भद्रा और चंद्रग्रहण के साये के बीच शुभ मुहूर्त में हुआ भव्य होलिका दहन, “होलिका माता की जय” के जयघोष से गूंजा पूरा क्षेत्र, अग्नि परिक्रमा कर सुख-समृद्धि और आरोग्यता की मांगी कामना
भद्रा और चंद्रग्रहण के साये के बीच शुभ मुहूर्त में हुआ भव्य होलिका दहन, “होलिका माता की जय” के जयघोष से गूंजा पूरा क्षेत्र, अग्नि परिक्रमा कर सुख-समृद्धि और आरोग्यता की मांगी कामना
नारायणपुर, 3 मार्च। फाल्गुन पूर्णिमा की संध्या पर नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में Holika Dahan का पर्व पारंपरिक आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। शहर के विभिन्न मोहल्लों, चौक-चौराहों और गांवों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर होलिका दहन किया गया। अग्नि प्रज्वलित होते ही वातावरण “होलिका माता की जय” के जयघोष से गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने अग्नि की परिक्रमा कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और आरोग्यता की कामना की।
होलिका दहन से पूर्व लोगों ने लकड़ी, उपले और अन्य पूजन सामग्री एकत्रित कर विधिवत पूजा की। रोली, माला, रंगीन अक्षत, धूप, पुष्प, गुड़, कच्चे सूत का धागा, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, नारियल तथा नई फसल के गेहूं की बालियां और पके चने अर्पित किए गए। कई स्थानों पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन संपन्न हुआ। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की भारी भीड़ देर रात तक बनी रही।
धार्मिक मान्यता के अनुसार होलिका दहन असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार भक्त प्रह्लाद को बचाने के लिए ईश्वर की कृपा से होलिका अग्नि में भस्म हो गई थीं, जबकि प्रह्लाद सुरक्षित रहे। इसी आस्था के साथ लोगों ने जीवन की बुराइयों, नकारात्मक विचारों और आपसी द्वेष को अग्नि में समर्पित कर अच्छाई के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
इस वर्ष होली पर भद्रा का साया रहने के कारण अधिकांश स्थानों पर शुभ मुहूर्त में रात्रि के समय होलिका दहन किया गया। साथ ही मंगलवार को वर्ष का पहला चंद्रग्रहण होने से मंदिरों के कपाट बंद रहे और धार्मिक कार्यक्रम सीमित रहे।
होलिका दहन के बाद युवाओं में खासा उत्साह देखा गया। कई स्थानों पर डीजे की धुन पर होली गीतों पर नृत्य किया गया और लोगों ने एक-दूसरे को रंगोत्सव की शुभकामनाएं दीं। बुधवार को रंगों की होली खेली जाएगी। इसके लिए घरों में पारंपरिक पकवान तैयार किए जा रहे हैं तथा मोहल्लों में सामूहिक रूप से होली मनाने की तैयारी की गई है। नगर में पर्व को लेकर उल्लास और सौहार्द का वातावरण बना हुआ है।
बुधवार को खेली जाएगी होली
फाल्गुन पूर्णिमा पर लगने वाले चंद्र ग्रहण के कारण इस वर्ष होली के पर्व की तिथियों में बदलाव देखने को मिल रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पूर्णिमा तिथि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव रहने से सोमवार को विधि-विधान के साथ होलिका दहन किया जाएगा, जबकि रंगों का त्योहार होली बुधवार को मनाई जाएगी।
धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण काल को शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। इसी वजह से होलिका दहन का मुहूर्त ग्रहण से पूर्व निर्धारित किया गया है। श्रद्धालु ग्रहण लगने से पहले ही होलिका की पूजा-अर्चना कर अग्नि प्रज्ज्वलित करेंगे। इसके बाद ग्रहण काल में मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और लोग घरों में रहकर मंत्र जाप व आराधना करेंगे।
पंडितों का कहना है कि ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान-दान का विशेष महत्व रहेगा। वहीं रंगोत्सव यानी धुलेंडी का पर्व बुधवार को पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा।
