अवधुत आश्रम महुआटोली में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाई गई दुर्गा नवमी, नौ कन्याओं को नवदुर्गा स्वरूप मानकर किया गया विधिवत पूजन, सर्वेश्वरी समूह के ध्वजारोहण के साथ नवरात्रि महोत्सव का हुआ समापन
कुनकुरी/नारायणपुर, 19 अक्टूबर। नवरात्रि के पावन पर्व के समापन अवसर पर कुनकुरी के महुआटोली स्थित श्री समवर्ती देवस्थानम अवधुत आश्रम में दुर्गा नवमी का पर्व पूरी श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। परम पूज्य अवधुत संत श्री समूह रत्न बाबा जी द्वारा स्थापित इस आश्रम में नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। वहीं, नवमी के विशेष अवसर पर नवदुर्गा के स्वरूप मानी जाने वाली नौ बाल कन्याओं का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया। धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरा आश्रम भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।
श्री समवर्ती देवस्थानम अवधुत आश्रम महुआटोली में नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही घट स्थापना कर आदिशक्ति मां सर्वेश्वरी की आराधना प्रारंभ की गई थी। नौ दिनों तक आश्रम में श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मां की पूजा-अर्चना की। प्रतिदिन ज्योति पूजन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। इस दौरान मां आदिशक्ति के प्रति आस्था व्यक्त करते हुए श्रद्धालुओं ने सुख, शांति, समृद्धि और जनकल्याण की कामना की।

नवरात्रि के अंतिम दिन नवमी के अवसर पर आश्रम में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। इस दौरान नौ बाल कन्याओं को नवदुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानते हुए उनका विधिवत पूजन किया गया। कन्याओं का श्रृंगार कर उन्हें श्रद्धापूर्वक आसन पर विराजमान कराया गया। इसके बाद पूरे भक्तिभाव से उनकी पूजा-अर्चना की गई और उन्हें प्रसाद ग्रहण कराया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में कन्या पूजन को विशेष महत्व दिया जाता है। इसे मातृशक्ति के सम्मान, श्रद्धा और शक्ति स्वरूपा देवी की आराधना का प्रतीक माना जाता है।
आश्रम में आयोजित कन्या पूजन के दौरान श्रद्धा और भक्ति का विशेष माहौल देखने को मिला। कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनकी पूजा की गई तथा उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया गया। नवरात्रि के नौ दिनों तक चली आराधना के बाद नवमी पर संपन्न हुए इस अनुष्ठान ने धार्मिक आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया।
नवरात्रि पूजन के समापन अवसर पर सर्वेश्वरी समूह के ध्वज का विधिवत ध्वजारोहण भी पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया। धार्मिक परंपराओं के अनुरूप पूजा-अर्चना एवं निर्धारित अनुष्ठान संपन्न होने के पश्चात नवरात्रि पूजन का विधिवत समापन हुआ।
