टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने और प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना कर पुरानी पेंशन बहाली की मांग , छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में 29 अप्रैल को एक साथ गरजेगा शिक्षक आंदोलन
रायपुर // 25 अफ़्रैल 2026 -
छत्तीसगढ़ में एक बार फिर शिक्षकों की नाराजगी सड़कों पर उतरने की तैयारी में है। टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने और पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर अब आंदोलन ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। छत्तीसगढ़ टीएफआई के बैनर तले प्रदेश के सभी 33 जिला मुख्यालयों में 29 अप्रैल को शाम 4 बजे एक साथ ज्ञापन सौंपने का ऐलान किया गया है। इस बड़े फैसले पर मुहर संगठन की ऑनलाइन बैठक में लगी, जिसमें प्रदेशभर के प्रमुख शिक्षक नेताओं ने हिस्सा लिया।
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष केदार जैन, मनीष मिश्रा और छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने साफ कहा कि टीईटी की अनिवार्यता शिक्षकों के साथ अन्याय है और इसे खत्म करने के लिए देशभर में आवाज उठ रही है। कई राज्य सरकारें इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी हैं और मध्य प्रदेश सरकार ने भी हाल ही में इस संबंध में पहल की है, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार अब तक चुप्पी साधे हुए है, जिससे शिक्षकों में भारी नाराजगी है।
शिक्षक नेताओं ने बताया कि हाल ही में नई दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर के शिक्षकों ने एकजुट होकर बड़ा प्रदर्शन किया था। इस दौरान वरिष्ठ सांसद जगदंबिका पाल ने मंच से भरोसा दिलाया था कि किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और वे खुद इस विषय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाएंगे। इसके बावजूद अभी तक ठोस निर्णय नहीं होने से शिक्षक संगठन अब प्रदेश स्तर पर आंदोलन को तेज करने के मूड में हैं।
वहीं, पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा भी गरमाया हुआ है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के फैसले का हवाला देते हुए शिक्षक संगठनों ने कहा कि न्यायालय ने स्पष्ट रूप से प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना करते हुए पुरानी पेंशन बहाल करने का आदेश दिया है। इस मामले में पहले सिंगल बेंच और फिर डबल बेंच दोनों में शिक्षकों को राहत मिली है, बावजूद इसके शासन स्तर पर अब तक आदेश जारी नहीं किया गया है, जिससे शिक्षकों में आक्रोश बढ़ रहा है।
टीएफआई ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा है कि यदि सरकार जल्द निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। 29 अप्रैल को होने वाले ज्ञापन कार्यक्रम में सभी शिक्षक संगठन एकजुट होकर अपनी ताकत दिखाएंगे। जिला मुख्यालयों में बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल होंगे और प्रशासन के माध्यम से सरकार तक अपनी मांग पहुंचाएंगे।
इसके साथ ही शिक्षक प्रतिनिधिमंडल मंत्रालय और संचनालय स्तर पर भी राज्य के आला अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी मांगों को मजबूती से रखेगा। बैठक में केदार जैन, मनीष मिश्रा, रविंद्र राठौर, बसंत कौशिक, जाकेश साहू, कमलेश सिंह बिसेन, रामचंद्र सोनवंशी और गिरिजाशंकर शुक्ला सहित कई संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया।
