जिले के सबसे बड़े उच्च शिक्षा संस्थान की बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल, नियमित प्राचार्य और रिक्त प्राध्यापक पदों की नियुक्ति नहीं होने से प्रभावित हो रही शैक्षणिक गुणवत्ता; विद्यार्थियों ने कहा—‘स्थायी नेतृत्व मिले तो बदलेगी महाविद्यालय की तस्वीर’
जशपुरनगर। जनजातीय अंचल जशपुर जिले में उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले शासकीय रामभजन राय एन.ई.एस. स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थिति इन दिनों चिंता का विषय बनी हुई है। वर्ष 1963 में मात्र छह विद्यार्थियों के साथ शुरू हुए इस ऐतिहासिक महाविद्यालय ने जिले में हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्रदान कर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है, लेकिन वर्तमान में यह संस्थान नियमित प्राचार्य के अभाव, शिक्षकों की कमी और आधारभूत सुविधाओं के संकट से जूझ रहा है।
पिछले लगभग एक वर्ष से महाविद्यालय बिना नियमित प्राचार्य के संचालित हो रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों, शिक्षकों, पूर्व छात्र-छात्राओं और शिक्षा प्रेमियों ने शासन एवं उच्च शिक्षा विभाग से जल्द से जल्द नियमित प्राचार्य की नियुक्ति करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि स्थायी नेतृत्व के अभाव में महाविद्यालय का समग्र विकास प्रभावित हो रहा है और कई महत्वपूर्ण योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं।
महाविद्यालय से जुड़े लोगों के अनुसार किसी भी बड़े शैक्षणिक संस्थान के लिए नियमित और दूरदर्शी नेतृत्व अत्यंत आवश्यक होता है। प्राचार्य केवल प्रशासनिक प्रमुख नहीं होता, बल्कि संस्थान के शैक्षणिक, अधोसंरचनात्मक और विकासात्मक कार्यों का मार्गदर्शक भी होता है। वर्तमान में स्थायी प्राचार्य नहीं होने के कारण नई योजनाओं के प्रस्ताव, भवन विस्तार, संसाधनों की व्यवस्था, नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत और विभिन्न विकास कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
आधुनिक सुविधाओं की मांग कर रहे विद्यार्थी
महाविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों का कहना है कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में उच्च शिक्षा संस्थानों में आधुनिक पुस्तकालय, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लर्निंग सुविधाएं, उन्नत प्रयोगशालाएं, शोध संसाधन और बेहतर खेल अधोसंरचना की आवश्यकता है। लेकिन संसाधनों की कमी और प्रशासनिक निर्णयों में विलंब के कारण इन सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पा रहा है।
विद्यार्थियों का मानना है कि यदि महाविद्यालय में नियमित प्राचार्य की नियुक्ति हो जाती है तो विकास योजनाओं को गति मिलेगी और संस्थान आधुनिक शिक्षा व्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेगा।
जर्जर भवन और मूलभूत सुविधाओं का अभाव
महाविद्यालय परिसर में कई भवनों की स्थिति जर्जर बताई जा रही है। विद्यार्थियों को पर्याप्त शौचालय सुविधा उपलब्ध नहीं है, जबकि स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी व्यवस्था भी अपेक्षित स्तर पर नहीं है। परिसर के रखरखाव और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।
शिक्षा प्रेमियों का कहना है कि जिले के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित महाविद्यालय में यदि मूलभूत सुविधाएं ही पर्याप्त नहीं होंगी तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों के अध्ययन वातावरण पर पड़ेगा।
शिक्षकों की कमी से प्रभावित हो रही पढ़ाई
महाविद्यालय की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक शिक्षकों की कमी भी है। जानकारी के अनुसार गणित जैसे महत्वपूर्ण विषय में स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों स्तरों पर अध्ययन-अध्यापन संचालित होने के बावजूद एक भी नियमित शिक्षक पदस्थ नहीं है। इसके अलावा कई अन्य विषयों में भी केवल एक या दो प्राध्यापकों के भरोसे पूरी शैक्षणिक व्यवस्था संचालित की जा रही है।
शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों को विषयगत मार्गदर्शन, नियमित कक्षाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए रिक्त सहायक प्राध्यापक पदों को शीघ्र भरना आवश्यक है।
स्थायी नेतृत्व से मिलेगी नई दिशा
पूर्व विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रामभजन राय एन.ई.एस. स्नातकोत्तर महाविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि जशपुर जिले की शैक्षणिक पहचान है। ऐसे में इस महाविद्यालय को उसकी ऐतिहासिक गरिमा और प्रतिष्ठा के अनुरूप सुविधाएं तथा प्रशासनिक नेतृत्व मिलना चाहिए।
उनका मानना है कि नियमित प्राचार्य की नियुक्ति होने पर प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी, विकास कार्यों को गति मिलेगी, शिक्षकों की नियुक्ति संबंधी प्रयास तेज होंगे और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।
अब जिले के विद्यार्थियों, पूर्व छात्रों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों की निगाहें छत्तीसगढ़ शासन और उच्च शिक्षा विभाग के निर्णय पर टिकी हैं। सभी को उम्मीद है कि जिले के सबसे पुराने और गौरवशाली महाविद्यालय को जल्द ही नियमित नेतृत्व मिलेगा और यह संस्थान एक बार फिर विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर होगा।
