वायरल ऑडियो से हिला प्रशासन!” — ड्राइवर से अभद्र बातचीत पड़ी भारी, जांजगीर के कार्यपालन अभियंता तत्काल सस्पेंड, अफसरशाही की भाषा पर उठे बड़े सवाल
रायपुर 17 मई 2026 :
जांजगीर-चांपा जिले में एक वायरल ऑडियो क्लिप ने पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही इस ऑडियो रिकॉर्डिंग ने सरकारी सिस्टम की कार्यशैली और अफसरशाही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला श्री शशांक सिंह और उनके विभागीय वाहन चालक श्री शशिकांत साहू के बीच हुई मोबाइल बातचीत का है, जिसमें कथित तौर पर बेहद अभद्र भाषा, धमकी भरे शब्द और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणियां सुनाई दीं। सोशल मीडिया से लेकर सरकारी दफ्तरों तक सिर्फ एक ही चर्चा — “साहब की भाषा और व्यवहार आखिर इतना नीचे कैसे गिर गया?”
ऑडियो वायरल होते ही जिले भर में इसकी चर्चा शुरू हो गई और मामला सीधे प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों तक पहुंच गया।
बताया जा रहा है कि 12 मई 2026 को दोनों के बीच फोन पर तीखी बातचीत हुई थी। इसके बाद किसी ने इस बातचीत की ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया में वायरल कर दी। अगले ही दिन स्थानीय अखबारों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर यह मामला सुर्खियों में छा गया। वायरल ऑडियो सुनने के बाद लोग हैरान रह गए कि एक वरिष्ठ अधिकारी अपने ही अधीनस्थ कर्मचारी से किस तरह की भाषा में बात कर रहा है। चर्चा यह भी रही कि बातचीत के दौरान जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के लिए भी अपमानजनक टिप्पणियां की गईं, जिससे पूरा मामला और गंभीर हो गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्यालय कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, जांजगीर-चांपा ने तत्काल संज्ञान लिया। अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी को जांच सौंपी गई, जिन्होंने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए और पूरे घटनाक्रम की जांच की। जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया यह साफ माना गया कि कार्यपालन अभियंता द्वारा अपने अधीनस्थ चालक से अमर्यादित और अपमानजनक व्यवहार किया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि मोबाइल बातचीत के दौरान अशोभनीय शब्दों का प्रयोग हुआ और कर्मचारी को प्रताड़ित करने जैसी स्थिति बनी। प्रशासन ने माना कि इस पूरे घटनाक्रम से जिले की प्रशासनिक छवि धूमिल हुई है और जनता के बीच गलत संदेश गया है।
जांच रिपोर्ट सामने आते ही जल संसाधन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए श्री शशांक सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के तहत कदाचार का प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। इसके बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के प्रावधानों के तहत यह कार्रवाई की गई। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग तय किया गया है। हालांकि नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता मिलता रहेगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिले के सरकारी दफ्तरों में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। लोग कह रहे हैं कि अब अधिकारियों की कार्यशैली और कर्मचारियों के साथ व्यवहार भी जांच के दायरे में आने लगा है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस कार्रवाई को जरूरी और उदाहरणात्मक बताया है। वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि वायरल ऑडियो ने सरकारी दफ्तरों के भीतर चल रही “साहबशाही” की असली तस्वीर सामने ला दी है। जिले में अब हर कोई यही चर्चा कर रहा है कि आखिर एक वायरल ऑडियो ने कैसे एक बड़े अधिकारी की कुर्सी हिला दी।
