दिल्ली में डीलिस्टिंग आंदोलन की बुलंद हुंकार के बाद जशपुर में जनजातीय अस्मिता के राष्ट्रीय चेहरा गणेश राम भगत का ऐतिहासिक स्वागत, ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और जनसैलाब ने बनाया यादगार पल
ताजा खबरें


बड़ी खबर

दिल्ली में डीलिस्टिंग आंदोलन की बुलंद हुंकार के बाद जशपुर में जनजातीय अस्मिता के राष्ट्रीय चेहरा गणेश राम भगत का ऐतिहासिक स्वागत, ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और जनसैलाब ने बनाया यादगार पल

जशपुर। जनजातीय समाज के अधिकारों और डीलिस्टिंग आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाले जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक के जशपुर आगमन पर मंगलवार को शहर ने ऐसा स्वागत देखा, जिसकी चर्चा लंबे समय तक होती रहेगी। दिल्ली में आयोजित विशाल जनजातीय महाकुंभ और डीलिस्टिंग आंदोलन से लौटे गणेश राम भगत के स्वागत के लिए जशपुर ही नहीं, बल्कि सरगुजा और झारखंड से भी बड़ी संख्या में समर्थक पहुंचे थे। शाम करीब 6 बजे जैसे ही उनका काफिला जैन मंदिर के समीप पहुंचा, सैकड़ों लोगों ने फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया और पूरा इलाका जयघोषों से गूंज उठा।

ढोल-नगाड़ों की थाप, पारंपरिक आदिवासी नृत्य और उत्साहित समर्थकों की भीड़ ने स्वागत को ऐतिहासिक बना दिया। जैन मंदिर से निकला भव्य जुलूस बस स्टैंड होते हुए महाराजा चौक पहुंचा, जहां समर्थकों ने जमकर आतिशबाजी कर अपनी खुशी का इजहार किया। पूरे मार्ग में लोगों ने पुष्पवर्षा कर गणेश राम भगत का स्वागत किया। नाचते-गाते और जयकारे लगाते हुए हजारों लोगों का काफिला उनके निवास तक पहुंचा, जहां देर शाम तक उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

जनजाति सुरक्षा मंच के विधिक सलाहकार ने बताया कि गणेश राम भगत पिछले कई दशकों से जनजातीय संस्कृति, परंपरा, रीति-रिवाज, जल-जंगल-जमीन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के मुद्दों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आयोजित जनजातीय महाकुंभ में देशभर की 550 विभिन्न जनजातियों के लगभग दो लाख लोगों की भागीदारी ने डीलिस्टिंग की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती प्रदान की है।

मंच के सह संयोजक , और ने कहा कि डीलिस्टिंग की मांग को देशव्यापी जनआंदोलन का स्वरूप देने में गणेश राम भगत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल ने भी जनजाति सुरक्षा मंच के प्रयासों की सराहना करते हुए इस आंदोलन की तुलना के ऐतिहासिक उलगुलान आंदोलन से की थी। उन्होंने कहा था कि देश के इतिहास में पहली बार राजधानी दिल्ली में इतनी बड़ी संख्या में जनजातीय प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्र हुए हैं, जो जनजातीय समाज की एकजुटता और जागरूकता का प्रतीक है।

बताया गया कि जनजाति सुरक्षा मंच के प्रतिनिधिमंडल ने और को ज्ञापन सौंपकर डीलिस्टिंग कानून जल्द लागू करने की मांग भी रखी है। गणेश राम भगत के जशपुर लौटने पर जिस तरह का जनसमर्थन देखने को मिला, उसने यह स्पष्ट संकेत दिया कि डीलिस्टिंग का मुद्दा अब जनजातीय समाज के बीच एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है और गणेश राम भगत इस आंदोलन के प्रमुख चेहरे के रूप में उभरकर सामने आए हैं। शहर में दिनभर इसी स्वागत समारोह और दिल्ली से लौटे जनजातीय प्रतिनिधिमंडल की चर्चा होती रही।

Leave Your Comment

Click to reload image