खड़ामाचा के जंगल में हाथियों की मस्ती: 30 हाथियों का दल तालाब में उतरा, शावकों संग घंटों तक लगाई डुबकियां, नजारा देखने उमड़े ग्रामीण -डेढ़ महीने से क्षेत्र में डटा है हाथियों का झुंड,वन विभाग की लगातार निगरानी
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खड़ामाचा के जंगल में हाथियों की मस्ती: 30 हाथियों का दल तालाब में उतरा, शावकों संग घंटों तक लगाई डुबकियां, नजारा देखने उमड़े ग्रामीण -डेढ़ महीने से क्षेत्र में डटा है हाथियों का झुंड,वन विभाग की लगातार निगरानी

जशपुर/पत्थलगांव 18 जून 2026 । पत्थलगांव वन परिक्षेत्र के खड़ामाचा जंगल में बुधवार को उस समय बेहद खूबसूरत और रोमांचक नजारा देखने को मिला, जब करीब 30 हाथियों का दल एक बड़े तालाब में उतर गया। भीषण गर्मी और उमस से राहत पाने के लिए हाथियों ने घंटों तक पानी में जमकर अठखेलियां कीं। झुंड में शामिल छोटे-छोटे शावक भी बड़े हाथियों के साथ पानी में मस्ती करते नजर आए। जंगल के बीच हाथियों की इस जलक्रीड़ा को देखने वाले ग्रामीणों और राहगीरों में खासा उत्साह देखा गया।

स्थानीय लोगों के मुताबिक हाथियों का यह दल पिछले करीब डेढ़ महीने से खड़ामाचा और आसपास के जंगलों में विचरण कर रहा है। हालांकि हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीण सतर्क हैं, लेकिन तालाब में हाथियों की मस्ती का दृश्य देखने के लिए लोग सुरक्षित दूरी से पहुंच रहे हैं। कई ग्रामीणों ने अपने मोबाइल कैमरों में इस दुर्लभ दृश्य को कैद भी किया।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सुबह से ही हाथियों का दल जंगल के भीतर स्थित तालाब की ओर बढ़ा। कुछ ही देर में पूरा झुंड पानी में उतर गया। बड़े हाथी अपनी सूंड में पानी भरकर खुद पर और एक-दूसरे पर फुहारें छोड़ते रहे, जबकि शावक पानी में उछल-कूद करते दिखाई दिए। कई हाथी पूरी तरह पानी में डूब गए और केवल उनकी सूंड ही बाहर दिखाई दे रही थी। यह दृश्य किसी वन्यजीव वृत्तचित्र जैसा प्रतीत हो रहा था।

 जानकार बताते हैं कि हाथियों के लिए पानी केवल प्यास बुझाने का साधन नहीं होता, बल्कि उनके जीवन का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। हाथियों का शरीर विशाल होता है और गर्मी के मौसम में उनके शरीर का तापमान तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे में वे तालाब, नदी या झील जैसे जलस्रोतों में जाकर घंटों तक समय बिताते हैं। पानी में रहने से उनके शरीर को ठंडक मिलती है और वे गर्मी के प्रभाव से बच पाते हैं।

तालाब में नहाने के बाद हाथियों को अक्सर कीचड़ में लोटते हुए भी देखा जाता है। शरीर पर चढ़ी कीचड़ की परत प्राकृतिक सनस्क्रीन का काम करती है। इससे हाथियों को तेज धूप से सुरक्षा मिलती है और त्वचा पर कीड़े-मकोड़ों के हमले का खतरा भी कम हो जाता है। यही वजह है कि पानी में मस्ती के बाद हाथी अक्सर कीचड़ से अपने शरीर को ढंक लेते हैं।

खड़ामाचा क्षेत्र में हाथियों की लगातार मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग भी पूरी तरह सतर्क है। विभाग की टीम हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है। ग्रामीणों को भी हाथियों के झुंड के नजदीक नहीं जाने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। वन अमला समय-समय पर मुनादी और जनजागरूकता के माध्यम से लोगों को सतर्क रहने के लिए प्रेरित कर रहा है।

गौरतलब है कि जशपुर जिले के पत्थलगांव क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ी है। जंगलों में पर्याप्त भोजन और पानी उपलब्ध होने के कारण हाथियों के दल लंबे समय तक यहां डेरा डाले हैं। फिलहाल खड़ामाचा में हाथियों की जलक्रीड़ा का यह मनमोहक दृश्य क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे प्रकृति का अद्भुत नजारा बता रहे हैं।

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