मुख्यमंत्री निवास बगिया में श्री रामनवमी महायज्ञ का भव्य समापन, श्रद्धा और भक्ति के बीच माता प्रतिमा का विसर्जन, बड़ी संख्या में जुटे देवी संत समाज के लोग
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मुख्यमंत्री निवास बगिया में श्री रामनवमी महायज्ञ का भव्य समापन, श्रद्धा और भक्ति के बीच माता प्रतिमा का विसर्जन, बड़ी संख्या में जुटे देवी संत समाज के लोग

जशपुरनगर 29 मार्च 2026 । चैत्र रामनवमी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री निवास बगिया में आयोजित चार दिवसीय श्री रामनवमी महायज्ञ का शनिवार को भव्य एवं श्रद्धामय वातावरण में समापन हो गया। पूरे आयोजन के दौरान क्षेत्र में भक्ति, आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला, वहीं अंतिम दिन माता की प्रतिमा को विधि-विधान के साथ विसर्जित किया गया।समापन अवसर पर मुख्यमंत्री निवास से माता की प्रतिमा को बाजे-गाजे और जयकारों के साथ भव्य शोभायात्रा के रूप में मैनी तट तक ले जाया गया। इस दौरान हजारों श्रद्धालु “जय श्रीराम” और माता के जयघोष करते हुए यात्रा में शामिल हुए। नदी तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिपूर्वक पूजा-अर्चना के पश्चात माता की प्रतिमा का विसर्जन किया गया।इस पूरे आयोजन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय विशेष रूप से सक्रिय रहीं और उन्होंने आयोजन की व्यवस्थाओं का मार्गदर्शन करते हुए पूजा-अर्चना में भाग लिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1993 से निरंतर आयोजित हो रहा यह महायज्ञ क्षेत्र की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन चुका है।चार दिनों तक चले इस महायज्ञ में प्रतिदिन पूजन, हवन, आरती, कथा-प्रवचन, भजन-कीर्तन एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। विशेष रूप से नवकन्या पूजन, पूर्णाहुति और भव्य लीला ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
        इस धार्मिक आयोजन में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ ओडिशा, झारखंड और मध्यप्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पूरे बगिया क्षेत्र में इन चार दिनों तक भक्ति संगीत, प्रवचन और धार्मिक कार्यक्रमों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।महायज्ञ का सफल संचालन परम पूज्य स्वामी धनपति पण्डा जी महाराज के आशीर्वाद में संपन्न हुआ,साथ ही मुख्यमंत्री के भाई जयप्रकाश साय सह पत्नी ने विधि विधान से पूजा सम्पन्न कराया। समापन के अवसर पर प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।भव्य आयोजन के सफल समापन के साथ ही बगिया एक बार फिर आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा।

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