जशपुर की बेटी संजीता एक्का बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल: पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मत्स्य, बत्तख और सुकर पालन से लिखी सफलता की नई इबारत
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जशपुर की बेटी संजीता एक्का बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल: पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मत्स्य, बत्तख और सुकर पालन से लिखी सफलता की नई इबारत

जशपुरनगर 18 मार्च 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में जिले की महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन व्यतीत कर रही हैं। जशपुर जिले के ग्राम सोगड़ा निवासी संजीता एक्का  पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मत्स्य, बत्तख और सुकर पालन से आय के नए स्रोत बना रही है ।
 

आज वे नवाचार के साथ खेती को लाभकारी बना रही हैं।
 
प्रगतिशील किसान संजीता एक्का अपने पति ईश्वर राम एक्का के साथ मिलकर मत्स्य पालन, बत्तख पालन और सुकर पालन कर  रही है जहॉ पहले वे खरीफ में केवल धान की फसल लेती थी वहीं अब उसी खेत में आलू और गेहूं की खेती कर बेहतर उत्पादन ले रही है और लीची के पौधे लगाकर बागवानी की भी शुरुआत की है।
       
संजीता ने बताया कि पहले वे अपने पति के साथ धान की खेती करते थे जिससे उन्हें ज्यादा मुनाफा नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने मत्स्य पालन करना शुरू किया। धान की खेती के अपेक्षा मछली पालन  से अधिक लाभ मिल  रहा है। इसके साथ ही बत्तख पालन और सुकर पालन भी कर रहे हैं उससे भी फायदा मिल रहा है। 

बरसात के सीजन में धान की खेती करते हैं गर्मी के सीजन में आलू और गेहूं की खेती करते हैं और बगवानी खेती के लिए लीची भी लागाए हैं। लीची के पौधे बारिस में मिट्टी का कटाव रोकते हैं। उन्होंने अपने खेत के पास सोलर फेंसिंग लगवाए हैं। उन्होंने बताया कि शासन की अनेक योजनाओं का लाभ लेकर मछली पालन, बतख पालन और सुअर पालन करके अच्छी आमदनी अर्जित करते हैं। संजीता एक्का ने जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को धन्यवाद दिया 
संजीता एक्का ने अन्य किसानों को भी धान के बदले अन्य फसलों लेने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

          संजीता की इस सोच से पता चलता है कि नई सोच और नवाचार से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। जिले के किसान भी यदि इसी प्रकार खेती में नवाचार सीखना चाहते हैं तो 23 से 25 मार्च तक कृषि महाविद्यालय कुनकुरी में आयोजित होने वाली कृषि क्रांति एक्सपो भाग ले सकते हैं।

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