में बढ़ी जंगलों में आगजनी की घटनाएं, मधेस्वर पहाड़ और बादलखोल क्षेत्र में लगी आग पर वन विभाग व ग्रामीणों की मदद से पाया गया काबू
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में बढ़ी जंगलों में आगजनी की घटनाएं, मधेस्वर पहाड़ और बादलखोल क्षेत्र में लगी आग पर वन विभाग व ग्रामीणों की मदद से पाया गया काबू

नारायणपुर 15 अफ़्रैल 2026। गर्मी की शुरुआत के साथ ही जिले के जंगलों में आगजनी की घटनाओं ने फिर से चिंता बढ़ा दी है। असामाजिक तत्व अपने स्वार्थ के चलते महुआ बीनने, अवैध शिकार करने और शहद निकालने के लिए जंगलों में आग लगा रहे हैं। इस लापरवाही और लालच का खामियाजा न केवल हरे-भरे पेड़ों को भुगतना पड़ रहा है, बल्कि वन्य जीवों की जिंदगी पर भी सीधा खतरा मंडरा रहा है। जंगलों में लगने वाली यह आग कई जीव-जन्तुओं को जिंदा जला देती है, वहीं अनेक प्रजातियों का आशियाना पल भर में राख हो जाता है।

मधेस्वर पहाड़ के पास भड़की आग बुझाई गई

इसी कड़ी में कुनकुरी रेंज के नारायणपुर सर्किल अंतर्गत मधेस्वर पहाड़ के समीप जंगल में अचानक भीषण आग भड़क उठी। तेज हवाओं के कारण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास के क्षेत्रों में बड़े नुकसान की आशंका गहराने लगी। सूचना मिलते ही वन विभाग हरकत में आया। डीएफओ जशपुर के निर्देश और कुनकुरी रेंजर के मार्गदर्शन में नाकेदार, फायर सर्विस की टीम और स्थानीय ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे। आग इतनी भयावह थी कि उसे काबू में करने के लिए घंटों तक लगातार संघर्ष करना पड़ा। आखिरकार संयुक्त प्रयासों से आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया और एक बड़ी तबाही टल गई।

इस दौरान ग्रामीणों ने भी अद्भुत साहस और जिम्मेदारी का परिचय दिया। बिना किसी संसाधन के ही वे आग बुझाने में जुट गए और वन विभाग की टीम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। उनकी सक्रिय भागीदारी ने हालात को बिगड़ने से बचा लिया।

बादलखोल अभ्यारण्य में रात के अंधेरे में हुई आगजनी बुझाई गई

इधर बादलखोल अभ्यारण्य के नारायणपुर सर्किल अंतर्गत बरडांड़ और नारायणपुर बीट क्षेत्र में भी रात के अंधेरे में असामाजिक तत्वों ने आग लगा दी। अचानक भड़की आग से जंगल में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही अभ्यारण्य के सर्किल दरोगा, नाकेदार, फायर वाचर और ग्रामीण मौके पर पहुंचे और हालात को संभालने में जुट गए। कड़ी मशक्कत और घंटों की मेहनत के बाद आखिरकार आग पर काबू पा लिया गया।

बढ़ती घटनाओं ने खड़े किए सवाल--लगातार सामने आ रही आगजनी की घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक असामाजिक तत्व जंगलों को अपनी स्वार्थपूर्ति का साधन बनाते रहेंगे? यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में हालात और भी भयावह हो सकते हैं।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि जंगलों को बचाने के लिए अब और अधिक सतर्कता और सख्ती की जरूरत है। वन विभाग की त्वरित कार्रवाई और ग्रामीणों के सहयोग से फिलहाल कई जगहों पर बड़ी घटनाएं टल रही हैं, लेकिन यदि असामाजिक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में हालात और भयावह हो सकते हैं। जंगल हमारी अमूल्य धरोहर हैं और इन्हें बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। 

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