मनोरा के शिक्षकों ने मंच पर जीवंत की प्रेमचंद की अमर कृति "पंच परमेश्वर", शानदार नाट्यमंचन ने जीता दर्शकों का दिल, भाषा शिक्षण को रोचक बनाने का दिया संदेश
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मनोरा के शिक्षकों ने मंच पर जीवंत की प्रेमचंद की अमर कृति "पंच परमेश्वर", शानदार नाट्यमंचन ने जीता दर्शकों का दिल, भाषा शिक्षण को रोचक बनाने का दिया संदेश

जशपुर। जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड में हिंदी के महान साहित्यकार प्रेमचंद की कालजयी कहानी "पंच परमेश्वर" का प्रभावशाली नाट्यमंचन किया गया। इस प्रस्तुति की खास बात यह रही कि नाटक के सभी पात्रों की भूमिका विकासखंड के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने निभाई। कार्यक्रम का आयोजन विकासखंड शिक्षा विभाग मनोरा एवं अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

कार्यक्रम में विकासखंड के बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं, समुदाय के सदस्य, पीएम श्री स्वामी आत्मानंद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मनोरा के छात्र-छात्राएं तथा संकुल समन्वयक उपस्थित रहे। इस अवसर पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी तरुण पटेल, सहायक शिक्षा अधिकारी जगतपाल राम एवं बीआरसीसी आशुतोष शर्मा भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के मुकेश ने किया, अतिथियों का स्वागत चन्द्रदेव ने तथा आभार प्रदर्शन बीआरसीसी आशुतोष शर्मा ने किया।

नाट्यमंचन में प्राथमिक शाला रजलापाठ की शिक्षिका वंदना माझी, पूर्व माध्यमिक शाला कलारू के शिक्षक उज्ज्वल वैष्णव, रेमने संकुल की सीएसी सुमन भगत, प्राथमिक शाला हर्राडीपा के संदीप भगत, प्राथमिक शाला पटिया की अल्पना देवी, प्राथमिक शाला नालापारा के अजय भगत तथा प्राथमिक शाला तलोरा के विवेक लकड़ा ने अपनी दमदार अभिनय प्रतिभा से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। वहीं संगीत की जिम्मेदारी प्राथमिक शाला रुकरूमा के शिक्षक देवेश प्रधान एवं पूर्व माध्यमिक शाला के शिक्षक हरीश कुमार महंत ने निभाई। फोटोग्राफी का कार्य निलाभ्र ने किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विकासखंड शिक्षा अधिकारी तरुण पटेल ने कहा कि शिक्षकों ने प्रेमचंद की अमर कहानी "पंच परमेश्वर" को मंच पर जीवंत कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि विद्यालयों में भाषा शिक्षण के दौरान कहानी, कविता और एकांकी का रोल-प्ले कराया जाए तो बच्चों में अभिव्यक्ति कौशल विकसित होगा, संकोच दूर होगा और पढ़ाई अधिक रोचक एवं प्रभावी बनेगी।

वहीं विकासखंड स्रोत समन्वयक आशुतोष शर्मा ने कहा कि शिक्षकों ने अपनी अद्भुत प्रतिभा का परिचय देते हुए इस नाट्यमंचन को सफल बनाया है। भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे विद्यालयों में रचनात्मक वातावरण बनेगा और बच्चों के सीखने की प्रक्रिया अधिक आनंददायी होगी।

कार्यक्रम में मनोरा कॉलेज के प्राध्यापक आलेख केरकेट्टा, प्रधान पाठक प्रवीण पाठक, संकुल समन्वयक महेंद्र सिंह, प्रेमलाल बर्मन, मुनेश्वर यादव, इंदु पटेल, विवेक गुप्ता, शिक्षिका असरिता एक्का, विनोद भगत सहित अनेक शिक्षक, शिक्षिकाएं एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में दर्शकों ने नाट्यमंचन की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए शिक्षकों के इस अभिनव प्रयास को शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणादायी पहल बताया।

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