अघोर पीठ पड़ाव आश्रम में भक्तिमय वातावरण में मनाई गई अघोरेश्वर भगवान राम जी की 90वीं जयंती, पूज्य बाबा गुरुपद संभव राम ने दिया इंद्रियों की पराधीनता छोड़ विवेक और मानवता के मार्ग पर चलने का संदेश
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अघोर पीठ पड़ाव आश्रम में भक्तिमय वातावरण में मनाई गई अघोरेश्वर भगवान राम जी की 90वीं जयंती, पूज्य बाबा गुरुपद संभव राम ने दिया इंद्रियों की पराधीनता छोड़ विवेक और मानवता के मार्ग पर चलने का संदेश

लोलार्क षष्ठी पर्व के साथ शुरू हुआ दो दिवसीय जन्मोत्सव, देशभर से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालु; ‘अघोरेश्वर कथा’ के अंग्रेजी अनुवाद का हुआ लोकार्पण

पड़ाव/वाराणसी, 18 सितंबर 2026। परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी की 90वीं जयंती शुक्रवार को अघोर पीठ, श्री सर्वेश्वरी समूह संस्थान देवस्थानम्, अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम, पड़ाव, वाराणसी में भक्तिमय एवं आध्यात्मिक वातावरण में मनाई गई। श्री सर्वेश्वरी समूह के अध्यक्ष पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी के सान्निध्य में आयोजित जयंती समारोह में देशभर से पहुंचे सैकड़ों सदस्यों एवं शिष्यगण ने दर्शन-पूजन कर अपनी श्रद्धा निवेदित की।

दो दिवसीय जन्मोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ 17 सितंबर से परमपूज्य अघोराचार्य महाराजश्री बाबा कीनाराम जी के 426वें जन्म षष्ठी पर्व (लोलार्क षष्ठी) के साथ हुआ। जयंती समारोह के दौरान आश्रम परिसर में विभिन्न धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक एवं सेवा गतिविधियां आयोजित की गईं।

इंद्रियों की पराधीनता छोड़ विवेक के मार्ग पर चलने का आह्वान

जयंती के अवसर पर आश्रम के मुख्य सभागार में आयोजित विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने कहा कि समाज में बढ़ती कटुता, विभाजन, स्वार्थ और अशांति का मूल कारण केवल बाहरी परिस्थितियां नहीं हैं, बल्कि मनुष्य की अपनी कमजोरियां, इंद्रियों की पराधीनता और विवेक का क्षीण होना भी इसके प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि महापुरुषों की वाणी, विचार और जीवन-दृष्टि के रूप में समाज के सामने पर्याप्त मार्गदर्शन उपलब्ध है, लेकिन आवश्यकता इस बात की है कि उनके बताए मार्ग को अपने आचरण में उतारा जाए।

उन्होंने कहा कि सूर्य, चंद्रमा, वायु और पंचतत्व किसी जाति, धर्म, भाषा अथवा देश के आधार पर भेदभाव नहीं करते। प्रत्येक मनुष्य का शरीर उन्हीं पंचतत्वों से निर्मित है और सभी के भीतर एक ही परम तत्व विद्यमान है। ऐसे में जाति, धर्म, मजहब, भाषा और क्षेत्र के आधार पर मनुष्यों के बीच विभाजन तथा घृणा की भावना मानवता की मूल भावना के विपरीत है।

पूज्य बाबा ने कहा कि समाज और राष्ट्र में बढ़ते संघर्ष, स्वार्थ, लोभ, अहंकार तथा भ्रष्ट आचरण से बचने के लिए सबसे पहले व्यक्ति को स्वयं के भीतर सुधार लाने की आवश्यकता है। ‘पराधीन सपनेहूँ सुख नाहीं’ का अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य जब अपनी इंद्रियों का दास बन जाता है, तब लोभ, क्रोध, अहंकार और अन्य विकृतियां उसके जीवन में दुख एवं अशांति को जन्म देती हैं।

उन्होंने कहा कि महापुरुषों की शिक्षाओं को केवल सुनना पर्याप्त नहीं है। उनका अध्ययन, चिंतन और जीवन में पालन करना आवश्यक है। श्री सर्वेश्वरी समूह से जुड़े लोगों का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि सभी स्वार्थपूर्ण विवादों एवं विभाजनकारी प्रवृत्तियों से दूर रहकर राष्ट्र, समाज, संस्कृति और मानवता के हित में कार्य करें। उन्होंने बुद्धि, विवेक, आत्मसुधार और मानवता के अनुरूप आचरण करने का संदेश देते हुए कहा कि व्यक्ति का आत्मसुधार ही समाज के व्यापक कल्याण में योगदान का आधार बन सकता है।

