तीन सूत्रीय मांगों पर आर-पार की लड़ाई” — हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं ने खोला मोर्चा, कई केंद्रों में जड़ा ताला, रणजीता स्टेडियम बना आंदोलन का गढ़
जशपुर 26 फरवरी2026 : संयुक्त मंच के आह्वाहन पर तीन सूत्रीय मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ पंजी.409 के बैनर तले भारी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं सहायिकाएं दो दिवसीय हड़ताल पर सड़क पर उतर गए हैं,इस दौरान इनके द्वारा धरना प्रदर्शन करते हुवे जशपुर के रणजीता स्टेडियम स्थित हड़ताल स्थल पर जमकर नारेबाजी कर अपनी मांग रखी गई।
ज्ञात हो कि दो दिवसीय हड़ताल के दौरान संयुक्त मंच के आह्वाहन पर दिनांक 26 फरवरी को छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ पंजी.409 की कार्यकर्ताएं एवं सहायिकाओं ने जोश खरोश के साथ हड़ताल को सफल बनाया,इस दौरान संघ की जिलाध्यक्ष श्रीमती कविता यादव ने केंद्र एवं राज्य सरकार को आड़े हाथ लेते हुवे अनदेखी का गंभीर आरोप लगाया,उन्होंने कहा कि उन्हें डबल इंजन की सरकार से आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास था कि राज्य सरकार के तीसरे बजट में उनके लिए कुछ घोषणा किया जाएगा,परन्तु इस बजट में भी उन पर कोई विचार नहीं किया गया जिससे प्रदेश की एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहायिकाओं में निराशा है,सोई हुई सरकार को जगाने के लिए तीन सूत्रीय मांग को लेकर धरना प्रदर्शन समूचे राज्य में किया जा रहा है।
जिलाध्यक्ष श्रीमती कविता यादव ने आगे बताया कि देश मे आइसीडीएस की स्थापना हुये और आंगनबाड़ी केन्द्रो मे हमे काम करते 50 वर्ष हो गये है. महिला एवं बाल विकास विभाग देश भर मे स्थापना के गोल्डन जुबली ईयर मना रही है।देश का अमृत काल है.महिला एवं बाल विकास के हर योजना को हम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका बहने घर घर.गांव गांव और शहर शहर तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं.साथ ही SIR के कार्य .कोविंड महामारी और निर्वाचन कार्यो मे भी हमारी अहम भूमिका रही है।लेकिन इन 50 वर्षो मे केन्द्र सरकार की ओर से कार्यकर्ता को प्रतिमाह रू 4500/- और सहायिका को रू.2250/- मात्र ही मानदेय प्रदाय किया जा रहा है।इसे किसी भी स्थिति मे जीने लायक वेतन नही कहा जा सकता।ये श्रम नियमो के विपरीत है।केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2018 के बाद से कोई भी राशि की वृध्दि नही की गई है साथ ही छत्तीसगढ़ मे वर्तमान सरकार द्वारा इन दो वर्षो मे किसी भी प्रकार के ना तो मानदेय मे वृद्धि की गई है और ना ही कोई अन्य सुविधा प्रदान की है।इन 50 वर्षो मे अन्य बुनियादी सुविधा जैसे शासकीयकरण,बुढ़ापे का सहारा सामाजिक सुरक्षा के रूप मे मासिक पेशन,एक मुस्त ग्रेज्युवेटी राशि,समूह बीमा,बिमारी के हालत में कैशलेस चिकित्सा सुविधा और बेटा बेटी के हाथ पिला करने और पारिवारिक दायित्वो के निर्वहन मे पर्याप्त अवकास सुविधा भी नही है इन सभी कार्यो के यदि निर्वहन करनी है तो मानदेय कटवाना पड़ता है।इस तरह महिला सशक्तिकरण नही हो सकता है।वर्तमान मे भारत के संसद मे केंद्र सरकार का 2026-27 के लिये जो बजट प्रस्तुत किया गया है, उसमे हम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओ के शासकीयकरण,जीने लायक न्यूनतम वेतन,पेशन ग्रेज्युवेटी का कोई प्रावधान नही रखा गया है।इसी तरह छत्तीसगढ़ मे भी राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट मे हमारी इन बातो का ध्यान नही दिया गया है।जिससे समूचे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहायिकाओं में रोष व्याप्त है।आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संयुक्त मंच के प्रान्तीय आह्वान पर ध्यानाकर्षण करने हेतु छत्तीसगढ़ के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रो मे दिनांक 26 एवं 27 फरवरी 2026 दो दिवस काम बंद कर सभी जिलो मे धरना रैली प्रदर्शन किया जा रहा है। दिनांक 8 मार्च तक हमारी मांगो की पूर्ति नही होने की स्थिति मे संयुक्त मंच द्वारा आंदोलन को विस्तार करते हुये दिनांक 9 मार्च 2026 को एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाये रायपुर राजधानी पहुंचकर विधान सभा का घेराव करेगें।
जिलाध्यक्ष श्रीमती कविता यादव ने आगे बताया कि हमारी तीन प्रमुख मांगे है।
1- *शासकीय कर्मचारी घोषित किया जावे*
जिस तरह से शिक्षा कर्मि.पंचायत कर्मियो को नीति बनाकर नियमित किया गया उसी तरह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओ को भी शासकीय कर्मचारी घोषित किया जावे।
2- *न्यूनतम वेतन प्रदाय किया जावे*- शासकीय कर्मचारी घोषित होने तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को प्रतिमाह रू.26000 एवं सहायिका को रू 22100 वेतन स्वीकृत किया जावें। मध्यप्रदेश के तर्ज पर प्रतिवर्ष 1000 रू की वृध्दि किया जावे।
3- *समाजिक सुरक्षा*-बुढ़ापे की सहारा के लिये समाजिक सुरक्षा के रूप मे सेवानिवृत्ति और आकस्मिक मृत्यु पर एक मुस्त ग्रेज्युवेटी/मासिक पेशन और समूह बीमा का लाभ दिया जावे,इसके लिए नीति बनाई जावे।
