जहां पहुंचना था कभी मुश्किल, वहां अब मिल रही त्वरित चिकित्सा—आरोग्य जशपुर अभियान बना दूरस्थ जनजातीय अंचलों के लिए उम्मीद की किरण, नवाचार और तकनीक से बदली स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर
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जहां पहुंचना था कभी मुश्किल, वहां अब मिल रही त्वरित चिकित्सा—आरोग्य जशपुर अभियान बना दूरस्थ जनजातीय अंचलों के लिए उम्मीद की किरण, नवाचार और तकनीक से बदली स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर

जशपुरनगर 2 अप्रैल 2026/ सुदूर वनांचल एवं अनुसूचित जिला जशपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और सुलभ बनाने के उद्देश्य से संचालित “आरोग्य जशपुर अभियान” एक व्यापक और प्रभावी पहल के रूप में उभरकर सामने आया है। भौगोलिक चुनौतियों एवं सीमित संसाधनों के बावजूद जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक सुव्यवस्थित रोडमैप के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया गया है। इस अभियान के अंतर्गत न केवल गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं आमजन तक पहुंच रही हैं, बल्कि नवाचारों को राज्य स्तर पर भी सराहना मिल रही है। जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर श्री रोहित व्यास जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में नियमित रूप से स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा भी करते है। 


*स्वास्थ्य मितान हेल्पलाईन: एक कॉल पर स्वास्थ्य सेवाएं* -

जिले में शुरू की गई स्वास्थ्य मितान हेल्पलाईन 07763-299030 आमजन के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। इस निःशुल्क सेवा के माध्यम से आपातकालीन स्थिति में त्वरित सहायता प्रदान की जा रही है। अब तक 3180 से अधिक कॉल प्राप्त कर सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिनमें 5 मिनट के भीतर रिस्पांस दिया जाता है और प्रत्येक कॉल पर 1 से 3 फॉलोअप सुनिश्चित किया जाता है। ओला-उबर की तर्ज पर एम्बुलेंस ट्रैकिंग लिंक उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों बढ़ी हैं।


*पहाड़ी कोरवा हेल्पडेस्क: विशेष पिछड़ी जनजाति तक पहुंच* -

पीवीटीजी समुदायों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए बगीचा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेष पिछड़ी जनजाति सहायता केन्द्र स्थापित किया गया है। आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित हेल्पडेस्क स्थानीय भाषा में संवाद कर जागरूकता बढ़ा रहा है। इस पहल से 1450 से अधिक मरीजों को ओपीडी, 900 से अधिक को आईपीडी सेवाएं तथा 140 से अधिक सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराए गए हैं। मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से दूरस्थ बसाहटों में नियमित स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं।


*स्वस्थ महतारी सबकी जिम्मेदारी: मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर विशेष फोकस* -

रिचिंग एवरी डिलीवरी (रेड) कॉल सेंटर के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी की जा रही है। अब तक 44,000 से अधिक कॉल के माध्यम से माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल सुनिश्चित की गई है। इससे संस्थागत प्रसव में वृद्धि हुई है और उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की समय पर पहचान एवं उपचार संभव हुआ है।


*सर्पदंश प्रबंधन: जीवन बचाने की प्रभावी पहल* -

जिले के सभी अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। वर्ष में 626 सर्पदंश मामलों में से 616 का सफल उपचार किया गया है। गूगल शीट के माध्यम से केस-टू-केस मॉनिटरिंग, व्हाट्सएप ग्रुप द्वारा विशेषज्ञ परामर्श, तथा स्थानीय बैगा-गुनिया को प्रशिक्षित कर त्वरित अस्पताल भेजने की पहल से मृत्यु दर में कमी आई है।


*रक्त उपलब्धता डैशबोर्ड: समय पर जीवनरक्षक सुविधा*-

जिला अस्पताल सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पत्थलगांव, कुनकुरी, बगीचा, फरसाबहार, कांसाबेल और दुलदुला में रक्त भंडारण इकाइयों की स्थापना की गई है। इसके साथ ही जिला जशपुर के अधिकारिक वेबसाइट एनआईसी पोर्टल पर रियल टाइम डैशबोर्ड विकसित किया गया है। इससे आमजनों को स्वास्थ्य केंद्रों में रक्त की उपलब्धता की सटीक जानकारी मिल रही है, जिससे आपात स्थिति में समय पर उपचार संभव हो पा रहा है।


*स्वास्थ्य अधोसंरचना का विस्तार: मजबूत हो रहा नेटवर्क* -

जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए कई नई संस्थाओं की स्वीकृति एवं संचालन किया जा रहा है। इनमें 220 बिस्तरीय अस्पताल कुनकुरी, नवीन एमसीएच, 3 नए सीएचसी, 7 नए पीएचसी, शहरी स्वास्थ्य केंद्र, एनआरसी, क्रिटिकल केयर ब्लॉक, बीपीएचयू, नर्सिंग एवं फिजियोथेरेपी कॉलेज, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र शामिल हैं। साथ ही 50 सीटों का मेडिकल कॉलेज प्रस्तावित है। आरोग्य जशपुर अभियान के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं में आई यह व्यापक सुधार न केवल जनस्वास्थ्य को सुदृढ़ कर रहा है, बल्कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव ला रहा है। यह पहल स्वास्थ्य के क्षेत्र में नवाचार, समर्पण और प्रभावी क्रियान्वयन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर रही है।

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