‘अघोरेश्वर कथा’ के अंग्रेजी अनुवाद का लोकार्पण

विचार गोष्ठी की शुरुआत में पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने परमपूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु द्वारा रचित पुस्तक ‘अघोरेश्वर कथा’ के अंग्रेजी अनुवाद का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं एवं सदस्यों ने इसे अघोरेश्वर महाप्रभु के विचारों और जीवन-दृष्टि को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

गोष्ठी की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के पूर्व अपर निदेशक एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. वी.पी. सिंह ने की। इस अवसर पर डॉ. प्रदीप सिंह, पूर्व निदेशक, केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान, धनबाद, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रतापगढ़ श्रीकांत मिश्र, श्री धनंजय राव, श्री मनोज सिंह एवं श्री शशि गुप्ता ने भी अपने विचार रखे। मंगलाचरण कु. राशि ने किया, जबकि श्रीमती प्रीतिमा सिंह ने भजन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. वामदेव पाण्डेय ने किया। अंत में श्री सर्वेश्वरी समूह के उपाध्यक्ष श्री सुरेश सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

प्रभातफेरी से लेकर हवन-पूजन तक हुए धार्मिक आयोजन

जयंती अवसर पर प्रातःकाल आश्रम परिसर में सफाई एवं श्रमदान के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। सुबह 5:50 बजे श्रद्धालुओं ने प्रभातफेरी निकाली, जो पड़ाव आश्रम से अघोरेश्वर महाविभूति स्थल होते हुए अघोरेश्वर भगवान राम घाट और गंगातट तक पहुंची। गंगातट पर श्रद्धालुओं ने अघोरेश्वर महाप्रभु की समाधि के दर्शन-पूजन किए और गंगाजलयुक्त कलश लेकर आश्रम वापस लौटे।

सुबह 8 बजे पूज्यपाद बाबा गुरुपद संभव राम जी ने आश्रम के गणेश पीठ स्थित परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी के चिरकालिक आसन का विधिवत पूजन किया। इसके बाद श्री पृथ्वीपाल जी ने ‘सफलयोनि’ का पाठ किया। तत्पश्चात पूज्य बाबा ने आश्रम के उपासना स्थल चिरकुट देवी विहार में हवन एवं पूजन किया। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया।

आश्रम के देवी विहार में 17 सितंबर से प्रारंभ अखंड संकीर्तन ‘अघोरान्ना परो मन्त्रः नास्ति तत्वं गुरोः परम्’ का समापन भी पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी द्वारा आरती एवं पूजन के साथ हुआ।

रोगियों के बीच सेवा सामग्री का वितरण

जयंती के अवसर पर श्री सर्वेश्वरी समूह संस्थान देवस्थानम्, पड़ाव की ओर से सेवा कार्य भी किया गया। श्री शिव प्रसाद गुप्त मंडलीय चिकित्सालय के विभिन्न वार्डों में भर्ती लगभग 250 रोगियों के बीच भुना चना, फल, बिस्कुट एवं फलों का जूस आदि वितरित किया गया।

सेवा कार्यक्रम में चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक श्री ब्रिजेश कुमार एवं डेंटिस्ट डॉ. पुष्प सिंह का सहयोग प्राप्त हुआ। आश्रम की ओर से श्री सर्वेश्वरी समूह के संयुक्त मंत्री श्री अरविन्द कुमार सिंह, प्रचार मंत्री श्री पारस नाथ यादव, कोषाध्यक्ष श्री चंद्रविक्रम शाह, अघोर परिषद ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री नागेश सिंह एवं श्री धर्मेन्द्र गौतम सहित अन्य स्वयंसेवकों ने सहभागिता की।

जयंती समारोह के दौरान आश्रम परिसर में पूरे दिन आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना, संकीर्तन एवं सेवा गतिविधियों में सहभागिता कर अघोरेश्वर भगवान राम जी के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। समारोह के माध्यम से आत्मसुधार, विवेक, मानवता, सामाजिक सद्भाव और सेवा की भावना को जीवन में अपनाने का संदेश दिया गया।

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