बांस के एंटीना से शुरू हुआ सपना अब बनेगा जशपुर की पहचान, कुनकुरी से गूंजेगी ‘जशपुर की अपनी आवाज’, जशपुरांचल FM 88.4 मेगाहर्ट्ज को वायरलेस ऑपरेटिंग लाइसेंस देने का निर्णय
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बांस के एंटीना से शुरू हुआ सपना अब बनेगा जशपुर की पहचान, कुनकुरी से गूंजेगी ‘जशपुर की अपनी आवाज’, जशपुरांचल FM 88.4 मेगाहर्ट्ज को वायरलेस ऑपरेटिंग लाइसेंस देने का निर्णय



कुनकुरी/जशपुर। कभी बांस के एंटीना के सहारे एफएम रेडियो शुरू करने का सपना देखने वाले हाथों की मेहनत अब एक नई मंजिल की ओर बढ़ रही है। लगभग दस वर्ष पहले सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुआ एक छोटा-सा प्रयोग आज जशपुर की अपनी आवाज स्थापित करने की महत्वाकांक्षी पहल बन गया है। कुनकुरी से प्रस्तावित ‘जशपुरांचल FM 88.4 मेगाहर्ट्ज’ के लिए भारत सरकार के संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग ने वायरलेस ऑपरेटिंग लाइसेंस देने का निर्णय लिया है। यह जशपुर जिले में सामुदायिक संचार को नई दिशा देने की कोशिश का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

जशपुर जिले में ग्रामीण शिक्षा, सामाजिक विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में पिछले दो दशकों से सक्रिय जशपुरांचल सोसाइटी फॉर रूरल एजुकेशन एंड कंप्यूटर टेक्नोलॉजी अब संचार के माध्यम से समाज से जुड़ने की एक नई पहल कर रही है। संस्था की इस कोशिश से स्थानीय संस्कृति, लोककला, जनजातीय परंपराओं, ग्रामीण प्रतिभाओं और जनहित से जुड़े विषयों को एक साझा मंच मिलने की उम्मीद है।

भारत सरकार से मिला महत्वपूर्ण संकेत, 88.4 मेगाहर्ट्ज आवृत्ति का उल्लेख

संस्था को जारी 31 अगस्त 2026 के निर्णय पत्र में भारत सरकार के संचार मंत्रालय, दूरसंचार विभाग के वायरलेस प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन विंग ने वायरलेस ऑपरेटिंग लाइसेंस देने का निर्णय दर्ज किया है। पत्र के अनुसार, 88.400000 मेगाहर्ट्ज आवृत्ति निर्धारित तकनीकी विवरणों में शामिल है। दस्तावेज में आवेदन संख्या NW034320260607964, 11 जुलाई 2026 की आवेदन तिथि ,यह निर्णय संस्था की रेडियो संबंधी पहल को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है।

बांस के एंटीना से शुरू हुई कहानी, जुनून ने दिखाई नई राह

इस पहल के पीछे संघर्ष, कल्पनाशीलता और निरंतर प्रयासों से जुड़ी एक प्रेरक कहानी है। संस्था से जुड़े संदीप कुमार गुप्ता ने लगभग दस वर्ष पहले सीमित संसाधनों के बीच बांस के एंटीना के माध्यम से एफएम रेडियो शुरू करने का प्रयास किया था। उस समय साधन छोटे थे, लेकिन सपना बड़ा था—अपने अंचल के लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का, स्थानीय प्रतिभाओं को पहचान दिलाने का और जशपुर की सांस्कृतिक विरासत को आवाज देने का।
समय के साथ यह छोटी-सी कोशिश एक व्यवस्थित सामुदायिक रेडियो स्टेशन स्थापित करने की पहल में बदल गई। अब सरकारी स्तर पर वायरलेस ऑपरेटिंग लाइसेंस देने के निर्णय के साथ इस यात्रा ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया है।
संस्था के अध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता और संदीप कुमार गुप्ता के प्रयास इस पहल से जुड़े प्रमुख पक्ष हैं। यह यात्रा इस बात की मिसाल है कि जब किसी विचार के केंद्र में समाज के लिए कुछ बेहतर करने का संकल्प हो, तो सीमित संसाधनों से शुरू हुआ प्रयास भी व्यापक संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।

जशपुर की माटी, लोकधुन और जनजातीय विरासत को मिलेगा मंच

जशपुर की पहचान केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है। यहां की जनजातीय परंपराएं, लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक जीवनशैली और सांस्कृतिक विविधता इस अंचल की आत्मा हैं। प्रस्तावित ‘जशपुरांचल FM 88.4 मेगाहर्ट्ज’ के माध्यम से इन विशेषताओं को लोगों तक पहुंचाने की परिकल्पना की गई है।

