बादलखोल अभ्यारण्य धधक रहा, जंगल में रोज लग रही आग… विभाग मौन! सड़कों तक पहुंची लपटें, जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल”

जशपुर 15 मार्च:- जिले के प्रसिद्ध बादलखोल अभ्यारण्य इन दिनों आग की घटनाओं से जूझ रहा है। प्रतिदिन जंगल के अलग-अलग हिस्सों में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन वन विभाग के कर्मचारियों की सक्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुबह और दोपहर में लगने वाली आग को समय रहते बुझाने में विभाग पूरी तरह असफल साबित हो रहा है।
जानकारी के अनुसार रविवार सुबह कुरहाटीपना ओर बुटूंगा क्षेत्र में किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा जंगल में आग लगा दी गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और जंगल के भीतर से फैलते हुए कलिया रेंगले प्रधानमंत्री सड़क तक पहुंच गई। सड़क किनारे तक आग पहुंचने के बाद भी उसे बुझाने में देरी होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब आग सड़क किनारे तक पहुंच चुकी थी तब भी वन विभाग के नाकेदार और दरोगा मौके पर आग बुझाने के लिए सक्रिय नजर नहीं आए। लोगों के मुताबिक, यदि समय रहते प्रयास किए जाते तो आग को जंगल के अंदर ही नियंत्रित किया जा सकता था।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि दिन के समय जब जंगल में निगरानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब अधिकांश कर्मचारी नही दिखाई देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जंगल की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी निभाई कब जाती है।

मामले में एक और गंभीर पहलू तब सामने आया जब घटना के संबंध में संवाददाता को कुरहाटीपना और बुटूंगा के बीच में लगी आग की तस्वीरें मिलीं, तो उन्होंने बादलखोल अभ्यारण्य के अधिकारियों को फोटो भेजकर जानकारी दी। परन्तु इस पर भी उच्च अधिकारी ने यह जानने की जहमत नहीं उठाई कि आग कहां लगी है और फोटो किस स्थान की है, जिससे विभागीय जिम्मेदारी पर और भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
उधर सर्किल और संबंधित बीट के नाकेदार व दरोगा द्वारा आग बुझाने में हुई देरी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। जंगल में आग लगने से हजारों छोटे-छोटे पौधे, वन्यजीव और पक्षियों के आवास नष्ट होने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान गेम रेंजर को लेकर रेंज के कर्मचारियों में तालमेल की कमी चल रही है। हालांकि इसका कारणों का खुलासा अभी नहीं हो पाया है, लेकिन विभाग के भीतर तालमेल की कमी की चर्चा जरूर सामने आ रही है।
वन एवं पर्यावरण से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि जंगल में आग की घटनाओं को रोकने के लिए समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में बादलखोल अभ्यारण्य के बड़े हिस्से को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अब बड़ा सवाल यही है कि जंगल में बार-बार लग रही आग को रोकने के लिए वन विभाग कब सक्रिय होगा और आने वाले समय मे जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही तय होगी या नहीं।
