खेत से जुड़ी दिखीं विधायक गोमती साय, किसान बहनों के साथ श्रमदान करते हुए सुना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'मन की बात' कार्यक्रम, ग्रामीणों ने बताया जनप्रतिनिधि की सादगी का प्रतीक
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खेत से जुड़ी दिखीं विधायक गोमती साय, किसान बहनों के साथ श्रमदान करते हुए सुना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'मन की बात' कार्यक्रम, ग्रामीणों ने बताया जनप्रतिनिधि की सादगी का प्रतीक

पत्थलगांव। राजनीति की व्यस्तताओं और जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारियों के बीच भी अपनी मिट्टी और खेती-किसानी से जुड़े रहने का संदेश देते हुए पत्थलगांव विधायक एवं सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय ने एक बार फिर अपनी सादगी और जमीन से जुड़े स्वभाव का परिचय दिया। रविवार को उन्होंने किसान बहनों के साथ खेत में धान की रोपाई (बीड़ा) के कार्य में हिस्सा लिया और इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' का सामूहिक श्रवण किया।

खेत की हरियाली, किसान बहनों के साथ श्रम और प्रधानमंत्री के प्रेरक विचारों का यह अनूठा संगम क्षेत्रवासियों के बीच आकर्षण और चर्चा का विषय बन गया। इस अवसर पर विधायक गोमती साय ने कहा कि "खेत की मिट्टी से जुड़े रहकर देश और समाज के लिए प्रेरणादायी विचारों को सुनना एक सुखद अनुभव है। श्रम, सेवा और राष्ट्रहित का यह सुंदर संगम सदैव नई ऊर्जा और प्रेरणा देता है।"

सादगी और सहजता बनी विधायक गोमती साय की पहचान

गोमती साय अपनी सरलता, सौम्यता और व्यवहार कुशलता के कारण क्षेत्र में विशेष पहचान रखती हैं। विधायक बनने के बाद भी उन्होंने अपने ग्रामीण जीवन और खेती-किसानी से जुड़ाव को कायम रखा है। व्यस्त राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच समय निकालकर वे स्वयं खेतों में पहुंचती हैं और कृषि कार्यों में हाथ बंटाती हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि गोमती साय केवल चुनाव के समय ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनती हैं और सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा किसानों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए लगातार सक्रिय रहती हैं। यही कारण है कि क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

किसान बहनों के साथ दिया श्रम और सम्मान का संदेश

धान की रोपाई के दौरान किसान बहनों के बीच बैठकर 'मन की बात' सुनना केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों के श्रम, ग्रामीण संस्कृति और कृषि परंपरा के सम्मान का संदेश भी माना जा रहा है। विधायक ने इस अवसर पर कहा कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव है।

सोशल मीडिया से चौपाल तक बनी चर्चा

खेत में किसान बहनों के साथ काम करते हुए विधायक गोमती साय की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से साझा की जा रही हैं। गांव की चौपालों में भी उनके इस सहज और सरल व्यवहार की चर्चा हो रही है। ग्रामीणों का मानना है कि जब जनप्रतिनिधि जनता के बीच रहकर उनकी जीवनशैली को अपनाते हैं, तो जनता का विश्वास और अधिक मजबूत होता है।

खेत की मिट्टी से जुड़ी यह तस्वीर एक बार फिर यह संदेश देती है कि जनसेवा और खेती-किसानी एक-दूसरे के पूरक हैं तथा सादगी, संवेदनशीलता और जमीनी जुड़ाव ही किसी जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी पहचान और ताकत होती है।

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