बच्चों को ‘करके सीखने’ से लेकर जीवनोपयोगी कौशल तक, जशपुर के दो शिक्षकों ने नवाचार से बनाई अलग पहचान, राज्यपाल पुरस्कार के लिए हुआ चयन
जशपुर। शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य और नवाचार करने वाले जशपुर जिले के दो शिक्षकों का चयन प्रतिष्ठित राज्यपाल पुरस्कार के लिए हुआ है। इस सूची में प्राथमिक विद्यालय डीपाटोली (कुनकुरी) के प्रधान पाठक लव कुमार गुप्ता और पूर्व माध्यमिक विद्यालय मनोरा की शिक्षक मंजुला झा का नाम शामिल है। दोनों शिक्षकों के इस चयन से जिले के शिक्षा जगत में हर्ष का माहौल है।
*लव कुमार गुप्ता ने नवाचार और लगन से बदली स्कूलों की तस्वीर*
प्रधान पाठक लव कुमार गुप्ता ने अपने शिक्षण कौशल और नवाचारी गतिविधियों के माध्यम से न केवल वर्तमान विद्यालय बल्कि पूर्व में पदस्थ विद्यालयों का भी कायाकल्प किया है।
*रंगापाठ में अभूतपूर्व योगदान:* बगीचा विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय रंगापाठ में अपनी सेवा के दौरान उन्होंने विशेष पिछड़ी जनजाति के 120 से अधिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ा। उन्होंने स्कूल में दर्ज संख्या बढ़ाने, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार करने और उसे एक 'आदर्श प्राथमिक विद्यालय' के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
*डिजिटल और व्यावहारिक शिक्षा:* बच्चों के लिए डिजिटल उपकरणों का उपयोग और 'करके सीखने' (Learning by Doing) के सिद्धांत पर समृद्ध वातावरण तैयार किया। विद्यालय में डिजिटल उपकरणों का बहुतायत उपयोग एवं पोषण एवं पुष्प वाटिका को सीखने के सामग्री के रूप में उपयोग।
*प्रिंट समृद्ध वातावरण व वाटिका निर्माण:* विद्यालय की दीवारों को शिक्षाप्रद बनाकर (प्रिंट समृद्ध वातावरण) बच्चों के सीखने का दायरा बढ़ाया। साथ ही परिसर में पुष्प वाटिका और किचन गार्डन का निर्माण कराया।
*नवाचार एवं गतिविधि आधारित शिक्षण:*- नवाचारी गतिविधि से शिक्षण कार्य करने हेतु विभिन्न मंचों पर पुरस्कृत किया जा चुका है। उनके द्वारा की गई गतिविधियों को यूट्यूब चैनल संकल्प से समृद्धि में अपलोड किया जाता है ताकि प्रदेश भर के शिक्षक देखकर सीख सकें।
*हरित विद्यालय:-* जिस भी विद्यालय में उनकी पदस्थापना हुई है वहां उन्होंने परिसर में वृक्षारोपण अभियान के तहत अनेकों पौधों का रोपण कर उनकी सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
*डीपाटोली में नए आयाम:* वर्तमान पदस्थापना स्थल डीपाटोली में उनकी पदस्थापना दिसंबर 2022 में हुई थी, उस समय विद्यालय की स्थिति उतनी अच्छी नहीं थी,और दर्ज संख्या भी बहुत कम थी, उनकी पदस्थापना विद्यालय के लिए मील का पत्थर साबित हुई, उन्होंने विद्यालय के विकास हेतु योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर विद्यालय को नया आयाम तक पहुंचाया है। विद्यालय के भौतिक एवं संसाधनों के विकास हेतु वेतन का कुछ हिस्सा अंशदान के रूप में लगाकर सीखने हेतु समृद्ध वातावरण निर्माण, छात्र संख्या में वृद्धि, नैतिक शिक्षा, डिजिटल सामग्री के माध्यम से शिक्षा,योग व प्राणायाम सत्रों का संचालन शुरू किया है। इसके अलावा समाजसेवियों को विद्यालय से जोड़कर स्कूल के समग्र विकास को एक नई दिशा दी है। यही कारण है कि जिले भर के शिक्षक इस विद्यालय के कार्य से प्रेरित हो रहे हैं।
*मंजुला झा: मित्रवत व्यवहार, अनुशासन और समर्पण से बच्चों के जीवन को दी नई दिशा*
इसी प्रकार मनोरा विकासखंड के पूर्व माध्यमिक विद्यालय मनोरा में पदस्थ शिक्षक मंजुला झा ने भी अपने नवाचारी शिक्षण और समर्पित कार्यशैली से एक विशिष्ट पहचान बनाई है।
*नवाचारी शिक्षण और जीवनोपयोगी कौशल:* वे शिक्षण कार्य में नए-नए प्रयोगों के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई को रोचक बनाती हैं। बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ अन्य सह-शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ना और उन्हें जीवनोपयोगी व्यावहारिक कार्यों के प्रति आकृष्ट करना उनकी कार्यशैली का प्रमुख हिस्सा है।
*बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार:* उनकी सबसे बड़ी विशेषता बच्चों के प्रति उनका मित्रवत और सहज व्यवहार है। इसके कारण बच्चे बिना किसी झिझक के अपनी बात, समस्याएं और विचार उनके सामने रख पाते हैं।
*पालकों से मधुर संबंध:* विद्यालय के साथ-साथ वे अभिभावकों (पालकों) से भी निरंतर जीवंत और मधुर संबंध बनाए रखती हैं, जिससे बच्चों के सर्वांगीण विकास में पालकों का सहयोग भी सुनिश्चित होता है।
*समयबद्धता और अनुशासन:* समय का सख्त अनुपालन, अनुशासित दिनचर्या, तथा विद्यालय और विद्यार्थियों के प्रति पूर्ण समर्पण उनकी पहचान है।
जिले के अधिकारियों, शिक्षक समुदाय और स्थानीय ग्रामीणों ने दोनों चयनित शिक्षकों को इस गरिमामय उपलब्धि के लिए बधाई व शुभकामनाएं दी हैं।
