अभ्यारण्य जंगलों के बीच बसा बच्छरांव बाजार बना हजारों ग्रामीणों की जीवनरेखा: हर सप्ताह उमड़ती भीड़, हर जरूरत का मिलता समाधान,लेकिन सुविधा के नाम पर सन्नाटा, हजारों लोगों की भीड़ में शौचालय का अभाव बना सबसे बड़ा मुद्दा
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अभ्यारण्य जंगलों के बीच बसा बच्छरांव बाजार बना हजारों ग्रामीणों की जीवनरेखा: हर सप्ताह उमड़ती भीड़, हर जरूरत का मिलता समाधान,लेकिन सुविधा के नाम पर सन्नाटा, हजारों लोगों की भीड़ में शौचालय का अभाव बना सबसे बड़ा मुद्दा

नारायणपुर 09 अफ़्रैल 2026 :  बादलखोल अभ्यारण्य के घने जंगलों के बीच बसे ग्राम पंचायत बच्छरांव का साप्ताहिक बाजार आज भी ग्रामीण जीवन की असली तस्वीर पेश करता है। वर्षों पुरानी परंपरा को जीवित रखने वाला यह बाजार प्रत्येक सप्ताह गुरुवार के दिन आसपास के दर्जनों गांवों के लिए जीवनरेखा बन जाता है। सुबह होते ही दूर-दराज के गांवों से लोग पैदल, साइकिल चार पहिया वाहन और मोटरसाइकिल, से यहां पहुंचते हैं। देखते ही देखते पूरा इलाका भीड़ से भर जाता है और बाजार अपने पूरे रंग में नजर आता है।

आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र में बच्छरांव का बाजार लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों का सबसे बड़ा केंद्र है। यहां नमक, तेल, साबुन, राशन से लेकर सब्जी, फल, अनाज, कपड़े, बर्तन, लोहे-लकड़ी के औजार,मिट्टी के बर्तन और बच्चों के खिलौनों तक सब कुछ उपलब्ध रहता है। किसान अपनी उपज लेकर आते हैं, तो छोटे व्यापारी और कारीगर अपने सामान बेचकर परिवार का गुजारा चलाते हैं। यही कारण है कि यह बाजार सिर्फ खरीद-फरोख्त का स्थान नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी बना हुआ है।

बाजार में उमड़ने वाली भीड़ इस बात का प्रमाण है कि आज भी गांवों में साप्ताहिक बाजारों की अहमियत कम नहीं हुई है। यहां लोगों के बीच आपसी मेलजोल, बातचीत और रिश्तों की गर्माहट भी साफ देखने को मिलती है। सप्ताह में एक दिन लगने वाला यह बाजार ग्रामीणों के लिए एक तरह से सामाजिक उत्सव जैसा होता है, जहां जरूरतें भी पूरी होती हैं और अपनापन भी महसूस होता है।

भीड़ बढ़ी, लेकिन सुविधाएं नहीं—सबसे बड़ी परेशानी शौचालय का अभाव

 इस बाजार में भीड़ और रौनक के बीच एक कड़वी सच्चाई भी सामने आती है। इतने बड़े बाजार में आज तक शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव बना हुआ है। बाजार परिसर में शौचालय नहीं होने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिसमें सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं को उठानी पड़ती है। उन्हें खुले में जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जो न केवल असुविधाजनक है बल्कि सुरक्षा और स्वच्छता के लिहाज से भी बेहद चिंताजनक है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब हर सप्ताह इतनी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं, तो शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा का होना बेहद जरूरी है। पंचायत और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।

बच्छरांव का यह साप्ताहिक बाजार आज भी परंपरा, जरूरत और सामाजिक जुड़ाव का मजबूत केंद्र बना हुआ है, लेकिन अब इसे बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने की जरूरत है, ताकि यह हाट न केवल ग्रामीणों की जरूरतें पूरी करे, बल्कि उन्हें सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण भी प्रदान कर सके।

जनपद पंचायत बगीचा से सामुदायिक शौचालय की मांग की गई है जिसका प्रस्ताव भेजा जा चुका है पर अब तक काम की स्वीकृति नही मिली है। स्वीकृति मिलते ही शौचालय का निर्माण कराया जाएगा।
                 शंकर राम बरला   सरपंच- बच्छरांव

ग्राम पंचायत बच्छरांव का साप्ताहिक बाजार परिसर में सामुदायिक शौचालय न होने की जानकारी आपसे मिल रही है। बाजार में एक शौचालय का होना बहुत जरूरी है।  तत्काल वँहा शौचालय का निर्माण कराया जाएगा।

श्री विनोद सिंह- मुख्य कार्यपालन अधिकारी -जनपद पंचायत बगीचा

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