कलेक्टर ऑफिस का फर्जी सुप्रिटेंडेंट बनकर महिलाओं से ठगी का बड़ा खुलासा — नौकरी और सुनहरे भविष्य का सपना दिखाकर महीनों कराया काम, वेतन मांगते ही ऑफिस बंद कर फरार हुआ आरोपी, प्रशासन में मचा हड़कंप
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कलेक्टर ऑफिस का फर्जी सुप्रिटेंडेंट बनकर महिलाओं से ठगी का बड़ा खुलासा — नौकरी और सुनहरे भविष्य का सपना दिखाकर महीनों कराया काम, वेतन मांगते ही ऑफिस बंद कर फरार हुआ आरोपी, प्रशासन में मचा हड़कंप

इन्वेस्टिंग इकोनोमिक्स कम्पनी” में नौकरी और उज्ज्वल भविष्य का सपना दिखाकर कराया काम, अब वेतन और जवाब दोनों से गायब आरोपी प्रदीप पंडा — कई अन्य बेरोजगारों के साथ भी ठगी की आशंका

 , जशपुर 17 फरवरी 2026

जिले में बेरोजगार महिलाओं को नौकरी का झांसा देकर ठगी करने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोपी ने स्वयं को के फाइनेंस विभाग का सुप्रिटेंडेंट बताते हुए महिलाओं का विश्वास जीता और महीनों तक उनसे काम कराया, लेकिन वेतन मांगने पर कार्यालय बंद कर फरार हो गया। पीड़ित महिलाओं ने अब कलेक्टर से शिकायत कर आरोपी के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।

नौकरी दिलाने का झांसा देकर लिया काम

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जशपुर तहसील की निवासी प्रिया साय, मीनाक्षी गुप्ता और एन. सोनी सहित अन्य महिलाओं ने कलेक्टर को दिए शिकायत पत्र में बताया कि प्रदीप पंडा पिता प्रवीण पंडा नामक व्यक्ति ने स्वयं को “इन्वेस्टिंग इकोनोमिक्स कम्पनी” का अधिकारी बताया। साथ ही उसने यह भी दावा किया कि वह कलेक्टर कार्यालय जशपुर के फाइनेंस विभाग में सुप्रिटेंडेंट के पद पर कार्यरत है।

आरोपी ने महिलाओं को कम्पनी में नौकरी देने और अच्छे वेतन तथा उज्ज्वल भविष्य का भरोसा दिलाया। बेरोजगारी से परेशान महिलाओं ने उसके आश्वासन पर भरोसा कर 01 दिसम्बर 2025 से उसके बताए अनुसार नियमित कार्य करना शुरू कर दिया।

वेतन मांगने पर शुरू हुआ टालमटोल, फिर अचानक बंद हो गया ऑफिस

पीड़ित महिलाओं के अनुसार, जब जनवरी 2026 में उन्होंने अपने वेतन की मांग की, तो आरोपी द्वारा लगातार बहाने बनाए जाने लगे। हर बार जल्द भुगतान करने का आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन वेतन नहीं दिया गया।

महिलाओं ने बताया कि 19 जनवरी 2026 से आरोपी ने अपना कार्यालय पूरी तरह बंद कर दिया और तब से वह फरार है। मोबाइल फोन पर संपर्क करने पर भी वह केवल “आज-कल में भुगतान कर देंगे” कहकर बात टाल देता है, लेकिन अब तक कोई भुगतान नहीं किया गया।

कलेक्टर ऑफिस का कर्मचारी होने का झूठा दावा कर जीता विश्वास

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी प्रदीप पंडा ने स्वयं को कलेक्टर कार्यालय के फाइनेंस विभाग का सुप्रिटेंडेंट बताकर अपना प्रभाव और विश्वसनीयता स्थापित की। इसी झूठे पद और प्रभाव के कारण महिलाओं को उस पर पूरा विश्वास हो गया और उन्होंने बिना किसी संदेह के उसके लिए कार्य किया।

पीड़ितों का कहना है कि आरोपी ने बेरोजगारी का फायदा उठाते हुए सुनियोजित तरीके से ठगी की है और संभव है कि अन्य बेरोजगार युवक-युवतियां भी इस ठगी का शिकार हुए हों।

कलेक्टर से की कठोर कार्रवाई की मांग

पीड़ित महिलाओं ने कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपते हुए मामले की जांच कर आरोपी के विरुद्ध कड़ी प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि इस प्रकार के फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में अन्य बेरोजगार लोग इस तरह के जाल में न फंसें।

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