दिवंगत आरक्षकों के परिवारों के लिए जशपुर पुलिस की संवेदनशील पहल, डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देश पर दो आश्रितों को मिली आरक्षक जीडी के पद पर अनुकंपा नियुक्ति
जशपुर। पुलिस विभाग केवल कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने दिवंगत अधिकारी-कर्मचारियों के परिवारों के सुख-दुख में भी साथ खड़ा है। इसी मानवीय पहल की मिसाल जशपुर पुलिस में देखने को मिली है। दिवंगत पुलिसकर्मियों के आश्रित परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति दिलाने की विभागीय प्रक्रिया को प्राथमिकता से पूरा करते हुए स्वर्गीय आरक्षक जगलाल राम की पत्नी श्रीमती प्रियंका भगत तथा स्वर्गीय आरक्षक बलपंथ राम के पुत्र टीकेश रवि को आरक्षक जीडी के पद पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की गई है।
डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह की संवेदनशील पहल और निर्देश के बाद दोनों मामलों में विभागीय प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया गया। पुलिस विभाग ने दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार अनुकंपा नियुक्ति की कार्रवाई पूरी की, जिससे दोनों परिवारों को आर्थिक एवं सामाजिक संबल मिलने का रास्ता खुला है।
बताया गया कि स्वर्गीय आरक्षक जगलाल राम, आरक्षक क्रमांक 302, की पुलिस विभाग में भर्ती 25 अक्टूबर 2009 को हुई थी। उनके निधन के बाद परिवार के हित और भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनकी पत्नी श्रीमती प्रियंका भगत को आरक्षक जीडी के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी गई है। इसी तरह स्वर्गीय आरक्षक बलपंथ राम, आरक्षक क्रमांक 441, की पुलिस विभाग में भर्ती 4 अप्रैल 2007 को हुई थी। उनके निधन के पश्चात उनके पुत्र टीकेश रवि को आरक्षक जीडी के पद पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की गई है।
अनुकंपा नियुक्ति मिलने से दोनों परिवारों को न केवल आर्थिक सहारा मिला है, बल्कि परिवार के सदस्य को पुलिस विभाग से जुड़े रहने का अवसर भी मिला है। विभाग की ओर से नव-नियुक्त आरक्षकों को आगे की जिम्मेदारियों के निर्वहन में हरसंभव सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया है।
डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि पुलिस विभाग के प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी और उनके परिजन एक परिवार की तरह हैं। विभाग के किसी सदस्य के असमय निधन से उसके परिवार पर आने वाली कठिन परिस्थितियों में पूरा पुलिस परिवार उनके साथ खड़ा है। अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य आश्रित परिवार को आर्थिक एवं सामाजिक संबल प्रदान करना तथा उन्हें आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने नव-नियुक्त आरक्षकों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
