बादलखोल अभ्यारण्य में फिर उजागर हुई लकड़ी तस्करी की कहानी! रात में ट्रैक्टर से पहुंची साल की इमारती लकड़ी, 22 चौखट और 4 चिरान पटरा जब्त, ट्रैक्टर फरार होने और रेंजर को सूचना नहीं देने पर उठे कई बड़े सवाल
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बादलखोल अभ्यारण्य में फिर उजागर हुई लकड़ी तस्करी की कहानी! रात में ट्रैक्टर से पहुंची साल की इमारती लकड़ी, 22 चौखट और 4 चिरान पटरा जब्त, ट्रैक्टर फरार होने और रेंजर को सूचना नहीं देने पर उठे कई बड़े सवाल

नारायणपुर। जिले के एकमात्र बादलखोल अभ्यारण्य में साल के पेड़ों की अवैध कटाई और इमारती लकड़ी की तस्करी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक बार फिर वन विभाग की कार्रवाई में साल की बहुमूल्य इमारती लकड़ी की बड़ी खेप बरामद हुई है। साहीडांड़ क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई में 22 नग चौखट और 4 चिरान पटरा जब्त किए गए हैं। बरामद लकड़ी की बाजार कीमत हजारों रुपये बताई जा रही है। हालांकि, कार्रवाई के दौरान लकड़ी से भरा बताया जा रहा ट्रैक्टर मौके से फरार हो गया, जिसके बाद पूरी कार्रवाई और विभागीय सूचना तंत्र को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

वन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक साहीडांड़ के डिप्टी रेंजर और नाकेदार को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक ट्रैक्टर में साल की अवैध इमारती लकड़ी परिवहन की जा रही है। सूचना मिलते ही दोनों कर्मचारी सड़क पर निगरानी और सर्चिंग के लिए निकले। ट्रैक्टर को पकड़ने के लिए इंतजार किया गया, लेकिन काफी तलाश के बाद भी ट्रैक्टर हाथ नहीं आया। बाद में धान मंडी परिसर के अंदर इमारती लकड़ी पड़ी मिली। इसके बाद लकड़ी को वन विभाग के कैंपस में लाकर जब्त कर लिया गया।

लेकिन कार्रवाई के बाद अब सवाल लकड़ी मिलने से ज्यादा इस बात को लेकर उठ रहे हैं कि जब विभागीय कर्मचारियों को पहले से ट्रैक्टर में अवैध लकड़ी परिवहन की सूचना थी, तो आखिर ट्रैक्टर धान मंडी परिसर तक कैसे पहुंच गया और लकड़ी उतारकर फरार भी कैसे हो गया?

सूचना मिली, गस्त हुई, फिर भी ट्रैक्टर कैसे भाग गया?

डिप्टी रेंजर के अनुसार मुखबिर की सूचना पर वे और नाकेदार गश्त में निकले थे और ट्रैक्टर के आने का इंतजार कर रहे थे। बताया गया कि ट्रैक्टर धान मंडी में लकड़ी डंप कर फरार हो गया। ऐसे में स्थानीय स्तर पर यह सवाल चर्चा में है कि रात के समय ट्रैक्टर धान मंडी परिसर में पहुंचा, वहां लकड़ी उतारी और फिर वापस निकल गया, लेकिन सर्चिंग कर रहे कर्मचारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हो सकी।

सुनसान रात में भारी ट्रैक्टर की आवाज काफी दूर तक सुनाई देने की बात कही जाती है। ऐसे में ट्रैक्टर के परिसर में पहुंचने और लकड़ी उतारने के दौरान विभागीय अमले को भनक नहीं लगना कई सवाल खड़े करता है। हालांकि, घटना की वास्तविक परिस्थितियां जांच के बाद ही स्पष्ट होंगी।

सबसे बड़ा सवाल—रेंजर को तत्काल सूचना क्यों नहीं?

इस मामले में सबसे गंभीर सवाल अभ्यारण्य के गेम रेंजर को सूचना देने को लेकर उठ रहा है। बताया जा रहा है कि डिप्टी रेंजर और नाकेदार को मुखबिर से ट्रैक्टर में अवैध लकड़ी परिवहन की सूचना पहले ही मिल गई थी, लेकिन गेम रेंजर को तत्काल इसकी जानकारी नहीं दी गई। गेम रेन्जर के अनुसार सुबह करीब साढ़े 9 बजे घटना की सूचना किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से मिली कि रात में साहीडांड़ सर्किल में इमारती लकड़ी पकड़ी गई है।

यही बात अब चर्चा का विषय बनी हुई है कि जब कार्रवाई वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा की जा रही थी तो उसी समय संबंधित रेंजर को सूचना क्यों नहीं दी गई? यदि रेंजर को समय रहते सूचना मिलती तो अतिरिक्त वन अमले के साथ संयुक्त रूप से क्षेत्र की घेराबंदी की जा सकती थी। ऐसे में ट्रैक्टर और लकड़ी परिवहन में शामिल लोगों तक पहुंचने की संभावना  आसान हो सकती थी। सूचना नही देने रेन्जर ने नाकेदार ओर दरोगा को जमकर फटकार लगाई।

हालांकि, रेंजर को सूचना क्यों नहीं दी गई, इसमें किसी प्रकार की लापरवाही थी या कोई अन्य कारण, इसकी पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।

ट्रैक्टर में ज्यादा लकड़ी थी तो बाकी माल कहां गया?

