सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़े में बड़ा खुलासा, SIMS पुलिस चौकी के दो पुलिसकर्मी गिरफ्तार, मृतकों की गोपनीय जानकारी गिरोह तक पहुंचाने का आरोप, रिमांड में होंगे कई चौंकाने वाले खुलासे!
बिलासपुर। सर्पदंश से जुड़ी कथित फर्जी मुआवजा दिलाने की साजिश के मामले में बिलासपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सिम्स (SIMS) पुलिस चौकी में घटना के दौरान एवं उसके बाद पदस्थ रहे दो पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि दोनों पुलिसकर्मी मृतकों से संबंधित गोपनीय जानकारी कथित गिरोह तक पहुंचाने में सहयोग कर रहे थे, जिसके आधार पर परिजनों को सरकारी राहत राशि दिलाने के नाम पर कथित फर्जी दावे तैयार कराए जाते थे। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी।
पुलिस जांच के अनुसार जैसे ही किसी मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए सिम्स अस्पताल पहुंचता था, उसकी सूचना तत्काल गिरोह के सदस्य महेंद्र मनहर तक पहुंचा दी जाती थी। इसके बाद वह अस्पताल पहुंचकर मृतक के परिजनों से संपर्क करता, उन्हें सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता और आपदा राहत राशि का लालच देता तथा मृत्यु का कारण सर्पदंश बताने के लिए कथित तौर पर तैयार करता था।
जांच एजेंसी का दावा है कि कई मामलों में मौत का वास्तविक कारण कुछ और होने के बावजूद सरकारी राहत राशि प्राप्त करने के उद्देश्य से सर्पदंश का दावा किया गया। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में कुछ परिजन भी आर्थिक लाभ के लालच में शामिल हो जाते थे और गिरोह के सदस्य आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने में मदद करते थे।
पुलिस ने बताया कि विवेचना के दौरान एकत्र किए गए दस्तावेजी साक्ष्य, तकनीकी जानकारी, कॉल डिटेल और अन्य तथ्यों के आधार पर दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि रिमांड के दौरान पूछताछ में गिरोह के पूरे नेटवर्क, आर्थिक लेनदेन, अन्य सहयोगियों और इस तरह के मामलों में शामिल लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना है।
गिरफ्तार आरोपियों में रामकुमार पाटनवार (40 वर्ष), निवासी बंधवापारा, सरकंडा तथा रामेश्वर भास्कर (53 वर्ष), निवासी सतनाम नगर, अमेरी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार दोनों पर कथित गिरोह को समय-समय पर सूचना उपलब्ध कराने और परिजनों को प्रभावित करने में सहयोग करने का आरोप है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। जांच एजेंसियां इस बात का भी पता लगा रही हैं कि इस कथित फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा कितने मामलों में सरकारी राहत राशि प्राप्त करने के लिए कथित तौर पर गलत जानकारी प्रस्तुत की गई।
फिलहाल, दो पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी के बाद सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़ा मामले की जांच नए चरण में पहुंच गई है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
