गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से गूंजा नारायणपुर, सरस्वती शिशु मंदिर में श्रद्धा और उत्साह के साथ श्रीगणेश प्रतिमा का विसर्जन
नारायणपुर। सरस्वती शिशु मंदिर नारायणपुर में गणेश चतुर्थी के अवसर पर विधि-विधान एवं भक्तिभाव के साथ स्थापित किए गए भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा का पंचम दिवस के पश्चात गुरुवार को पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ विसर्जन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिवार के भैया-बहनों सहित आचार्य एवं दीदीजी ने भक्तिभाव से भगवान श्रीगणेश की पूजा-अर्चना कर नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और विद्यालय परिवार की सहभागिता रही, जिससे पूरा वातावरण गणपति भक्ति से सराबोर नजर आया।
शोभायात्रा के दौरान भगवान श्रीगणेश के भजनों और जयकारों से नगर का वातावरण भक्तिमय हो उठा। भैया-बहनों ने उत्साहपूर्वक ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष के साथ भगवान श्रीगणेश के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। शोभायात्रा जिस मार्ग से गुजरी, वहां लोगों की नजरें आकर्षित हुईं और श्रद्धालुओं ने भी भगवान श्रीगणेश के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। भक्ति गीतों और जयकारों के बीच निकली शोभायात्रा ने नगर में आध्यात्मिक एवं उल्लासपूर्ण वातावरण निर्मित कर दिया।
गणेश विसर्जन से पूर्व विद्यार्थियों एवं विद्यालय परिवार द्वारा भगवान श्रीगणेश की आराधना कर सुख, शांति, समृद्धि एवं सर्वमंगल की कामना की गई। पूरे आयोजन में बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। पारंपरिक धार्मिक वातावरण में बच्चों ने भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा से जुड़े संस्कारों को करीब से समझा और धार्मिक आयोजनों के प्रति अपनी आस्था एवं रुचि प्रदर्शित की।
सरस्वती शिशु मंदिर द्वारा गणेशोत्सव के माध्यम से बच्चों को शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, संस्कार और परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया गया। विद्यालय परिवार का मानना है कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की जानकारी एवं उनके महत्व से अवगत कराना आवश्यक है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों में श्रद्धा, अनुशासन, सामूहिक सहभागिता तथा अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान की भावना विकसित होती है।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री त्रिविक्रम यादव ने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों में संस्कार, संस्कृति और अपनी परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना भी आवश्यक है। पढ़ाई के साथ भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपराओं को जीवित रखने और उन्हें आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि बचपन से ही बच्चों को धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने से उनमें अपनी परंपराओं के प्रति रुचि और सम्मान विकसित होता है तथा वे आगे चलकर इन परंपराओं को आगे बढ़ाने में सहभागी बनते हैं।
गणेश प्रतिमा विसर्जन के साथ ही विद्यालय में आयोजित गणेशोत्सव का समापन हुआ। श्रद्धा, भक्ति और उल्लास से परिपूर्ण इस आयोजन ने एक बार फिर भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपराओं की जीवंतता का संदेश दिया। विद्यालय परिवार ने भगवान श्रीगणेश से सभी के जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना करते हुए भक्तिभाव से विदाई दी।
