ई-पॉस मशीन में छह बार लगवाया अंगूठा, एक माह का राशन गबन का आरोप; डेढ़ सौ ग्रामीण पहुंचे कलेक्टर जनदर्शन
ताजा खबरें


बड़ी खबर

ई-पॉस मशीन में छह बार लगवाया अंगूठा, एक माह का राशन गबन का आरोप; डेढ़ सौ ग्रामीण पहुंचे कलेक्टर जनदर्शन

जशपुरनगर। ग्राम पंचायत पोड़ी में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन वितरण में कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। एक माह का राशन गबन किए जाने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को करीब डेढ़ सौ ग्रामीण कलेक्टर जनदर्शन पहुंचे और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में बताया कि अप्रैल माह में ग्राम पंचायत द्वारा संचालित राशन दुकान में अप्रैल, मई और जून तीन माह का राशन एक साथ मिलने की जानकारी दी गई थी। जब हितग्राही राशन लेने पहुंचे तो महिला सरपंच और उनके पति ने तीन माह का राशन देने की बात कहते हुए ई-पॉस मशीन में छह बार अंगूठे का सत्यापन कराया। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद उन्हें केवल दो माह का राशन ही दिया गया। जब तीसरे माह के राशन के संबंध में पूछताछ की गई तो सरपंच और उनके पति ने जून तथा जुलाई का राशन एक साथ देने का आश्वासन देकर उन्हें वापस भेज दिया।

ग्रामीणों का कहना है कि जुलाई माह में जब वे दोबारा राशन लेने पहुंचे तो उन्हें केवल जुलाई का राशन दिया गया। जून माह का राशन मांगने पर सरपंच ने यह कहते हुए देने से इंकार कर दिया कि जून का राशन अप्रैल में ही वितरित किया जा चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें जून माह का राशन कभी मिला ही नहीं और ई-पॉस मशीन में अंगूठा लगवाकर रिकॉर्ड में वितरण दिखा दिया गया। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और वे स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से ई-पॉस मशीन के रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और राशन आवंटन की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि गरीबों के हक के राशन में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जांच में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

इधर, ग्राम पंचायत पोड़ी के पीडीएस दुकान संचालक संदीप भगत ने ग्रामीणों के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि पंचायत को निर्धारित कोटे से करीब 20 क्विंटल कम राशन की आपूर्ति हुई थी। जब राशन मिला ही नहीं तो उसके गबन का सवाल ही नहीं उठता। उनका दावा है कि उपलब्ध स्टॉक के अनुसार ही हितग्राहियों को राशन वितरित किया गया है।

अब पूरे मामले में ग्रामीणों और पीडीएस संचालक के दावे आमने-सामने हैं। ऐसे में प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि राशन वितरण में वास्तव में अनियमितता हुई है या फिर कम आवंटन के कारण यह विवाद उत्पन्न हुआ है।

Leave Your Comment

Click to reload image