बीज गोला बनाबो, जशपुर के जंगल ला बढ़ाबो' अभियान बना जनआंदोलन, पहाड़ों-टेकरियों पर उमड़ा जनसैलाब; विधायक, जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों ने मिलकर बोए भविष्य के जंगल
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बीज गोला बनाबो, जशपुर के जंगल ला बढ़ाबो' अभियान बना जनआंदोलन, पहाड़ों-टेकरियों पर उमड़ा जनसैलाब; विधायक, जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों ने मिलकर बोए भविष्य के जंगल

जशपुरनगर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले ने गुरुवार को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया। वन विभाग द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी अभियान "बीज गोला बनाबो, जशपुर के जंगल ला बढ़ाबो" के तहत जिले के तीन प्रमुख स्थलों पर एक ही दिन में ढाई लाख से अधिक सीडबॉल का रोपण किया गया। हजारों ग्रामीणों, युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता ने इस अभियान को एक जनआंदोलन का स्वरूप दे दिया।

सुबह से ही मनोरा परिक्षेत्र के सोगड़ा स्थित भैरवपहाड़, कुनकुरी की हनुमान टेकरी तथा पत्थलगांव क्षेत्र के ईला गांव में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। मानव श्रृंखला बनाकर लोगों ने एक-दूसरे तक सीडबॉल पहुंचाए और सामूहिक रूप से उन्हें पहाड़ियों और वन क्षेत्रों में रोपा। यह दृश्य केवल पौधारोपण कार्यक्रम नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति जनसमर्पण और भावनात्मक जुड़ाव का जीवंत उदाहरण बन गया।

अभियान में किसान, महिला स्व-सहायता समूह, स्कूली छात्र-छात्राएं, सामाजिक संगठन और वन समितियों के सदस्य उत्साहपूर्वक शामिल हुए। हर हाथ में एक सीडबॉल और हर चेहरे पर हरियाली का सपना दिखाई दे रहा था। जिले के लोगों ने यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज की सामूहिक जवाबदेही भी है।

सीडबॉल तकनीक को वन विस्तार की आधुनिक, सरल और कम लागत वाली पद्धति माना जाता है। मिट्टी, गोबर और विभिन्न प्रजातियों के बीजों से तैयार इन गोलों को दुर्गम और पथरीले क्षेत्रों में फेंका या रोपा जाता है। मानसून की बारिश के साथ इनमें अंकुरण शुरू होता है और समय के साथ ये पौधे वृक्षों का रूप ले लेते हैं। इस तकनीक की विशेषता यह है कि जहां पारंपरिक पौधारोपण कठिन होता है, वहां भी बड़े पैमाने पर हरियाली विकसित की जा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभियान से न केवल वन क्षेत्र में वृद्धि होगी, बल्कि मिट्टी का कटाव रुकेगा, जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय जैव विविधता को भी नया जीवन मिलेगा। आने वाले वर्षों में इन सीडबॉलों से विकसित होने वाले वृक्ष जशपुर के पर्यावरणीय संतुलन को और मजबूत करेंगे।

कार्यक्रम के दौरान पत्थलगांव विधायक एवं सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष श्रीमती गोमती साय ने कहा कि यह केवल वन विभाग की योजना नहीं, बल्कि पूरे जिले का हरित संकल्प है। उन्होंने लोगों से इस अभियान को घर-घर तक पहुंचाने और इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया।

वहीं कुनकुरी जनपद अध्यक्ष श्रीमती सुशीला साय तथा भाजपा जिला उपाध्यक्ष श्री उपेन्द्र यादव ने स्वयं सीडबॉल रोपकर युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया। भैरवपहाड़ में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अधोरपीठ आश्रम के बाबा संभव राम ने प्रकृति संरक्षण को धर्म और मानवता से जोड़ते हुए कहा कि वृक्षारोपण सबसे बड़ा पुण्य कार्य है और आने वाली पीढ़ियों के लिए यह हमारी जिम्मेदारी है।

जशपुर वनमण्डलाधिकारी श्री शशि कुमार, भारतीय वन सेवा ने बताया कि यह अभियान आने वाले दिनों में और व्यापक रूप लेगा। उन्होंने कहा कि वन विभाग का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं बल्कि जशपुर को जैव-विविधता के समृद्ध केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसके लिए गांव-गांव तक अभियान पहुंचाया जाएगा और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ा जाएगा।

वन विभाग ने इस बार पौधारोपण के साथ-साथ पौधों की सुरक्षा और संरक्षण की भी विशेष रणनीति तैयार की है। स्थानीय समुदायों की सहभागिता सुनिश्चित करने के साथ स्कूलों और कॉलेजों में पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि नई पीढ़ी प्रकृति संरक्षण के महत्व को समझ सके।

जशपुर का यह अनूठा प्रयास पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणा बनकर उभरा है। सरकारी तंत्र और आम जनता की साझेदारी से यह साबित हुआ है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को जनशक्ति के बल पर हासिल किया जा सकता है। "बीज गोला बनाबो, जशपुर के जंगल ला बढ़ाबो" अब केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हरित भविष्य की दिशा में जशपुर का सामूहिक वचन बन चुका है। आने वाले वर्षों में इन्हीं सीडबॉलों से फूटने वाले अंकुर जिले की धरती को नई हरियाली से आच्छादित करेंगे और इस ऐतिहासिक पहल की सफलता की गवाही देंगे।

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