों से जुड़ रहे हैं, जो सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि पुस्तिका में राज्य की विभिन्न पंचायतों द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों और नवाचारों को संकलित किया गया है, जो अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अभियान के अंतर्गत सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियों के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रदेश की 11,000 से अधिक ग्राम पंचायत भवनों की दीवारों पर भूजल स्तर अंकित किया गया है, जिससे लोगों में जल के महत्व को लेकर व्यावहारिक चेतना जागृत हुई है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की भूमिका जल संरक्षण को जन-भागीदारी से जोड़ने में महत्वपूर्ण रही है, और यह चेतना आने वाले समय में और भी व्यापक स्वरूप लेगी।

उल्लेखनीय है कि ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत रैली, दीवार लेखन जैसे माध्यमों से व्यापक स्तर पर जनसामान्य को जल संरक्षण के प्रति संवेदनशील और जागरूक किया गया है। 626 क्लस्टर्स में आयोजित प्रशिक्षणों के माध्यम से 56,000 से अधिक प्रतिभागियों को जल प्रबंधन और संरक्षण के लिए तैयार किया गया है।

अभियान में GIS तकनीक का उपयोग कर जल संरक्षण कार्यों की प्रभावी योजना बनाई जा रही है, जबकि जलदूत ऐप के माध्यम से खुले कुओं का जल स्तर मापा जा रहा है। इसके अतिरिक्त, परकोलेशन टैंक, अर्दन डैम, डिफंक्ट बोरवेल रिचार्ज स्ट्रक्चर जैसे संरचनात्मक उपायों के माध्यम से जल पुनर्भरण और संरक्षण के स्थायी प्रयास किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों के यह प्रयास छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित करेंगे।

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CG Big New : साय सरकार के नेतृत्व में सफल हो रही प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना..1 करोड़ घरों को रोशन करने का है लक्ष्य..पढ़ें पूरी ख़बर

Chhattisgarh News/रायपुर। भारत सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम है, जिसका उद्देश्य घर-घर तक सौर ऊर्जा पहुंचाकर न केवल लोगों को आत्मनिर्भर बनाना बल्कि उनको विद्युत शुल्क के बोझ से भी मुक्ति दिलाना है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में इस योजना को जो गति और विस्तार मिला है वह प्रशंसनीय है। राज्य सरकार ने जिस तत्परता और पारदर्शिता के साथ इस योजना को लागू किया है उसका परिणाम है कि हजारों परिवार आज बिजली बिल से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी 2024 को की थी। इस योजना में प्रत्येक पात्र परिवार को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराया जा रहा है।

वहीं, मुख्यमंत्री साय के कुशल नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का आगाज

छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने इस योजना को ‘जन-जन की योजना’ बना दिया है। मार्च 2024 से ही राज्य में सोलर रूफटॉप लगाने का कार्य तेजी से आरंभ कर दिया गया। सरकार ने इस योजना को मिशन मोड में लागू कर 2025 के मध्य तक ही राज्य के 1 लाख से अधिक परिवारों को इससे जोड़ दिया है। राज्य सरकार ने लक्ष्य रखा है कि हर ब्लॉक में कम से कम 1000 सोलर छतें लगाई जाएँगी। डिस्कॉम (DISCOM) यानि वो विद्युत वितरण कम्पनियाँ जो घरों, व्यवसायों और उद्योगों को बिजली की आपूर्ति करती हैं और ग्राम पंचायतों को जोड़कर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जन-जन के लिए ऑनलाइन पोर्टल और हेल्पलाइन के ज़रिये आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।

बता दें कि, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की सफलता के लिए विष्णु देव साय सरकार की रणनीति

