अभ्यारण्य में बिछेगा कैमरों का जाल, वन्य प्राणियों की हर हलचल होगी कैद… बादलखोल में वन अमले को दिया गया हाईटेक कैमरा ट्रैप प्रशिक्षण,अब जंगल में हर गतिविधियों पर रहेगी पैनी नजर

नारायणपुर 19 मई 2026। अखिल भारतीय बाघ आकलन-2026 को लेकर बादलखोल अभयारण्य क्षेत्र में तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में सोमवार को बादलखोल अभयारण्य के गेम रेंज परिसर में वन विभाग द्वारा विशेष कैमरा ट्रैप प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें जंगल में तैनात वन अमले को आधुनिक तकनीक से वन्यजीवों की निगरानी करने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में गेम रेंजर, डिप्टी रेंजर, वनपाल और नाकेदार बड़ी संख्या में शामिल हुए।
पूरा प्रशिक्षण व्यवहारिक तरीके से कराया गया, ताकि फील्ड में तैनात कर्मचारी जंगल के भीतर कैमरा ट्रैप को तय प्रोटोकॉल के अनुसार सही तरीके से स्थापित कर सकें। देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के सीनियर प्रोजेक्ट एसोसिएट के मास्टर ट्रेनर अभिषेक शुक्ला ने कर्मचारियों को कैमरा ट्रैप लगाने की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि कैमरे किस लोकेशन पर लगाए जाएंगे, उनका एंगल किस दिशा में होना चाहिए और कैमरा पेड़ों पर कितनी ऊंचाई में फिट किया जाए ताकि वन्यजीवों की स्पष्ट तस्वीरें कैद हो सकें।
प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को केवल थ्योरी ही नहीं बल्कि जंगल में ले जाकर लाइव डेमो भी कराया गया। मास्टर ट्रेनर ने मौके पर पेड़ों में कैमरा फिट कर दिखाया और बताया कि कैमरा ट्रैप बाघ की ऊंचाई के बराबर लगाया जाएगा, जिससे गुजरने वाले वन्यजीव आसानी से कैमरे की रेंज में आ सकें। कर्मचारियों को यह भी सिखाया गया कि कैमरे का फोकस, सेंसर और दिशा किस प्रकार सेट की जाए ताकि रात के समय भी वन्यजीवों की गतिविधियां रिकॉर्ड हो सकें।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कैमरा ट्रैप लगाने के बाद संबंधित क्षेत्र में अनावश्यक आवाजाही या हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि वन्यजीव बिना किसी डर या बाधा के स्वाभाविक रूप से जंगल में विचरण करते रहें और उनकी वास्तविक गतिविधियां कैमरे में रिकॉर्ड हो सकें।
बादलखोल अभयारण्य के अधीक्षक आशुतोष भगत ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देश मिलने पर वन्य प्राणियों के आकलन-2026 को लेकर सभी सर्किल और बीट क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगाने का कार्य किया जाएगा। इसके लिए वन अमले को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने यह विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित टीम अब तय मानकों के अनुसार जंगल में कैमरे स्थापित करेगी, जिससे सटीक डेटा एकत्रित किया जा सकेगा।
गौरतलब है कि अखिल भारतीय बाघ गणना हर चार वर्ष में आयोजित होती है। वर्ष 2022 के बाद होने वाले इस बड़े अभियान में इस बार केवल बाघ ही नहीं बल्कि तेंदुआ, जंगली हाथी, भालू, कोटरी समेत अन्य मांसाहारी वन्यजीवों की भी गणना की जाएगी। वन विभाग का मानना है कि आधुनिक कैमरा ट्रैप तकनीक से वन्यजीवों की मौजूदगी, संख्या और गतिविधियों का अधिक सटीक आकलन संभव हो सकेगा।
