कभी दुर्लभ वनौषधियों और वन्यजीवों से गुलजार थे जशपुर के जंगल, अब लगातार आग की घटनाओं से उजड़ने लगी प्राकृतिक धरोहर—समाजसेवी रामप्रकाश पांडे ने पीएम नरेंद्र मोदी एवं सीएम विष्णु देव साय से हस्तक्षेप की अपील
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कभी दुर्लभ वनौषधियों और वन्यजीवों से गुलजार थे जशपुर के जंगल, अब लगातार आग की घटनाओं से उजड़ने लगी प्राकृतिक धरोहर—समाजसेवी रामप्रकाश पांडे ने पीएम नरेंद्र मोदी एवं सीएम विष्णु देव साय से हस्तक्षेप की अपील

जशपुर के जंगलों में बढ़ती आग से जैव विविधता पर संकट, समाजसेवी रामप्रकाश पांडे ने पीएम नरेंद्र मोदी से की हस्तक्षेप की अपील

जशपुर, 12 मार्च। जिले के जंगलों में लगातार लग रही आग की घटनाओं को लेकर क्षेत्र के समाजसेवी एवं प्रकृति प्रेमी रामप्रकाश पांडे ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi, Prime Minister’s Office (India) तथा Chief Minister’s Office Chhattisgarh से अपील करते हुए कहा है कि जशपुर के जंगलों में बढ़ती आग की घटनाओं से क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता गंभीर खतरे में पड़ गई है और यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

समाजसेवी रामप्रकाश पांडे ने अपने संदेश में कहा कि कभी जशपुर के घने जंगल जैव विविधता के लिए जाने जाते थे। यहां विभिन्न प्रकार के जंगली जीव-जंतु, पक्षी, सांप और सैकड़ों प्रकार की दुर्लभ वनौषधियां आसानी से देखने को मिलती थीं। स्थानीय ग्रामीण और पारंपरिक वैद्य इन वनौषधियों का उपयोग उपचार के लिए करते थे, जिससे यह क्षेत्र प्राकृतिक चिकित्सा और पारंपरिक ज्ञान का भी महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था।

उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में जंगलों में आग लगाने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। गर्मी के मौसम में सूखी पत्तियां और झाड़ियां आग को तेजी से फैलने में मदद करती हैं, जिससे बड़े क्षेत्र के जंगल जलकर राख हो जाते हैं। इस आग से न केवल पेड़-पौधों को नुकसान होता है बल्कि जंगलों में रहने वाले छोटे-बड़े जीवों और पक्षियों के जीवन पर भी सीधा खतरा उत्पन्न हो जाता है।

रामप्रकाश पांडे ने विशेष रूप से जशपुर के जंगलों में पाए जाने वाले मोरों की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर जमीन में पत्तों के नीचे अंडे देता है। जंगलों में लगने वाली आग से ये अंडे नष्ट हो जाते हैं, जिससे इस पक्षी की संख्या धीरे-धीरे कम होने का खतरा बढ़ रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि एक ओर केंद्र सरकार ने मोर को राष्ट्रीय पक्षी का दर्जा दिया है, वहीं छत्तीसगढ़ सरकार ने साल के वृक्ष को राजकीय वृक्ष घोषित किया है। साल वृक्ष राज्य के जंगलों की पहचान और पर्यावरणीय संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बावजूद जंगलों में लग रही आग की घटनाओं को रोकने के लिए अभी तक अपेक्षित स्तर पर प्रभावी प्रयास दिखाई नहीं दे रहे हैं।

समाजसेवी पांडे ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि जशपुर के जंगलों में लगने वाली आग को रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने वन विभाग की निगरानी बढ़ाने, आग पर त्वरित नियंत्रण के लिए विशेष दल गठित करने तथा स्थानीय ग्रामीणों को भी जंगलों की सुरक्षा के लिए जागरूक और सहभागी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि जंगल केवल पेड़-पौधों का समूह नहीं बल्कि प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं। यदि इन्हें सुरक्षित नहीं रखा गया तो क्षेत्र की जैव विविधता, पर्यावरण संतुलन और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। ऐसे में समय रहते प्रभावी कदम उठाना बेहद जरूरी है।

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