लोरो घाट में मौत से जंग जीत गई तीन जिंदगियां! ट्रक के चकनाचूर केबिन में तीन घंटे तक फंसे रहे चालक समेत तीन लोग, जशपुर पुलिस के साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन ने लिखा बहादुरी का नया अध्याय, डीआईजी डॉ. लाल उमेद सिंह खुद पहुंचे घटनास्थल
जशपुर, 16 जुलाई।
जशपुर जिले के खतरनाक लोरो घाट में बुधवार शाम हुए भीषण सड़क हादसे ने कुछ देर के लिए पूरे इलाके को दहला दिया। धनबाद (झारखंड) से रायपुर की ओर कोयला लेकर जा रहा टाटा ट्रक (क्रमांक JH-02-AM-6041) अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगी सुरक्षा रेलिंग से जा टकराया। टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रक का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया और चालक, वाहन मालिक सहित तीन लोग केबिन के भीतर बुरी तरह फंस गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस और डॉयल-112 को सूचना दी, जिसके बाद जशपुर पुलिस ने ऐसा साहसिक रेस्क्यू अभियान चलाया, जिसकी पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।
घटना की सूचना मिलते ही थाना दुलदुला पुलिस, हाईवे पेट्रोलिंग, डॉयल-112, अग्निशमन दल और एंबुलेंस की टीमें कुछ ही देर में मौके पर पहुंच गईं। प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हो गया कि ट्रक के केबिन में फंसे लोगों को सामान्य तरीके से बाहर निकालना संभव नहीं है। ऐसे में पुलिस और रेस्क्यू टीम ने बिना समय गंवाए सुनियोजित ढंग से बचाव अभियान शुरू किया। पुलिस ने पहले दुर्घटनास्थल को सुरक्षित कराया, यातायात को नियंत्रित किया और फिर घायलों तक पहुंचने के लिए हर संभव प्रयास शुरू कर दिया।
इस बीच पुलिस मितान के सदस्य और आसपास के ग्रामीण भी मानवता का परिचय देते हुए बचाव अभियान में जुट गए। किसी ने टॉर्च की व्यवस्था की, किसी ने मशीनें पहुंचाने में मदद की तो कई ग्रामीण घायलों का हौसला बढ़ाते रहे। पूरा लोरो घाट मानो एक विशाल रेस्क्यू स्थल में बदल गया था, जहां हर व्यक्ति की एक ही कोशिश थी कि किसी भी कीमत पर ट्रक में फंसे लोगों की जान बचाई जाए।
रेस्क्यू अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण था। ट्रक का केबिन पूरी तरह दब चुका था और स्टेयरिंग तथा लोहे का ढांचा तीनों लोगों को जकड़े हुए था। ऐसे में अग्निशमन दल और पुलिस ने कटर मशीन की सहायता से ट्रक के केबिन और स्टेयरिंग के हिस्से को बेहद सावधानी से काटना शुरू किया। लगभग तीन घंटे तक लगातार चले इस कठिन अभियान के दौरान बचाव दल ने पूरी सतर्कता बरती ताकि घायलों को कोई अतिरिक्त चोट न पहुंचे। आखिरकार अथक प्रयासों के बाद चालक, वाहन मालिक और एक अन्य व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। जैसे ही तीनों घायलों को बाहर निकाला गया, वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली और पुलिस तथा रेस्क्यू टीम की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
रेस्क्यू पूरा होते ही एंबुलेंस के माध्यम से तीनों घायलों को तत्काल शासकीय अस्पताल, जशपुर भेजा गया। चिकित्सकों ने तुरंत उनका उपचार शुरू किया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार तीनों की हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है और उनका इलाज जारी है।
दुर्घटना की जानकारी मिलते ही डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह स्वयं लोरो घाट पहुंचे और पूरे रेस्क्यू अभियान की निगरानी की। उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों, जवानों, हाईवे पेट्रोलिंग, डॉयल-112, अग्निशमन दल, पुलिस मितान और सहयोग करने वाले स्थानीय नागरिकों की सराहना करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में सभी ने साहस, संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय क्षमता और उत्कृष्ट टीमवर्क का परिचय दिया। सभी के संयुक्त प्रयासों से तीन अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकीं, जो पूरे पुलिस विभाग और समाज के लिए गर्व की बात है।
डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने घोषणा की कि इस साहसिक रेस्क्यू अभियान में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों तथा अन्य रेस्क्यू टीम के सदस्यों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही दुर्घटना में फंसे लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्थानीय नागरिकों के नाम गुड सेमिरिटन (नेक नागरिक) योजना के अंतर्गत लाभ दिलाने के लिए प्रशासन को भेजे जाएंगे, ताकि समाज में मानवता और सहायता की भावना को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके।
उन्होंने आमजन से अपील करते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना होने पर घटनास्थल से दूर जाने या तमाशबीन बनने के बजाय तुरंत निकटतम थाना अथवा डॉयल-112 को सूचना दें। अपनी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए घायलों की हरसंभव सहायता करें। समय पर दी गई सूचना और आम नागरिकों का सहयोग कई बार किसी घायल व्यक्ति के लिए जीवनदान साबित होता है।
लोरो घाट में हुए इस भीषण हादसे के बाद जशपुर पुलिस, अग्निशमन दल, हाईवे पेट्रोलिंग, डॉयल-112, पुलिस मितान और स्थानीय नागरिकों द्वारा चलाया गया यह साहसिक रेस्क्यू अभियान पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि जब पुलिस और आम नागरिक मिलकर जिम्मेदारी निभाते हैं तो मौत के मुंह से भी जिंदगी को वापस लाया जा सकता है।
