जनभागीदारी समिति के अभाव में जशपुर के महाविद्यालयों में विकास कार्य ठप, छात्र-छात्राएं मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान
जशपुर, 20 जून। जिले के अधिकांश शासकीय महाविद्यालयों में जनभागीदारी समिति का गठन नहीं होने से छात्र-छात्राओं को विभिन्न मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि विद्यार्थियों से प्रतिवर्ष जनभागीदारी शुल्क तो लिया जा रहा है, लेकिन समिति के अभाव में छात्र हित से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य अधर में लटके हुए हैं।
जानकारी के अनुसार जनभागीदारी समिति महाविद्यालयों के विकास, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार तथा छात्र हितैषी योजनाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पूर्व में गठित समितियों के माध्यम से कई महाविद्यालयों में भवन मरम्मत, फर्नीचर व्यवस्था, पुस्तकालय विस्तार, पेयजल सुविधा और अन्य विकास कार्य कराए गए थे। वहीं जिले के कई ऐसे महाविद्यालय भी हैं जहां स्थापना के बाद से आज तक जनभागीदारी समिति का गठन नहीं हो सका है।
विद्यार्थियों का कहना है कि कई कॉलेजों में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। शौचालयों की स्थिति संतोषजनक नहीं है और पुस्तकालयों में नई पुस्तकों का अभाव बना हुआ है। खेलकूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी संसाधनों की कमी महसूस की जा रही है। उनका मानना है कि यदि जनभागीदारी समिति सक्रिय होती तो इन समस्याओं के समाधान के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाए जा सकते थे।
शिक्षाविदों का कहना है कि जनभागीदारी समिति केवल वित्तीय सहयोग का माध्यम नहीं, बल्कि महाविद्यालय और समाज के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी होती है। इसके माध्यम से स्थानीय जनप्रतिनिधि, अभिभावक, शिक्षाविद और समाजसेवी संस्थाएं महाविद्यालय के विकास में योगदान देती हैं। समिति के अभाव में कई विकास योजनाएं कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं।
सूत्रों के अनुसार कई महाविद्यालयों में प्रयोगशालाओं के उन्नयन, स्मार्ट क्लास स्थापना, परिसर सौंदर्यीकरण तथा छात्र कल्याण योजनाओं के प्रस्ताव तैयार हैं, लेकिन समिति नहीं होने के कारण उन्हें अपेक्षित स्वीकृति और वित्तीय सहयोग नहीं मिल पा रहा है।
पूर्व छात्र एवं छात्र प्रतिनिधियों ने भी इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि जनभागीदारी समिति का समय पर गठन नहीं होना उच्च शिक्षा व्यवस्था की उपेक्षा को दर्शाता है। स्थानीय स्तर पर कई समस्याओं का समाधान समिति के माध्यम से आसानी से किया जा सकता है।
विद्यार्थियों का आरोप है कि जनभागीदारी शुल्क वसूले जाने के बावजूद समिति का गठन नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि जिले के अनेक महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर विषयों का संचालन भी जनभागीदारी समिति के माध्यम से होता रहा है। ऐसे में समिति के निष्क्रिय रहने से शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं।
उल्लेखनीय है कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों में समिति गठन तक कलेक्टर को संबंधित कार्यों के संचालन के लिए अधिकृत किया गया है। इसके बावजूद समिति गठन की प्रक्रिया लंबित रहने से छात्र और अभिभावक असंतोष जता रहे हैं।
जिले के बुद्धिजीवियों, अभिभावकों और छात्र-छात्राओं ने उच्च शिक्षा विभाग से सभी महाविद्यालयों में शीघ्र जनभागीदारी समितियों का गठन करने की मांग की है, ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो सके।