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने योजना को लागू करने के लिए राज्य ऊर्जा विभाग, CREDA (छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण) और बिजली वितरण कंपनियों को साझा मंच पर लाकर एक “सौर मिशन टास्क फोर्स” का गठन किया गया है।“सूर्य घर, रोशन घर” जैसे नारों से गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। स्कूलों, पंचायत सभाओं, और हाट-बाजारों में सूचना का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। स्थानीय नेताओं और स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी सुनिश्चहित की गई है।“सोलर मित्र योजना” के तहत 5000 युवाओं को रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन युवाओं को पंचायत स्तर पर अनुबंध के आधार पर नियुक्त कर स्वरोजगार की दिशा में बढ़ावा । योजना की गति के निगरानी और पारदर्शिता के लिए जिला स्तर पर निगरानी समितियों का गठन किया गया है। एकीकृत ऑनलाइन डैशबोर्ड पर प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट ली जा रही है।

ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सोलर पैनल लगाने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन

वहीं, छत्तीसगढ़ में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सौर सब्सिडी 2 किलोवाट तक की प्रणाली के लिए ₹30,000 प्रति किलोवाट के मान से 2 किलोवाट के लिए कुल सब्सिडी ₹60,000 तक दिया जा रहा है। 3 किलोवाट की प्रणाली के लिए पहले 2 किलोवाट के लिए ₹30,000 प्रति किलोवाट और अतिरिक्त किलोवाट के लिए ₹18,000 इस तरह कुल ₹78,000 सब्सिडी दी जा रही है। 1 करोड़ घरों को इस योजना से जोड़ा जा रहा है।बिजली पर निर्भरता कम कर हर घर को ऊर्जा की दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।राज्य सरकार ने केंद्र की सब्सिडी के साथ-साथ 10,000 रुपये अतिरिक्त सहायता देना प्रारंभ किया। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक लोन पर शून्य ब्याज दर की पहल की गई है। इस योजना का लाभ उठाते हुए आम-जन अपनी घरेलू जरूरत की बिजली खुद उत्पन्न कर अतिरिक्त बिजली ग्रिड को सप्लाई करके आर्थिक राहत के साथ-साथ अतिरिक्त लाभ भी कमा रहे है।

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

दरअसल, छत्तीसगढ़ के सैकड़ों परिवार अब बिजली के बिल से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। जिनका औसत मासिक बिल 800 से 1200 रुपये होता था, अब उन्हें 0 रुपये का बिल मिल रहा है। दुर्गम और आदिवासी अंचलों में जहां बिजली की आपूर्ति अनियमित थी, वहां सौर ऊर्जा से बिजली उपलब्ध हो रही है। गांव के लोग टॉर्च और लालटेन के युग से निकलकर अब एलईडी बल्ब और पंखे चला रहे हैं। रसोईघर और घर के अन्य कार्यों के लिए अब महिलाएं विद्युत उपकरणों का उपयोग कर पा रही हैं, जिससे समय की बचत हो रही है।सोलर इंस्टॉलेशन, मेंटेनेंस और वेंडर नेटवर्क के माध्यम से हज़ारों युवाओं को रोजगार मिला है।सौर उपकरणों की बिक्री व इंस्टॉलेशन क्षेत्र में MSME और स्टार्टअप को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सोलर ऊर्जा से होने वाले पर्यावरणीय लाभ

फिलहाल, सौर ऊर्जा के माध्यम से प्रति घर औसतन 500 किलो CO₂ उत्सर्जन में कमी आती है जिसका पर्यावरण में धनात्मक प्रभाव होता है इस प्रभाव को देखते हुए समाज में भी पर्यावरणीय जागरूकता में वृद्धि देखी जा रही है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, ग्रीन एनर्जी की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।इस योजना से लाभान्वित इसे आम नागरिकों के लिए एक ऐसा वरदान बता रहे है, जो उन्हें न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में उनको आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सहभागी बना रही है।

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को लेकर मुख्यमंत्री की भावी योजनाएं

वर्ष 2030 तक का

 छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है जिसमें वर्ष 2026 तक 10 लाख घरों में रूफटॉप सोलर लगाया जाना है। राज्य के हर गांव में कम से कम 1 सामुदायिक सोलर यूनिट स्थापित की जाएगी। वर्ष 2030 राज्य को ऊर्जा निर्यातक बनाने की दिशा में कदम उठाया जाएगा। इसके लिए सोलर पैनल निर्माण इकाइयों को प्रोत्साहन दिया जाएगा।कृषि पंप, स्कूल और पंचायत भवन भी सौर ऊर्जा से जोड़े जाएंगे। EV चार्जिंग स्टेशन में सौर ऊर्जा की भूमिका बधाई जाएगी।