मामले को लेकर एक और सवाल स्थानीय स्तर पर उठ रहा है। सूत्रों के हवाले से चर्चा है कि ट्रैक्टर में जब्त लकड़ी से अधिक मात्रा में माल होने की बात सामने आ रही है। यदि ऐसा था तो अतिरिक्त लकड़ी कहां गई? क्या ट्रैक्टर से पूरा माल उतारा गया या कुछ लकड़ी रास्ते में कहीं और उतारी गई? इन सवालों का जवाब फिलहाल सामने नहीं आया है।

वन विभाग की जांच में यदि परिवहन की पूरी कड़ी सामने आती है तो यह स्पष्ट हो सकता है कि लकड़ी कहां से लाई गई थी, किस स्थान पर काटी गई थी और इसे कहां ले जाने की तैयारी थी।

13 महीने पुरानी घटना भी अभी सवालों में

बादलखोल अभ्यारण्य में अवैध कटाई का मामला नया नहीं है। करीब 13 महीने पहले 12-13 अगस्त की रात अभ्यारण्य क्षेत्र में साल के बड़े-बड़े पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया था। स्थानीय जानकारी के अनुसार करीब 12  बड़े साल  के पेड़ों को इलेक्ट्रॉनिक आरा मशीन से काटा गया था। काटे गए पेड़ों की अनुमानित कीमत दो लाख रुपये से अधिक बताई गई थी।

उस मामले में भी लंबे समय बाद तक आरोपियों की गिरफ्तारी नही हुई है और न ही अब तक जिम्मेदारों पर कोई कार्यवाही हुई है जिसको लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में अब नई घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर अभ्यारण्य क्षेत्र में लगातार अवैध कटाई और लकड़ी परिवहन पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग पा रही है।

कर्मचारियों की ड्यूटी और मुख्यालय को लेकर भी उठ रहे सवाल

स्थानीय स्तर पर कुछ वन कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ कर्मचारी अपने निर्धारित मुख्यालय में नियमित रूप से नहीं रहते और घर से आवागमन कर ड्यूटी करते हैं। वहीं कुछ कर्मचारियों के स्थानांतरण के बाद भी उनकी ड्यूटी और कार्यस्थल को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।यदि ऐसे आरोपों में तथ्य हैं तो विभाग के उच्च अधिकारियों के लिए कर्मचारियों की उपस्थिति, बीटवार गश्त और मुख्यालय व्यवस्था की जांच करना जरूरी होना चाहिए। मुख्यालय में नही रहने वाले कर्मचारियों पर कार्यवाही होनी चाहिए।

अब जांच पर टिकी नजर

साल की 22 चौखट और 4 चिरान पटरा की जब्ती के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वन विभाग फरार ट्रैक्टर और लकड़ी तस्करी से जुड़े लोगों तक पहुंच पाएगा? साथ ही क्या इस पूरे मामले में यह भी पता लगाया जाएगा कि लकड़ी वास्तव में किस क्षेत्र से काटी गई थी और परिवहन के पीछे कौन लोग शामिल थे?

बादलखोल अभ्यारण्य की वन संपदा की सुरक्षा को लेकर यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले भी अवैध कटाई के मामले सामने आते रहे हैं। अब लोगों की नजर विभाग की आगामी कार्रवाई पर है। यदि जांच निष्पक्ष और विस्तृत तरीके से होती है तो लकड़ी के स्रोत से लेकर परिवहन और मौके तक पहुंचने वाली पूरी कड़ी सामने आ सकती है। वहीं यदि जांच केवल जब्त लकड़ी तक सीमित रह गई तो ट्रैक्टर और कथित तस्करों के फरार होने का सवाल सिर्फ सवाल ही रह जाएगा।

मुझे सूचना किसी अन्य लोगों से मिली मैं मौके पर गया साहीडाँड़ में इमारती लकड़ी बरामद हुई है। ट्रेक्टर का पता लगाया जा रहा है। पता लगने पर दोषियों के ऊपर वन अधिनियम के तहत कार्यवाही की जाएगी।

श्री सिद्धार्थ भारती -गेम रेन्जर - बादलखोल अभ्यारण्य नारायणपुर

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