फावड़ा-तसला लेकर निकले ग्रामीण, ‘जल है तो कल है’ के नारों के बीच घटमुण्डा में जल क्रांति की मिसाल बना श्रमदान अभियान - ग्रामीणों ने नाला में बोरी बंधान कर लिया जल संरक्षण का संकल्प

नारायणपुर 24 अफ़्रैल 2026 :जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड में इन दिनों जल संरक्षण को लेकर एक जनआंदोलन सा माहौल देखने को मिल रहा है। राज्य शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप और जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में कुनकुरी ब्लॉक की पंचायतों में “जल संवर्धन अभियान” ज़मीन पर उतरकर असर दिखा रहा है। गांव-गांव में जल स्रोतों को बचाने और पुनर्जीवित करने के लिए जो पहल शुरू हुई है, उसने अब जनभागीदारी का बड़ा रूप ले लिया है।
अभियान के तहत तालाब, कुआं, बावड़ी और नालों की साफ-सफाई, गहरीकरण और जीर्णोद्धार के कार्य तेज़ी से चल रहे हैं। खास बात यह है कि इन कार्यों में ग्रामीण खुद आगे बढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। जल संकट की गंभीरता को समझते हुए लोग अपने स्तर पर श्रमदान कर जल संरचनाओं को संवारने में जुटे हैं। प्रशासन द्वारा लगातार जनजागरूकता कार्यक्रम और “जल संवाद” के जरिए लोगों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
इसी क्रम में ग्राम पंचायत घटमुण्डा में एक प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जहां सरपंच श्रीमती निशा केरकेट्टा की अगुवाई में सैकड़ों ग्रामीण एकजुट हुए। सभी ने पहले जल संरक्षण की शपथ ली और फिर हाथों में फावड़ा-तसला लेकर नाले में बोरी बंधान कार्य शुरू किया। यह बोरी बंधान वर्षा जल को रोककर भू-जल स्तर बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। साथ ही गांव में रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का निर्माण भी किया जा रहा है।
गांव के बुजुर्गों से लेकर युवा और महिलाएं तक इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। तालाब, नाला, हैंडपंप और कुओं के आसपास साफ-सफाई और सुधार कार्य किए जा रहे हैं। सामूहिक श्रमदान के इस प्रयास ने पूरे गांव में एक सकारात्मक ऊर्जा भर दी है और “स्वच्छ जल—बेहतर कल” का संदेश जन-जन तक पहुंचाया है।
सरपंच श्रीमती निशा केरकेट्टा ने बताया कि पंचायत में 50:50 मॉडल के तहत जल संरचनाओं का निर्माण कराया जाएगा। जिन स्थानों पर पहले से स्वच्छता गड्ढे बने हैं, उनकी मरम्मत की जाएगी और आवश्यकता अनुसार नए सोख्ता गड्ढों का निर्माण भी होगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है।कार्यक्रम के दौरान “जल ही जीवन है”, “जल है तो कल है”, “जल बचाओ, कल बचाओ” और “एक-एक बूंद की कीमत पहचानो” जैसे नारों के साथ ग्रामीणों को शपथ दिलाई गई।