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना छत्तीसगढ़ में एक सामाजिक और ऊर्जा क्रांति का प्रतीक बन चुकी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व, जनकल्याणकारी सोच और प्रशासनिक चुस्ती के चलते यह योजना न केवल सफलता की ओर अग्रसर है, बल्कि देशभर के लिए एक मॉडल बन चुकी है।

एक ओर जहां यह योजना आम जनता को बिजली के बोझ से मुक्त कर रही है, वहीं दूसरी ओर यह आत्मनिर्भर भारत के सपने को सच करने की दिशा में भी एक ठोस कदम है। छत्तीसगढ़ आज ऊर्जा क्रांति की राह पर चल पड़ा है, अब सूरज की रोशनी से उजाला ही नहीं, विकास का मार्ग भी खुल रहा है।

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CG Big News : निजी स्कूलों की तर्ज पर अब सरकारी स्कूलों में भी होगी पालक- शिक्षक बैठक..अगस्त से होगी शुरू..पढ़ें पूरी ख़बर

Chhattisgarh News/रायपुर. निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में भी पालक-शिक्षक बैठक आयोजित की जाएगी. इसमें बच्चों की अकादमिक प्रगति समेत अन्य विषयों पर चर्चा होगी. पहली बैठक अगस्त के पहले सप्ताह में होगी. पालक-शिक्षक बैठक के संबंध में स्कूल शिक्षा सचिव ने सभी कलेक्टरों, संभागीय संयुक्त संचालकों एवं जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं. पालकों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने, बच्चों की प्रगति से अवगत कराने एवं बच्चों में भविष्य की संभावनाओं का आंकलन कर पालकों के साथ समन्वय बनाने के उद्देश्य से शासन ने पालक-शिक्षक बैठक नियमित रूप से कराए जाने का निर्णय लिया है.

फिलहाल, विभाग का मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप ड्रॉप आउट रोकने में पालकों की भूमिका अहम हो सकती है. पालक-शिक्षक पहली बैठक अगस्त के पहले सप्ताह में आयोजित की जाएगी. इसमें बच्चों की पढ़ाई की प्रगति की जानकारी पालकों को दी जाएगी. वहीं पालक भी अध्ययन-अध्यापन को लेकर अपने सुझाव दे सकेंगे. बैठक में घर में पढ़ाई का वातावरण बनाने, स्कूल में बच्चे ने क्या पढ़ाई की इसकी जानकारी पालकों को रोजाना हो, बच्चों के आयु एवं कक्षा अनुरूप स्वास्थ्य परीक्षण तथा पोषण के बारे में जानकारी प्रदान की जाएगी.

कब-कब होगी बैठक

प्रथम बैठक अगस्त के पहले सप्ताह में.

दूसरी बैठक- तिमाही परीक्षा के पश्चात 10 दिन के भीतर.

तीसरी बैठक छमाही परीक्षा के पश्चात 10 दिन के भीतर.

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कलेक्टर ने स्वतंत्रता दिवस की तैयारी के लिए दिशा-निर्देश दिए....आश्रम छात्रावास का निरीक्षण कर रिपोर्ट शीघ्र जमा करें.....

