शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने वाले आरोपी को 7 साल की सजा, जशपुर विशेष न्यायालय का फैसला
, जशपुर। विवाह का झूठा झांसा देकर महिला का लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक शोषण करने वाले आरोपी को जशपुर की विशेष न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर अर्थदंड भी लगाया है।
मामला थाना कुनकुरी में दर्ज अपराध क्रमांक 169/2025 का है। आरोपी मनोज कुमार पाण्डेय (44 वर्ष), निवासी बाराकाल, जिला सतना (मध्यप्रदेश) के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था।
पुलिस के अनुसार वर्ष 2024 में पीड़िता और आरोपी की पहचान एक निजी कंपनी में साथ काम करने के दौरान हुई थी। आरोपी ने स्वयं को अविवाहित बताते हुए पीड़िता से प्रेम संबंध बनाए और विवाह का वादा किया। इसी भरोसे में पीड़िता उसके साथ रहने लगी।
जांच में सामने आया कि 7 मार्च 2024 से 8 मई 2025 के बीच आरोपी ने कुनकुरी और राजनांदगांव के विभिन्न स्थानों पर विवाह का झूठा विश्वास दिलाकर कई बार शारीरिक संबंध बनाए। इस दौरान वह पीड़िता के साथ पति-पत्नी की तरह रहता रहा, उससे जन्मे बच्चे को अपना नाम भी दिया और उसके पालन-पोषण का आश्वासन देता रहा।
बाद में पीड़िता को जानकारी मिली कि आरोपी पहले से विवाहित है और उसके बच्चे भी हैं। इसके बावजूद वह लगातार विवाह का भरोसा देकर उसका शोषण करता रहा। जब पीड़िता ने विवाह और साथ रखने की बात कही तो आरोपी ने साफ इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़िता ने थाना कुनकुरी में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने मामले की गंभीरता से विवेचना करते हुए पीड़िता एवं गवाहों के बयान, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्रित कर समय-सीमा के भीतर विशेष न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
प्रकरण की सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम) श्री सत्येंद्र कुमार साहू ने आरोपी को दोषी करार देते हुए बीएनएस की धारा 69 के तहत 7 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹1,000 के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं एससी/एसटी एक्ट की संबंधित धारा के तहत 3 माह के सश्रम कारावास की भी सजा सुनाई गई।
मामले की विवेचना उप पुलिस अधीक्षक श्री भावेश समरथ ने की। न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला अभियोजन अधिकारी सुरेश कुमार साहू, एडीपीओ विपिन शर्मा तथा विशेष लोक अभियोजक अजीत रजक ने प्रभावी पैरवी की, जिसके आधार पर आरोपी को दोषसिद्धि एवं कठोर दंड मिला।
