'जय जगन्नाथ' के जयघोष के बीच दोकडा में बहुड़ा रथयात्रा सम्पन्न: गजपति के रूप में मुख्यमंत्री की पुत्री स्मृति साय और भाई विनोद साय ने निभाई शाही परंपरा, आज श्रद्धालुओं को होगा दिव्य सोना भेष का दर्शन
1942 से चली आ रही दोकड़ा की ऐतिहासिक परंपरा में उमड़ा जनसैलाब: बहुड़ा रथयात्रा के साथ श्री मंदिर लौटे महाप्रभु, आज रात होगा स्वर्णाभूषणों से सजा भव्य सुना वेश

दोकड़ा । जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड स्थित ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर दोकड़ा में शुक्रवार को भगवान श्री जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा की पावन बहुड़ा रथयात्रा श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के वातावरण में संपन्न हुई। नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में भक्तों को दर्शन देने के बाद महाप्रभु भव्य रथ पर सवार होकर पुनः श्री मंदिर की ओर लौटे। पूरे दोकड़ा क्षेत्र में "जय जगन्नाथ" के जयघोष, हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन और वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ भगवान के रथ की रस्सी खींचकर स्वयं को धन्य माना। छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पड़ोसी राज्य ओडिशा और झारखंड से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दोकड़ा पहुंचे और भगवान श्री जगन्नाथ के दर्शन कर परिवार एवं क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
इस वर्ष बहुड़ा रथयात्रा का सबसे विशेष आकर्षण मंदिर के गजपति महाराजा की परंपरा का निर्वहन रहा। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पुत्री स्मृति साय तथा उनके भाई विनोद साय ने गजपति के रूप में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार भगवान श्री जगन्नाथ की विधिवत पूजा-अर्चना की। दोनों ने प्रदेशवासियों की खुशहाली, शांति, समृद्धि और जनकल्याण की मंगलकामना करते हुए पूजा संपन्न कर रथयात्रा का शुभारंभ कराया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भी इस ऐतिहासिक परंपरा का साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त किया।
बहुड़ा यात्रा के साथ भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा श्री मंदिर परिसर तो पहुंच गए हैं, लेकिन परंपरा के अनुसार अभी वे तीन दिनों तक रथ पर ही विराजमान रहेंगे। इस अवधि में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होंगे।
मंदिर समिति के अनुसार शनिवार शाम 8 बजे भगवान का भव्य "सुना वेश" (सोना वेश) आयोजित किया जाएगा। इस विशेष अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को स्वर्णाभूषणों से अलंकृत किया जाएगा। स्वर्ण श्रृंगार में भगवान के दिव्य दर्शन के लिए दूर-दराज़ से श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। हर वर्ष की तरह इस बार भी सुना वेश श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
इसके बाद रविवार को अधर पाना की प्राचीन परंपरा निभाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अनुष्ठान में विशेष पात्रों में तैयार किए गए पवित्र पेय का भगवान को अर्पण किया जाता है। वहीं सोमवार को नीलाद्री विजय के साथ भगवान श्री जगन्नाथ पुनः श्री मंदिर के गर्भगृह में विराजमान होंगे और रथयात्रा महोत्सव का विधिवत समापन होगा।
नीलाद्री विजय की सबसे भावनात्मक और लोकप्रिय परंपरा माता लक्ष्मी को रसगुल्ला अर्पित कर उन्हें मनाने की है। मान्यता है कि भगवान श्री जगन्नाथ बिना बताए अपनी बहन और भाई के साथ रथयात्रा पर निकल जाते हैं, जिससे माता लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं। भगवान वापस लौटने पर उन्हें रसगुल्ला भेंट कर उनका मान-मनौव्वल करते हैं। यह अनूठी धार्मिक परंपरा श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था और आकर्षण का विषय बनी रहती है।
गौरतलब है कि दोकड़ा की ऐतिहासिक रथयात्रा वर्ष 1942 से लगातार आयोजित की जा रही है। समय के साथ यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विरासत और क्षेत्रीय एकता का प्रतीक बन चुका है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी इस ऐतिहासिक परंपरा को और अधिक भव्य बनाती है। इस बार भी बहुड़ा रथयात्रा श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के बीच संपन्न हुई तथा अब श्रद्धालुओं की निगाहें शनिवार शाम होने वाले दिव्य सुना वेश पर टिकी हुई हैं।