जशपुर : 16 जुलाई 2025 : कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने मंगलवार को आगामी 15 अगस्त की तैयारी के संबंध में जिला स्तरीय अधिकारीयों की समीक्षा बैठक ली।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी रणजीता स्टेडियम में हर्षोल्लास से स्वतंत्रता दिवस मनाया जाना है। कलेक्टर ने रणजीता स्टेडियम में मंच, बैठक व्यवस्था, आमंत्रण पत्र, परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पेयजल, बिजली आपूर्ति, सुरक्षा व्यवस्था सहित सभी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि सभी विकास खंड कार्यालय और जनपद पंचायत कार्यालय में ध्वजारोहण किया जाना है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी शासकीय भवनों में रोशनी भी किया जाना है।
कलेक्टर ने कहा कि अपने विभाग के उत्कृष्ट कर्मचारियों का नाम भेजते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उस कर्मचारी ने अपने क्षेत्र में बढ़िया काम किया है और उसका नाम के साथ उल्लेख भी करने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर ने कहा कि जिन कर्मचारियों को पहले 15 अगस्त और 26 जनवरी में प्रमाण पत्र मिल चुका है उनका नाम दूसरी बार नहीं भेजने के निर्देश दिए हैं। जिन कर्मचारियों को एक भी बार प्रमाण पत्र नहीं मिला है और बढ़िया काम कर रहे उनका नाम भेजने के निर्देश दिए हैं।
इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार सहायक कलेक्टर श्री अनिकेत अशोक सभी एसडीएम जनपद सीईओ और जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि जिले के सभी आश्रम छात्रावास में निरीक्षण के लिए जिला स्तरीय नोडल अधिकारी बनाया गया है। बालक छात्रावास के पुरुष अधिकारियों और बालिका छात्रावास के महिला अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है। सभी नोडल अधिकारियों को प्रत्येक माह अपने निर्धारित आश्रम छात्रावास का निरीक्षण करना है।

उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान भोजन की गुणवत्ता,साफ सफाई, कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति, सुरक्षा व्यवस्था, बच्चों का स्वास्थ्य जांच, बिस्तर, चादरें साफ सुथरा है कि नहीं घास फूस झाड़ियां कटे हैं कि नहीं बच्चे सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करते हैं कि नहीं बालिका छात्रावास में सुरक्षा व्यवस्था है कि नहीं सभी बातों का गंभीरता से निरीक्षण करने के निर्देश दिए। 

कलेक्टर ने कहा कि जिन आश्रम छात्रावास में समस्या है उसको भी प्रशासन के संज्ञान में लाने के निर्देश दिए हैं। 
कलेक्टर ने कहा कि सभी नोडल अधिकारियों को चेक लिस्ट दिया गया है उसको गंभीरता से भरकर जमा करने निर्देश दिए हैं।

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विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों और बिरहोर परिवारों को शासन की सभी योजनाओं का लाभ प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचे : कलेक्टर

 रायपुर : 16 जुलाई 2025 : कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने मंगलवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में साप्ताहिक समय सीमा की बैठक लेकर पीएम जनमन और धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान की विस्तार से समीक्षा की उन्होंने कहा की विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों और बिरहोर परिवारों को आयुष्मान कार्ड , राशनकार्ड, पेंशन, जन-धन खाता पीएम किसान सम्मान निधि योजना, क्रेडिट कार्ड,जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, प्रधानमंत्री आवास योजना,प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना  सहित बसहाटों तक पूल पुलिया सड़क,बीजली, पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराना है।

उन्होंने कहा कि योजना का लाभ प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचे ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर ने कृषि विभाग को किसानों का किसान क्रेडिट कार्ड प्राथमिकता से बनाने के निर्देश दिए हैं। 

स्वास्थ्य विभाग को जिन हितग्राहियों का आयुष्मान कार्ड नहीं बना है उनका शिविर लगाकर बनाने के निर्देश दिए हैं।

इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार सहायक कलेक्टर अनिकेत अशोक सभी एसडीएम जनपद सीईओ और जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

कलेक्टर ने विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा ग्राम कुटमा में लोक सेवा केन्द्र,वन विभाग की योजनाओं का लाभ देने के लिए कहा है।
कलेक्टर ने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा बसाहटों में मल्टी एक्टिविटी सेंटर बनाया जा रहा है जहां एक ही जगह पर अनेक सुविधाओं का लाभ दिया जाएगा। सेन्टर में आंगनबाड़ी, आजीविका मूलक गतिविधियां, हेल्थ सेंटर और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी।

कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग को आयुष्मान कार्ड बनाने के गांव में शिविर लगाने के लिए कहा है और शिविर से पहले कोटवारों के माध्यम से मुनादी करवाने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर ने बैठक में मुख्यमंत्री जनदर्शन कलेक्टर जनदर्शन के लंबित प्रकरणों की समीक्षा की और आवेदनों का निराकरण गंभीरता से करने के निर्देश दिए।

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*ऑपरेशन सिन्दूर पर छत्तीसगढ़ की जनता को गर्व: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जताया प्रधानमंत्री के प्रति आभार*

रायपुर : ???????? जुलाई ???????????????? : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की कुशल रणनीति और नेतृत्व क्षमता को पूरे देश ने देखा है। यह केवल एक मिशन नहीं था, बल्कि भारत की ताकत, संकल्प और वैश्विक नेतृत्व क्षमता का जीवंत प्रमाण है। श्री साय आज विधानसभा में ऑपरेशन सिन्दूर के सफल क्रियान्वयन हेतु प्रस्तुत धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को ऑपरेशन सिन्दूर के सफल संचालन के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता को इस ऑपरेशन की सफलता पर गर्व है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिन्दूर ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि भारत अब ऐसा राष्ट्र बन चुका है जो अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी परिस्थिति में, किसी भी सीमा तक जाकर, त्वरित, निर्णायक और प्रभावी कार्यवाही करने में सक्षम है। ऐसे अभियान केवल सैन्य या कूटनीतिक सफलता का प्रतीक नहीं होते, बल्कि वे संपूर्ण राष्ट्र की भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं। हमारे राष्ट्रीय नेतृत्व का दृष्टिकोण स्पष्ट है — हर भारतीय का जीवन बहुमूल्य है, चाहे वह देश में हो या विदेश में। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ऑपरेशन के केंद्र में समन्वय और निर्णय क्षमता की जो धुरी रही, वह हैं - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी। प्रधानमंत्री श्री मोदी की सक्रिय भागीदारी, व्यक्तिगत निगरानी और स्पष्ट निर्देशों के कारण ही यह मिशन समयबद्ध, सुरक्षित और सफलतापूर्वक सम्पन्न हो पाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना की बात करते हैं, तो ऐसे मिशन हमें यह विश्वास दिलाते हैं कि भारत केवल अपने नागरिकों की ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता की रक्षा के लिए भी कर्तव्यनिष्ठ है। प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत की साख अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई ऊंचाइयों को स्पर्श कर रही है। ऑपरेशन गंगा, ऑपरेशन कावेरी, ऑपरेशन देवी शक्ति, और अब ऑपरेशन सिन्दूर — भारत ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि वह वैश्विक संकटों में मूक दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय संकट-निवारक राष्ट्र है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहलगाम की वीभत्स घटना के पश्चात हमारे प्रदेश के सपूत स्वर्गीय दिनेश मिरानिया का पार्थिव शरीर भी लौटकर आया। मैंने स्वयं उनके परिवार की पीड़ा को देखा। हमारी बहन ने अपनी आँखों के सामने अपना सुहाग उजड़ते देखा — यह पीड़ा कितनी गहरी है, यह पूरा सदन समझ सकता है। आतंकियों ने उन्हें केवल इस कारण मार डाला कि वे नहीं चाहते थे कि जम्मू-कश्मीर, जो भारत का अभिन्न अंग है, उसमें अन्य प्रांतों के नागरिकों की आवाजाही हो सके। उन्हें धर्म देखकर मारा गया। देश भर की माताओं-बहनों के बिलखने की तस्वीरें सामने आईं और इनके साथ पूरा देश रोया। यह एक ऐसी अमानवीय घटना थी, जिसमें सम्पूर्ण मानवता तार-तार हो गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां आतंकवादियों ने निर्दोष लोगों का रक्त बहाया, वहीं भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई में इस बात का विशेष ध्यान रखा कि पाकिस्तान के आम नागरिकों को कोई क्षति न पहुँचे। हमारे नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत किसी को छेड़ता नहीं, परंतु छेड़ने वालों को छोड़ता भी नहीं। ऑपरेशन सिन्दूर के माध्यम से भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि हम प्रत्येक रक्त की बूँद का हिसाब लेते हैं। जिन आतंकी ठिकानों पर हमला किया गया, वे संसद हमले, मुंबई हमले, अक्षरधाम हमला और पुलवामा जैसी भीषण घटनाओं में लिप्त थे। भारत ने आतंकवाद को शह देने वाले देशों को विश्व मंच पर बेनकाब किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने सदैव शांति को प्राथमिकता दी है, परंतु संप्रभुता पर किसी भी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उसका माकूल उत्तर दिया जाएगा। जो देश आतंकवादियों की भाषा बोलते हैं, वे आज वैश्विक मंचों पर अलग-थलग पड़ चुके हैं — इसका श्रेय भारतीय नेतृत्व की अडिग इच्छाशक्ति को जाता है। पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को बेनकाब करने हेतु प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने जिस प्रकार सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल विभिन्न देशों में भेजा, वह भारतीय लोकतंत्र की सुंदरता और “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की भावना का आदर्श उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उन्हें यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ। उनके व्यक्तित्व में संकल्प, समन्वय और संवेदनशीलता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। रक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु प्रधानमंत्री जी ने जो सतत परिश्रम किया, उसका प्रभाव हमें ऑपरेशन सिन्दूर में प्रत्यक्ष रूप से देखने को मिला। यह ऑपरेशन 140 करोड़ देशवासियों की एकजुटता और अखंडता का प्रतीक बन चुका है और सदा स्मरणीय रहेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ऑपरेशन सिन्दूर केवल आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई नहीं, बल्कि यह नारी सम्मान और शक्ति का भी प्रतीक है,  मातृशक्ति को समर्पित एक ऐतिहासिक सैन्य-संकल्प है।

