अंबिकापुर में अब हर बाहरी व्यक्ति पर रहेगी पुलिस की नजर: भाजपा के पूर्व पार्षद आलोक दुबे की पहल रंग लाई, आईजी के निर्देश पर शहरभर में किरायेदार और संदिग्ध व्यक्तियों के सत्यापन का महाअभियान शुरू
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अंबिकापुर में अब हर बाहरी व्यक्ति पर रहेगी पुलिस की नजर: भाजपा के पूर्व पार्षद आलोक दुबे की पहल रंग लाई, आईजी के निर्देश पर शहरभर में किरायेदार और संदिग्ध व्यक्तियों के सत्यापन का महाअभियान शुरू

अंबिकापुर । लोकतंत्र में वही जनप्रतिनिधि सच्चे अर्थों में सफल माना जाता है, जो केवल चुनाव जीतने तक सीमित न रहकर जनता की सुरक्षा, शांति और भविष्य की चिंता भी करे। 
इसी भावना का परिचय देते हुए पूर्व पार्षद एवं वरिष्ठ समाजसेवी आलोक दुबे ने सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक को पत्र लिखकर अंबिकापुर शहर में बाहरी राज्यों से आए किरायेदारों और संदिग्ध व्यक्तियों के सत्यापन की मांग उठाई।
     आज जब देश के अनेक शहरों में किरायेदार सत्यापन की व्यवस्था को कानून-व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है, तब अंबिकापुर जैसे शांत और सांस्कृतिक शहर की सुरक्षा को लेकर उठाई गई यह चिंता समयानुकूल और विचारणीय है। यदि किसी क्षेत्र में रहने वाले लोगों का उचित सत्यापन न हो, तो भविष्य में कानून-व्यवस्था की चुनौतियाँ उत्पन्न होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
      आलोक दुबे ने अपने पत्र में यह आग्रह किया है कि पुलिस एवं प्रशासन किरायेदारों तथा बाहरी व्यक्तियों का नियमानुसार सत्यापन सुनिश्चित करे, जिससे अपराधों की रोकथाम, नागरिकों की सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द को मजबूती मिल सके। यह मांग किसी व्यक्ति, समुदाय या वर्ग विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि कानून के समान एवं निष्पक्ष पालन की भावना से जुड़ी हुई प्रक्रिया होती हैं।
      एक जिम्मेदार नागरिक की यही पहचान होती है कि वह समस्या के गंभीर रूप लेने की प्रतीक्षा न करे, बल्कि समय रहते समाधान की दिशा में पहल करे।
     प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक सकारात्मक संदेश है कि सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों की भी ज़िम्मेदारी है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि प्रत्येक मकान मालिक किरायेदारों का सत्यापन कराए, नागरिक किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना पुलिस को दें और प्रशासन भी नियमित अभियान चलाकर कानून के प्रभावी पालन को सुनिश्चित करे।
     आज सुबह से ही कई जगहों पर पुलिस बाहर से आकर रह रहे लोगों की पूरी जानकारी तथ्य समेत जुटानी शुरू कर दी है।
    पार्षद आलोक दुबे के पत्र में कई महत्वपूर्ण तथ्य हैं जो सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील व महत्वपूर्ण हैं।
     अब देखना ये है कि सुस्त हो चुकी सरगुजा पुलिस ये काम किस चुस्ती के साथ कर पाती है क्योंकि सरगुजा पुलिस में लगातार गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और इस बात पर उच्च अधिकारियों में भी नाराज़गी है लेकिन राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण यहाँ तेज तर्रार पुलिस अधिकारी को एसपी के तौर पर नहीं बैठाया जा रहा है। इससे आमजन में आक्रोश और भय दोनों व्याप्त है।

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