‘सीमा की बकरी’ ने सिखाया भाषा शिक्षण का नया तरीका, बहेरना में प्राथमिक शिक्षकों की संकुल स्तरीय कार्यशाला संपन्न
मनोरा
मनोरा बहेरना जोन की प्राथमिक शालाओं का संकुल स्तरीय भाषा शिक्षण अभ्यास कार्यशाला संकुल केंद्र बहेरना में आयोजित किया गया। इस बैठक में बहेरना, आमगांव, गीधा और अंधरझर संकुल के प्राथमिक शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक स्तर के बच्चों में मनोरंजक एवं प्रभावकारी तरीके से भाषा शिक्षण का विकास करना रहा।
प्राथमिक शाला अंकिराकोना की शिक्षिका एवं मास्टर ट्रेनर सरस्वती सिदार ने कक्षा 1 की कहानी "सीमा की बकरी" का सजीव डेमो प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि पाठ की शुरुआत बच्चों के पूर्व अनुभवों पर चर्चा, चित्र पठन और शीर्षक का अनुमान लगाने से करनी चाहिए, जिससे बच्चों में कल्पनाशीलता का विकास हो। डेमो के दौरान श्यामपट्ट के माध्यम से वर्णों, मात्राओं के जुड़ाव और ध्वनियों में आने वाले बदलावों को समझने की सहज प्रक्रिया का प्रदर्शन भी किया गया।
भाषा सीखने में कहानियों की भूमिका अहम
कार्यशाला में अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन से मुकेश ने विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि नई पाठ्यपुस्तकों की कहानियाँ बच्चों के लिए बेहद आनंददायक हैं। यदि शिक्षक कक्षा में विहित शिक्षण प्रक्रियाओं का पालन करें, तो बच्चों का भाषा सीखना अत्यंत सरल और रुचिपूर्ण हो जाएगा।
सफल आयोजन में समन्वयकों का योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में संकुल समन्वयक उपेंद्र कुमार पंकज (बहेरना) एवं जेपी यादव (अंधारझर) की सराहनीय भूमिका रही। इस अवसर पर बसंत राम प्रधान, जयधर राम बुनकर, हेरमोन कुजूर, मिलन राम, शिव कुमार यादव, माग्रेट मिंज, प्रभा भगत, अनुराधा सिंह, दया कुमारी टोप्पो, उर्सुला तिग्गा, स्वरूप किरण मिंज, बलराम राम एवं सुखदेव राम सहित अनेक शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।