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*मुख्यमंत्री श्री साय ने शैक्षणिक भ्रमण पर आए सुकमा जिले के बच्चों से की आत्मीय मुलाकात*

 रायपुर : ???????? जुलाई ???????????????? : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से  छत्तीसगढ़ विधानसभा में नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत राजधानी रायपुर के शैक्षणिक भ्रमण पर आए सुकमा जिले की सुदूरवर्ती पाँच ग्राम पंचायतों के बच्चों ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों से आत्मीय संवाद करते हुए उनका हालचाल जाना और राजधानी रायपुर में उनका आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बस्तर के बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी सहित सभी मूलभूत सुविधाएँ बस्तर के कोने-कोने तक पहुँचाने हेतु कृतसंकल्पित है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों से सौहार्दपूर्ण बातचीत करते हुए कहा कि इस शैक्षणिक भ्रमण के माध्यम से आपको राजधानी रायपुर को निकट से देखने-समझने का अवसर मिला है। इसी तरह राज्य सरकार बस्तर क्षेत्र में भी तीव्र गति से विकास कर रही है। उन्होंने बताया कि सुदूर अंचलों में अब सुरक्षाबलों के कैंप स्थापित हो रहे हैं, और जहां-जहां ये कैंप पहुँचते हैं, वहाँ चौतरफा विकास के द्वार खुलते हैं। अब अधिकांश स्थानों पर शासकीय राशन दुकानों की स्थापना हो चुकी है और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक पहुँच रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि निकट भविष्य में बस्तर पूरी तरह से नक्सलमुक्त क्षेत्र होगा।

मुख्यमंत्री ने बच्चों से मुस्कराते हुए पूछा — "बस्तर के शेर बच्चों ने रायपुर के जंगल सफारी में शेर देखा या नहीं?" इस मजाकिया अंदाज़ पर बच्चों सहित उपस्थित सभी लोग ठहाके लगाकर हँस पड़े।

