स्कूल के गेट से सटी सड़क पर फर्राटे भरते वाहन, खतरे में नौनिहालों की सुरक्षा; आवेदन के बावजूद दो साल से लंबित स्पीड ब्रेकर की मांग पर कब कार्रवाई करेगा प्रशासन - बच्चों की सुरक्षा पर जिम्मेदार विभागों की चुप्पी क्यों?
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स्कूल के गेट से सटी सड़क पर फर्राटे भरते वाहन, खतरे में नौनिहालों की सुरक्षा; आवेदन के बावजूद दो साल से लंबित स्पीड ब्रेकर की मांग पर कब कार्रवाई करेगा प्रशासन - बच्चों की सुरक्षा पर जिम्मेदार विभागों की चुप्पी क्यों?

नारायणपुर। सड़क से लगे विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा आज एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। तेज रफ्तार से गुजरने वाले छोटे-बड़े वाहनों के बीच स्कूली बच्चों का सड़क पर आना-जाना जान जोखिम से कम नहीं है। नारायणपुर में स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है, क्योंकि यहां आजादी से पहले वर्ष 1934 में स्थापित जनपद प्राथमिक शाला और आजादी के बाद वर्ष 1950 में स्थापित जनपद मिडिल स्कूल एक ही परिसर में संचालित हो रहे हैं। इन दोनों पुराने विद्यालयों के मुख्य गेट से सटकर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़क गुजरती है, जिस पर दिनभर सैकड़ों छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन होता है। इसके बावजूद विद्यालय के सामने अब तक स्पीड ब्रेकर सहित जरूरी यातायात सुरक्षा इंतजाम नहीं किए जाने को लेकर शिक्षकों और ग्रामीणों में चिंता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जुलाई 2024 में ही विद्यालय के सामने स्पीड ब्रेकर बनवाने के लिए एसडीएम को लिखित आवेदन दिया जा चुका है, तो करीब दो साल बीतने के बाद भी जिम्मेदार विभागों ने इस दिशा में पहल क्यों नहीं की?

स्कूल खुलने से छुट्टी तक बच्चों पर मंडराता रहता है खतरा

नारायणपुर के जनपद प्राथमिक शाला और जनपद मिडिल स्कूल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अध्ययन के लिए पहुंचते हैं। सुबह स्कूल खुलने के समय बच्चों की आवाजाही बढ़ जाती है। इसके बाद मध्यांतर और छुट्टी के दौरान भी विद्यालय के मुख्य गेट के आसपास बच्चों की भीड़ रहती है। ऐसे समय में यदि सड़क पर वाहन तेज रफ्तार से गुजरें, तो बच्चों के लिए सुरक्षित तरीके से सड़क पार करना मुश्किल हो जाता है।

     विद्यालय के सामने से गुजरने वाली सड़क पर दोपहिया और चारपहिया वाहन अक्सर तेज गति से निकलते हैं। सड़क के ठीक किनारे विद्यालय का प्रवेश द्वार होने के कारण बच्चों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। ऐसे में वाहन चालकों की लापरवाही बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।

शिक्षकों और ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल खुलने और छुट्टी के समय सड़क पर यातायात की गति नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। यदि विद्यालय के सामने स्पीड ब्रेकर, चेतावनी बोर्ड और सड़क पार करने के लिए जेब्रा क्रॉसिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हों, तो दुर्घटना की आशंका को कम करने में मदद मिल सकती है। लेकिन इन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।

एसडीएम को दिया गया आवेदन, दो साल बाद भी इंतजार

विद्यालय के सामने स्पीड ब्रेकर निर्माण की मांग अचानक नहीं उठी है। स्कूल के शिक्षकों  ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए जुलाई 2024 में अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) को लिखित आवेदन सौंपा था। आवेदन के माध्यम से विद्यालय के सामने तेज रफ्तार वाहनों से बच्चों को होने वाले खतरे से अवगत कराते हुए स्पीड ब्रेकर बनवाने की मांग की गई थी।

