जनसेवा अभेद आश्रम चिटकवाइन से निकली माँ भगवती की भव्य डोला यात्रा, अपने द्वार पर आरती की थाली लेकर खड़े रहे श्रद्धालु, जगह-जगह पूजा-अर्चना और पुष्पवर्षा से हुआ माँ का अभिनंदन
नारायणपुर।जनसेवा अभेद आश्रम चिटकवाइन में प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी सर्वेश्वरी समूह द्वारा शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर विशेष धार्मिक आयोजन किया गया। दिनभर आश्रम में पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और माँ भगवती की आराधना का क्रम चलता रहा। संध्या के समय निकली भव्य डोला यात्रा के ग्राम भ्रमण के बाद श्रद्धालु पुनः आश्रम पहुंचे, जहां भव्य महाआरती की गई।
शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि पर शनिवार की संध्या नारायणपुर स्थित जनसेवा अभेद आश्रम चिटकवाइन में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का अनुपम दृश्य देखने को मिला। माँ भगवती की भव्य डोला यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय कर दिया। संध्या होते ही आश्रम परिसर श्रद्धालुओं की भीड़ से भर उठा। दूर-दराज के गांवों के साथ झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माँ भगवती के दर्शन और पूजन के लिए पहुंचे। चारों ओर माँ की आराधना, भजन-कीर्तन और जयकारों की गूंज सुनाई दे रही थी। भक्तों के हृदय में माँ के प्रति अटूट श्रद्धा और दर्शन की लालसा देखते ही बन रही थी।
सप्तमी की पावन संध्या में करीब 6:30 बजे विधि-विधान से पूजन-अर्चना के पश्चात बाबा उत्साही राम जी ने माँ भगवती की पूजा की। इसके बाद माँ को भव्य रूप से सुसज्जित डोले में विराजमान कराया गया। जैसे ही माँ भगवती की डोला यात्रा आश्रम परिसर से प्रारंभ हुई, पूरा वातावरण जय माँ सर्वेश्वरी के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की ध्वनि के बीच श्रद्धालु भक्ति भाव से माँ के डोले के साथ आगे बढ़ने लगे। किसी के हाथ जुड़े हुए थे, तो कोई माँ के जयकारे लगाते हुए अपनी श्रद्धा प्रकट कर रहा था।
माँ भगवती की इस पावन डोला यात्रा का सबसे भावपूर्ण और मनोहारी दृश्य उस समय देखने को मिला, जब ग्राम के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए माँ का डोला श्रद्धालुओं के घरों के सामने पहुंचा। माँ के आगमन की प्रतीक्षा में अनेक परिवार अपने घरों के सामने पूजा की थाली सजाकर खड़े थे। जैसे ही माँ भगवती का डोला उनके द्वार के सामने पहुंचता, श्रद्धालु पूरे भक्तिभाव से माँ की आरती उतारकर उनका स्वागत करते। आरती की लौ के साथ माँ के जयकारे गूंज उठते और श्रद्धालु हाथ जोड़कर अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना करते नजर आते।
घर-घर माँ भगवती की आरती उतारने का यह दृश्य श्रद्धा और समर्पण की अद्भुत मिसाल बना। कहीं महिलाएं आरती की थाली लेकर माँ के स्वागत में खड़ी थीं, तो कहीं परिवार के सभी सदस्य एक साथ एकत्रित होकर माँ के दर्शन कर रहे थे। श्रद्धालु अपने घरों के सामने माँ की आरती उतारकर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे थे।

यह डोला यात्रा जयस्तंभ चौक, मुख्य बाजार मार्ग और अटल चौक से होकर निकली डोला यात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। माँ का डोला जिस मार्ग से गुजरता, वहाँ भक्तों की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ पड़ती। सड़क के दोनों ओर खड़े श्रद्धालु हाथ जोड़कर माँ का अभिनंदन करते और जय माँ सर्वेश्वरी के जयकारों से वातावरण को गुंजायमान कर देते। माँ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आतुरता और उनके चेहरे पर झलकती श्रद्धा इस बात का प्रमाण थी कि नवरात्र का यह पावन पर्व लोगों के जीवन में कितना गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है।डोला यात्रा में साधकों और श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से अपने कंधों पर माँ भगवती का डोला उठाया। माँ की सेवा और डोला यात्रा में सहभागी बनने को भक्त अपना सौभाग्य मान रहे थे।

डोला यात्रा का समापन आश्रम स्थित काली मंदिर में हुआ, जहां हवन, पूजन और महाआरती के साथ सप्तमी की पूजा संपन्न हुई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने माँ भगवती के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, क्षेत्र की खुशहाली और जनकल्याण की कामना की। देर रात तक आश्रम में भक्तों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। हर श्रद्धालु माँ के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आतुर दिखाई दिया।
शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर जनसेवा अभेद आश्रम चिटकवाइन से निकली माँ भगवती की यह भव्य डोला यात्रा श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और आध्यात्मिक आनंद का अविस्मरणीय अवसर बनी। माँ के जयकारों से गूंजते नारायणपुर में देर शाम तक श्रद्धा की अविरल धारा बहती रही।
डोला यात्रा के दौरान नारायणपुर थाना प्रभारी स्वयं यात्रा के आगे-आगे रहकर यातायात व्यवस्था संभालते नजर आए। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए उन्होंने मार्ग पर व्यवस्था बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाई,

