बूंदाबांदी में भी घंटों गुल हो जाती है बिजली! नारायणपुर सब स्टेशन की बदहाल व्यवस्था से फूटा जनाक्रोश, चार दिन से जमीन पर पड़ा 11 केवी तार, अंधेरे में दहशत के बीच जीने को मजबूर ग्रामीण… आखिर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है बिजली विभाग?
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बूंदाबांदी में भी घंटों गुल हो जाती है बिजली! नारायणपुर सब स्टेशन की बदहाल व्यवस्था से फूटा जनाक्रोश, चार दिन से जमीन पर पड़ा 11 केवी तार, अंधेरे में दहशत के बीच जीने को मजबूर ग्रामीण… आखिर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है बिजली विभाग?

नारायणपुर । नारायणपुर सब स्टेशन से संचालित होने वाले विभिन्न फीडरों की बिजली व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह चरमरा गई है। हल्की बूंदाबांदी हो या तेज बारिश, क्षेत्र के उपभोक्ताओं को घंटों अघोषित बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि बारिश शुरू होते ही लोगों को यह अंदेशा हो जाता है कि अब कई घंटों तक बिजली के दर्शन नहीं होंगे।
        क्षेत्रवासियों का कहना है कि नारायणपुर सब स्टेशन से जुड़े अधिकांश फीडरों में मामूली बारिश के दौरान भी फॉल्ट हो जाता है और विभाग को उसे सुधारने में 6 से 7 घंटे तक का समय लग जाता है। इस दौरान ग्रामीणों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो जाती है। पेयजल आपूर्ति, मोबाइल चार्जिंग, ऑनलाइन कार्य, पढ़ाई और छोटे व्यवसायों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।

          ग्रामीणों का कहना है कि पहले जब नारायणपुर क्षेत्र में बिजली लाइनें काफी लंबी थीं, तब भी इतनी गंभीर समस्या नहीं आती थी। लेकिन अब क्षेत्र में कई नए सब स्टेशन बन जाने से फीडरों की दूरी पहले की तुलना में काफी कम हो चुकी है। इसके बावजूद मामूली फॉल्ट सुधारने में विभाग को 6 से 7 घंटे तक लग जाना विभागीय लापरवाही को उजागर करता है। लोगों का कहना है कि यदि नेटवर्क छोटा होने के बाद भी बिजली व्यवस्था पहले से ज्यादा खराब हो गई है तो फिर आखिर विभाग की जिम्मेदारी और जवाबदेही कहां है?
          बरसात शुरू होने से पहले बिजली विभाग हर वर्ष मेंटेनेंस का दावा करता है, लेकिन पहली ही बारिश में बार-बार फॉल्ट होना इन दावों की पोल खोल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते पेड़ों की छंटाई, जर्जर तारों की मरम्मत, इंसुलेटरों का बदलाव और लाइनों की सही तरीके से जांच की गई होती तो आज मामूली बारिश में घंटों तक बिजली बंद नहीं रहती। लोगों का कहना है कि विभाग केवल कागजों में मेंटेनेंस दिखाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेता है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आती है।


            इसी बीच नारायणपुर क्षेत्र के सारंगडांड-बेडाटोली मार्ग से विभागीय लापरवाही का एक और गंभीर मामला सामने आया है। सारंगडांड निवासी वेद प्रकाश अंगिरा ने बताया कि लगभग चार दिन पहले 11 केवी बिजली लाइन का तार तीन खंभों से टूटकर जमीन पर गिर गया था। इसकी सूचना तत्काल बिजली विभाग को दे दी गई थी, लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी न तो कोई कर्मचारी मौके पर पहुंचा और न ही टूटे हुए तार को दोबारा खंभों पर चढ़ाने का प्रयास किया गया। परिणामस्वरूप पूरा इलाका पिछले चार दिनों से अंधेरे में डूबा हुआ है और ग्रामीण बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं।
          ग्रामीणों ने बताया कि जिस क्षेत्र में बिजली बंद है, वह चराईमारा जंगल से निकलने वाले जंगली हाथियों का मुख्य मार्ग माना जाता है। जंगल से निकलने के बाद हाथियों का सबसे पहला प्रवेश इसी बस्ती में होता है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में लगातार चार दिनों तक बिजली नहीं रहने से लोगों में भारी दहशत का माहौल बना हुआ है। रात होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है और ग्रामीण हर पल किसी अप्रिय घटना की आशंका के बीच रात गुजारने को मजबूर हैं। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में विशेष रूप से भय का वातावरण बना हुआ है।
बिजली नहीं रहने से ग्रामीणों की दैनिक दिनचर्या भी पूरी तरह प्रभावित हो गई है। मोबाइल फोन, टॉर्च और अन्य आवश्यक उपकरण चार्ज करने के लिए लोगों को कई किलोमीटर दूर सारंगडांड तक जाना पड़ रहा है। विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

शीघ्र सुधार की 
 
क्षेत्र के उपभोक्ताओं ने बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि नारायणपुर सब स्टेशन से जुड़े सभी फीडरों की तकनीकी जांच कराई जाए, टूटे हुए 11 केवी तार को तत्काल ठीक किया जाए तथा मानसून के दौरान बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए स्थायी समाधान किया जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को बार-बार अघोषित बिजली कटौती और घंटों की परेशानी से राहत मिल सके।

सूचना आपके माध्यम से मिल रही है तत्काल जानकारी लेता हूं,ओर शिघ्र ही तार जोड़ बिजली बहाल किया जाएगा।

                                     लोकनाथ नेताम

                           ए ई विजली विभाग -कुनकुरी 

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