छत्तीसगढ़ में पारंपरिक उपचार पद्धति को मिल रही नई पहचान, 06 जिलों के 312 वैद्यों का हुआ प्रमाणीकरण; मार्च 2027 तक 1 हजार वैद्यों को प्रमाणित करने का लक्ष्य
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छत्तीसगढ़ में पारंपरिक उपचार पद्धति को मिल रही नई पहचान, 06 जिलों के 312 वैद्यों का हुआ प्रमाणीकरण; मार्च 2027 तक 1 हजार वैद्यों को प्रमाणित करने का लक्ष्य

रायपुर, 3 अक्टूबर 2026/छत्तीसगढ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड (छत्तीसगढ़ शासन, वन विभाग) द्वारा  25 सितंबर से 30 सितंबर तक छत्तीसगढ़ के 06 जिलों कोण्डागांव, नारायणपुर कांकेर, धमतरी, गरियाबंद और महासमुंद के 312 वैद्यों का प्रमाणीकरण किया गया। 

वन विभाग छत्तीसगढ़ शासन के अंतर्गत बोर्ड एवं काउन्सिल आफ इंडिया (QCI) से वैद्यों के प्रमाणीकरण करने के लिये अधिकृत संस्था सेंटर फॉर ट्रेड टेस्टिंग एंड सर्टिफिकेशन ऑफ स्किल्ड वर्कर्स (CTTC) द्वारा वैद्यों का प्रमाणीकरण किया गया । जिसमें 05 प्रकार की उपचार विधाओ सामान्य बीमारी, पीलिया, आर्थराइटिस, बोन सेटिंग एवं जहरीले बाइट का उपचार शामिल हैं। 

वैद्यों का प्रमाणीकरण प्रकिया दो चरणों के परीक्षण उपरांत किया जाता हैं।  परीक्षण प्रक्रिया अंतर्गत प्रथम दिवस आवेदन फार्म की जांच, वैद्यों के उपचार विधाओ का मौखिक परीक्षण, ताजी औषधि पौधों तथा कच्चे औषधि पौध उत्पाद की पहचान, औषधि निर्माण की विधि तथा  मरीजों को दी जाने वाली औषधि की मात्रा का परीक्षण किया जाता है । प्रमाणीकरण प्रक्रिया के दूसरे दिवस में वैद्यों के घरों पर जाकर उनके उपचार करने की सजीव परीक्षण तथा मरीजों से फीडबैक लिया जाता है । 

छत्तीसगढ़ में 25 से 30 सितंबर तक विभिन्न जिलों में आयोजित परीक्षणों में 312 वैद्यों को प्रमाणीकृत किया गया। इनमें कोंडागांव के 60, नारायणपुर के 23, कांकेर के 60, धमतरी के 135 तथा गरियाबंद एवं महासमुंद के कुल 34 वैद्य शामिल हैं। छत्तीसगढ़ शासन एवं बोर्ड मार्च 2027 तक 1 हजार वैद्यों के प्रमाणीकरण का लक्ष्य पूरा करने के लिए तेजी से कार्य कर रहे हैं।

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