श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आत्मनिर्भर बस्तर की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। बस्तर के लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उन्हें दुग्ध उत्पादन से भी जोड़ा जा रहा है। सरकार शिक्षा के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सुनिश्चित कर रही है, ताकि क्षेत्र के बच्चों का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध हो सके।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायकगण श्री ईश्वर साहू एवं श्री सुशांत शुक्ला भी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत सुकमा जिले की पाँच सुदूर ग्राम पंचायतों—पालाचलमा, पोटकपल्ली, एलमागुंडा, ताड़मेटला एवं गोलापल्ली—के 100 स्कूली बच्चे राजधानी रायपुर के दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण पर आए हैं। भ्रमण के दौरान इन बच्चों को मंत्रालय, जंगल सफारी, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण स्थलों का अवलोकन कराया गया। विदित हो कि नियद नेल्लानार योजना के तहत बस्तर के नक्सल प्रभावित पाँच जिलों के बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।

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तीरंदाजी केन्द्र एवं एकलव्य खेल अकादमी जशपुर के भवन का किया जा रहा है जीर्णोद्धार 

जशपुर: 15 जुलाई 2025 - खेल विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार समाचार पत्र में दिनांक 15.07.2025 को प्रकाशित खबर शीर्षक "एकलव्य अकादमी पर लटका ताला,के  संबंध में कार्यालय कार्यपालन अभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग जशपुर के पत्र   के माध्यम से  03.07.2025 द्वारा अवगत कराया गया है कि एकलव्य खेल परिसर जशपुर के निरीक्षण में भवन की स्थिति जर्जर पाई गई है, भवन में सीपेज की समस्या है, शौचालय की स्थिति अच्छी नहीं होने  के कारण जीर्णोद्धार की आवश्यकता का उल्लेख किया गया है। उक्त स्थिति के आधार पर छात्रावास में निवासरत बच्चों के साथ किसी भी अप्रिय घटना की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए भवन जीर्णोद्धार संबंधी कार्यवाही प्रक्रियाधीन है, जिस हेतु छात्रावास में रहने वाले बच्चों को वैकल्पिक सुविधा के तौर पर अन्य निकटस्थ छात्रावासों में आवासीय सुविधा प्रदान की जा रही है। तीरंदाजी केन्द्र एवं एकलव्य खेल अकादमी का संचालन पूर्ववत किया जा रहा है, जिस हेतु तीरंदाजी, तैराकी एवं ताईक्वांडो के प्रशिक्षक अकादमी में पूर्व की भांति कार्यरत समाचार पत्र में प्रकाशित खबर पूर्णतः भ्रामक तथा निराधार है।

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CG News : दर्दनाक हादसा.! तेज रफ्तार वाहन ने सड़क पर बैठे मवेशियों को रौंदा..17 गायों की मौत, 4 घायल..पढ़ें पूरी ख़बर

Chhattisgarh News/बिलासपुर. गौवंशों को बचाने और हादसे रोकने के प्रशासनिक दावों के बीच बीती रात कई गौवंशों को कुचले जाने की खबर सामने आई है। तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने सड़क पर बैठे 20 से ज्यादा मवेशियों को कुचल दिया, जिससे 17 गायों की मौत हो गई। वहीं 4 मवेशी घायल हो गए। यह घटना रतनपुर थाना क्षेत्र की है।

दरअसल, रतनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम बारीडीह में नंदलाल पेट्रोल पंप के पास सड़क पर 20 से ज्यादा मवेशी बैठे थे। रतनपुर की तरफ से आ रहे तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने सड़क पर बैठे मवेशियों को अपनी चपेटे में ले लिया। 

फिलहाल, हादसे को देखकर ऐसा लगता है जैसे ड्राइवर ने ब्रेक लगाए बिना ही मवेशियों को कुचलते हुए गाड़ी आगे बढ़ा दी, जिससे 17 मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं 4 मवेशी बुरी तरह से घायल हुए हैं। घटना की सूचना पर रतनपुर पुलिस मामला दर्ज कर अज्ञात वाहन चालक की तलाश में जुटी है।

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