भाषा बचेगी तो संस्कृति बचेगी —राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा के समक्ष मुंडा समाज ने उठाई मुंडारी भाषा संरक्षण की मांग, मुंडारी बहुल गांवों में शिक्षकों की नियुक्ति और जाति प्रमाण पत्र की त्रुटियां दूर करने का किया आग्रह
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भाषा बचेगी तो संस्कृति बचेगी —राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा के समक्ष मुंडा समाज ने उठाई मुंडारी भाषा संरक्षण की मांग, मुंडारी बहुल गांवों में शिक्षकों की नियुक्ति और जाति प्रमाण पत्र की त्रुटियां दूर करने का किया आग्रह

जशपुरनगर। कलेक्ट्रेट सभागार जशपुर में गुरुवार को डॉ. आशा लकड़ा, सदस्य, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग नई दिल्ली की अध्यक्षता में समाज प्रमुखों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के विभिन्न जनजातीय समाजों के प्रतिनिधियों से बारी-बारी से चर्चा कर उनकी प्रमुख समस्याओं, मांगों एवं समाधान के संबंध में सुझाव लिए गए। आयोग की सदस्य ने समाज प्रमुखों की बातों को गंभीरता से सुना और समस्याओं के निराकरण के लिए आवश्यक पहल का भरोसा दिलाया।

बैठक के दौरान  शंकर राम बरला, प्रदेश अध्यक्ष, मुंडा समाज छत्तीसगढ़ इकाई ने मुंडा समाज की ओर से विस्तृत आवेदन प्रस्तुत करते हुए समाज की दो प्रमुख समस्याओं को आयोग के समक्ष प्रमुखता से रखा। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में मुंडा समाज की जनसंख्या अपेक्षाकृत कम है तथा अधिकांश परिवार अन्य भाषा-भाषी क्षेत्रों में निवास करते हैं। इसके कारण समाज की मातृभाषा मुंडारी धीरे-धीरे विलुप्त होने की स्थिति में पहुंच रही है।

उन्होंने मांग की कि जिन गांवों में मुंडा समाज की अधिक आबादी है, वहां मुंडारी भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति की जाए, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, संस्कृति, परंपरा और विरासत से जुड़ी रहे। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की पहचान और सांस्कृतिक धरोहर भी है। यदि समय रहते संरक्षण के प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियां अपनी मूल बोली और सांस्कृतिक पहचान से दूर हो सकती हैं।

श्री बरला ने बैठक में एक अन्य गंभीर समस्या की ओर भी आयोग का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि मुंडा जनजाति के कई लोगों के जाति प्रमाण पत्र मिसल बंदोबस्त में हुई त्रुटियों के कारण आज तक नहीं बन पाए हैं। इस संबंध में समाज द्वारा वर्षों से शासन-प्रशासन के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक आवश्यक सुधार नहीं हो सका है। उन्होंने आयोग से उच्च स्तर पर हस्तक्षेप कर इस समस्या का स्थायी समाधान कराने का आग्रह किया, ताकि पात्र लोगों को अनुसूचित जनजाति वर्ग की सुविधाओं और अधिकारों का लाभ मिल सके।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने मुंडा समाज सहित अन्य समाजों द्वारा रखी गई मांगों और सुझावों को गंभीरता से सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी विषयों पर विधि सम्मत प्रक्रिया के तहत आवश्यक प्रयास किए जाएंगे तथा संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल की जाएगी।

बैठक में मुंडा समाज की ओर से प्रदेश संगठन मंत्री श्री किसुन बारला, प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री महेंद्र बरला तथा महिला शाखा की प्रतिनिधि श्रीमती रीना बरला भी उपस्थित रहीं। समाज के प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के स्तर पर पहल होने से मुंडारी भाषा के संरक्षण और वर्षों से लंबित जाति प्रमाण पत्र संबंधी समस्याओं के समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा।

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