इसके बावजूद अक्टूबर 2026 तक समस्या का समाधान नहीं हो पाने से ग्रामीणों में निराशा है। लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामले में आवेदन पर समयबद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। जब विद्यालय के गेट से सटी सड़क पर प्रतिदिन बच्चों की आवाजाही होती है, तो वहां यातायात की गति नियंत्रित करने के उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर जिम्मेदार विभागों को इस समस्या की गंभीरता समझने में इतनी देर क्यों लग रही है? क्या प्रशासन और संबंधित विभाग किसी दुर्घटना के बाद ही आवश्यक कदम उठाएंगे? लोगों का कहना है कि दुर्घटना होने के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि पहले ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर दिए जाएं, ताकि किसी बच्चे की जान जोखिम में न पड़े।

पुराने विद्यालयों की सुरक्षा इंतजामों की दरकार

नारायणपुर का जनपद प्राथमिक स्कूल वर्ष 1934 से संचालित हो रहा है, जबकि जनपद मिडिल स्कूल की स्थापना वर्ष 1950 में हुई थी। ये विद्यालय क्षेत्र की पुरानी शैक्षणिक संस्थाओं में शामिल हैं। दशकों से इन विद्यालयों में बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ऐसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थानों के सामने सड़क सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होना चिंता का विषय है।

विद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार से सटी सड़क पर दिनभर वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में विद्यालय के सामने स्पीड ब्रेकर का निर्माण, सड़क पर स्पष्ट संकेतक और सुरक्षित तरीके से सड़क पार करने की व्यवस्था आवश्यक मानी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालयों में शिक्षा की व्यवस्था के साथ-साथ विद्यार्थियों की सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

कन्या हाई स्कूल स्टेट हाईवे-17 के किनारे, बाउंड्रीवाल का भी अभाव

नारायणपुर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं केवल जनपद प्राथमिक और मिडिल स्कूल तक सीमित नहीं हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, कन्या हाई स्कूल स्टेट हाईवे-17 के किनारे संचालित है, लेकिन विद्यालय में अब तक बाउंड्रीवाल नहीं बनी है। व्यस्त राज्यमार्ग के किनारे विद्यालय संचालित होने के कारण छात्राओं की सुरक्षा के लिहाज से भी उचित व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है।विद्यालय की बाउंड्रीवाल बनने से बच्चों को सीधे सड़क की ओर जाने से रोकने में मददगार होती है। ऐसे में राजमार्ग के किनारे संचालित विद्यालय में बाउंड्रीवाल का अभाव सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करता है। 

1970 से संचालित स्वामी आत्मानंद स्कूल में 56 साल बाद भी बाउंड्रीवाल नहीं

इसी तरह नारायणपुर में वर्ष 1970 से संचालित स्वामी आत्मानंद स्कूल को लेकर भी बाउंड्रीवाल की समस्या सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, लोक निर्माण विभाग की ग्रामीण सड़क के किनारे संचालित इस विद्यालय में स्थापना के करीब 56 साल बाद भी बाउंड्रीवाल नहीं बन पाई है।

विद्यालयों के सामने तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही और परिसर के चारों ओर सुरक्षा व्यवस्था की कमी विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाती है। ग्रामीणों का कहना है कि पुराने विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ सुरक्षा से संबंधित आवश्यक निर्माण कार्यों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

लोगों का मानना है कि विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे सुरक्षित वातावरण के हकदार हैं। इसके लिए विद्यालय प्रबंधन, संबंधित विभाग और प्रशासन के बीच समन्वय जरूरी है, ताकि सड़क से लगे विद्यालयों की समस्याओं की पहचान कर उनका समय पर समाधान किया जा सके।

ग्रामीणों ने मांग की है कि नारायणपुर के सड़क किनारे संचालित सभी विद्यालयों का निरीक्षण कर उनकी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाए। जिन विद्यालयों के सामने वाहनों की तेज रफ्तार से बच्चों को खतरा है, वहां प्राथमिकता के आधार पर यातायात सुरक्षा के उपाय किए जाएं।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में जनपद प्राथमिक शाला और जनपद मिडिल स्कूल के सामने स्पीड ब्रेकर का निर्माण, जेब्रा क्रॉसिंग बनाना, 'धीरे चलें, आगे विद्यालय है' के चेतावनी बोर्ड लगाना और गति सीमा के संकेतक स्थापित करना शामिल है। इसके अलावा कन्या हाई स्कूल और स्वामी आत्मानंद स्कूल में बाउंड्रीवाल निर्माण की जरूरत पर भी ध्यान देने की मांग की गई है। बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस दिशा में ठोस पहल करना प्रशासन तथा संबंधित विभागों की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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