सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की सुखद यात्रा : जिले के श्रद्धालुओं ने देखा भारत की आस्था, संस्कृति और स्वाभिमान का विराट स्वरूप, दिव्य दर्शन से अभिभूत होकर लौटे, बोले— जीवन की सबसे यादगार धार्मिक यात्रा
नारायणपुर । भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय स्वाभिमान और आध्यात्मिक विरासत के प्रतीक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत गुजरात की पावन यात्रा पर गए छत्तीसगढ़ जशपुर जिले के दर्जनों श्रद्धालु दिव्य और अविस्मरणीय अनुभवों के साथ सकुशल अपने गृह प्रदेश लौट आए। इस ऐतिहासिक धार्मिक यात्रा ने श्रद्धालुओं के मन में भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्रीय गौरव के प्रति नई ऊर्जा का संचार किया।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस विशेष यात्रा का उद्देश्य देशवासियों को भारत की प्राचीन आध्यात्मिक धरोहर, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्र की गौरवशाली परंपराओं से जोड़ना है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से हजारों श्रद्धालु गुजरात पहुंचे, जहां उन्होंने विश्वविख्यात सोमनाथ ज्योतिर्लिंग सहित अनेक पवित्र तीर्थों के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।
जशपुर जिले के जुरूडाँड़ सहित आसपास के क्षेत्रों से शामिल श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान सोमनाथ का विधिवत पूजा-अर्चना की। सभी श्रद्धालुओं ने प्रदेश की खुशहाली, किसानों की समृद्धि, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य, समाज में सुख-शांति तथा राष्ट्र की उन्नति के लिए विशेष प्रार्थना की।
यात्रा का शुभारंभ सोमनाथ की पावन धरा में भगवान श्रीराम के मंदिर के दर्शन से हुआ। इसके बाद श्रद्धालुओं ने पौराणिक महत्व से जुड़े बाणगंगा, त्रिवेणी संगम, गोलोक धाम और भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली भालका तीर्थ के दर्शन किए। प्रत्येक धार्मिक स्थल पर श्रद्धालुओं ने भारतीय संस्कृति की महानता और हजारों वर्षों पुरानी सनातन परंपरा का साक्षात अनुभव किया।
दोपहर भोजन के पश्चात सायंकाल लगभग चार बजे सभी श्रद्धालु भव्य एवं दिव्य सोमनाथ मंदिर पहुंचे। विशाल समुद्र तट पर स्थित भव्य मंदिर की अलौकिक छटा देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। मंदिर प्रशासन द्वारा अत्यंत सुव्यवस्थित, अनुशासित एवं गरिमामय वातावरण में सभी श्रद्धालुओं को दर्शन कराए गए।
सायंकाल सात बजे आयोजित भव्य लाइट एंड साउंड शो श्रद्धालुओं के लिए इस यात्रा का सबसे आकर्षक और भावनात्मक क्षण साबित हुआ। प्रकाश और ध्वनि के अद्भुत समन्वय से प्रस्तुत इस कार्यक्रम में सोमनाथ मंदिर के एक हजार वर्षों के संघर्ष, आक्रमणों, पुनर्निर्माण, सनातन आस्था की विजय और राष्ट्रीय स्वाभिमान की गौरवगाथा का अत्यंत प्रभावशाली चित्रण किया गया। इस प्रस्तुति ने सभी श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं और उनके हृदय में भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रति गहरा सम्मान उत्पन्न किया।
श्रद्धालु मनोज कुमार यादव ने कहा कि यह उनके जीवन की सबसे पवित्र और यादगार यात्रा रही। उन्होंने बताया कि आज सोमनाथ मंदिर जिस दिव्य और भव्य स्वरूप में विश्वभर के श्रद्धालुओं का स्वागत कर रहा है, वह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विशेष प्रयासों और दूरदर्शी सोच का परिणाम है। उन्होंने कहा कि एक हजार वर्षों तक असंख्य वीरों और सनातन धर्म के रक्षकों ने इस आस्था के केंद्र को जीवित रखने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। आज उसी गौरवशाली इतिहास का जीवंत स्वरूप देखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत श्रद्धालुओं के लिए किए गए सभी प्रबंध अत्यंत उत्कृष्ट और अनुकरणीय रहे।
श्रद्धालु राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि स्वाभिमान पर्व के आयोजन के बाद सोमनाथ का वातावरण पूरी तरह बदल चुका है। यहां धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिली है। आधुनिक सुविधाओं के साथ प्राचीन आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल दर्शन तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारतीय इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति को निकट से समझने का भी अवसर प्रदान किया।
श्रद्धालु त्रिलोचन यादव (भीतघरा) एवं श्रीमती मुक्ता यादव (भीतघरा) ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यात्रा में शामिल होना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य रहा। भगवान सोमनाथ सहित अनेक पवित्र तीर्थों के दर्शन कर आत्मिक शांति प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर जीवनभर स्मरणीय रहेगा। उन्होंने इस प्रेरणादायी पहल के लिए शासन एवं यात्रा से जुड़े सभी आयोजकों का आभार व्यक्त किया।
श्रद्धालुओं ने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ शासन द्वारा श्रद्धालुओं के लिए की गई उत्कृष्ट व्यवस्थाओं की भी सराहना की। यात्रा के दौरान आवास, भोजन, परिवहन, सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं तथा मार्गदर्शन की समुचित व्यवस्था होने से सभी यात्रियों ने पूरे समय स्वयं को सुरक्षित और सहज महसूस किया। उन्होंने कहा कि इतनी सुव्यवस्थित धार्मिक यात्रा पहले कभी देखने को नहीं मिली।
श्रद्धालुओं का कहना था कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक भ्रमण नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, राष्ट्रीय एकता और स्वाभिमान का जीवंत उत्सव थी। सोमनाथ की पवित्र भूमि पर पहुंचकर प्रत्येक श्रद्धालु ने भारत की हजारों वर्षों पुरानी गौरवशाली सभ्यता का प्रत्यक्ष अनुभव किया।
वापस घर लौटने के बाद श्रद्धालुओं के चेहरों पर संतोष, आत्मिक आनंद और गर्व स्पष्ट दिखाई दिया। सभी ने एक स्वर में कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व ने उन्हें अपनी संस्कृति, अपने धर्म और अपने राष्ट्र के गौरव से और अधिक गहराई से जोड़ दिया है। यह यात्रा उनके जीवन की अमूल्य आध्यात्मिक धरोहर बन गई है, जिसकी स्मृतियां सदैव उनके हृदय में जीवंत रहेंगी।