रेडियो के कार्यक्रमों में स्थानीय लोकगायकों, कलाकारों, साहित्यकारों, युवाओं और क्षेत्र की विशिष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले लोगों को स्थान देने की संभावनाएं हैं। लोककथाओं, क्षेत्रीय गीतों, स्थानीय बोलियों और जनजीवन से जुड़े अनुभवों को प्रसारण का हिस्सा बनाकर सांस्कृतिक विरासत को सहेजने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

यह मंच जशपुर की उस पहचान को स्वर देने का माध्यम बन सकता है, जो गांवों की चौपालों, लोकगीतों की मधुर तानों और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं में जीवित है।

सरकारी योजनाओं से शिक्षा-कृषि तक, जनहितकारी जानकारी पर रहेगा जोर

सामुदायिक रेडियो का महत्व केवल मनोरंजन में नहीं, बल्कि स्थानीय जरूरतों के अनुरूप उपयोगी सूचनाएं पहुंचाने में भी है। इसी उद्देश्य से प्रस्तावित स्टेशन पर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार, महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण विकास से जुड़े विषयों पर कार्यक्रम तैयार करने की योजना है।

सरकारी योजनाओं और विभागीय कार्यक्रमों की जानकारी सरल भाषा में प्रस्तुत किए जाने से ग्रामीण नागरिकों को उपलब्ध सुविधाओं, पात्रता और आवेदन प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक बनाने में सहायता मिल सकती है। विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाना इस पहल की महत्वपूर्ण संभावनाओं में शामिल है।

इसके साथ ही स्थानीय समस्याओं, सामाजिक सरोकारों, जनहित के मुद्दों और क्षेत्र की उपलब्धियों पर संवाद के अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं। इस तरह रेडियो आम नागरिकों, स्थानीय समुदायों और जनकल्याणकारी पहलों के बीच संवाद का सेतु बनने की क्षमता रखता है।

गांव की चौपाल से युवाओं के सपनों तक, हर आवाज को मिलेगी पहचान

किसी सामुदायिक रेडियो की असली ताकत उसके समुदाय से जुड़ाव में होती है। ‘जशपुरांचल FM 88.4 मेगाहर्ट्ज’ की परिकल्पना भी स्थानीय लोगों की भागीदारी और क्षेत्रीय जरूरतों को केंद्र में रखने की भावना से जुड़ी है।

किसानों के अनुभव, महिलाओं की उपलब्धियां, युवाओं के नवाचार, विद्यार्थियों की प्रतिभा, स्थानीय उद्यमियों की सफलता की कहानियां और सामाजिक कार्यकर्ताओं के विचार इस मंच को जीवंत बना सकते हैं। मधुर संगीत, मनोरंजक प्रस्तुतियां, स्थानीय समाचार, जनजागरूकता कार्यक्रम और विशेष विषयों पर आधारित वार्ताएं प्रसारण को विविधता प्रदान कर सकती हैं।

डिजिटल माध्यमों के जरिए भी श्रोताओं तक पहुंच बनाने की संभावनाओं पर काम किया जा सकता है। उद्देश्य यही है कि रेडियो की तरंगों में केवल संगीत ही नहीं, बल्कि आम लोगों के अनुभव, आकांक्षाएं और उम्मीदें भी सुनाई दें।

दो दशक की सामाजिक सेवा के बाद संचार के क्षेत्र में नई पहल

जशपुरांचल सोसाइटी लंबे समय से ग्रामीण शिक्षा, सामाजिक विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में सक्रिय रही है। सामुदायिक रेडियो की स्थापना का प्रयास संस्था की इसी सामाजिक प्रतिबद्धता को संचार के एक नए माध्यम से आगे बढ़ाने की दिशा में देखा जा सकता है।

यदि प्रस्तावित स्टेशन आवश्यक औपचारिकताओं के बाद नियमित प्रसारण शुरू करता है, तो यह स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने, सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और जनहितकारी जानकारियों का प्रसार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

यह पहल उस विचार को भी मजबूत करती है कि तकनीक का वास्तविक महत्व तब बढ़ता है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और स्थानीय लोगों को अपनी बात कहने का अवसर मिले।

अब इंतजार जशपुर की अपनी आवाज सुनने का

बांस के एंटीना से शुरू हुई कल्पना से लेकर भारत सरकार के वायरलेस ऑपरेटिंग लाइसेंस संबंधी निर्णय तक की यह यात्रा जशपुरांचल सोसाइटी के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। कुनकुरी से प्रस्तावित यह रेडियो स्टेशन जशपुर की संस्कृति, प्रतिभा और जनभावनाओं को स्वर देने की उम्मीद जगाता है।

जब इस स्टेशन का प्रसारण आवश्यक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद शुरू होगा, तब जशपुर के लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं, स्थानीय उपलब्धियों और जनहितकारी सूचनाओं को एक नया मंच मिल सकेगा। यह केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि अपने अंचल को अपनी आवाज देने की कल्पना को साकार करने की दिशा में बढ़ता कदम होगा।

जशपुर की माटी, जशपुर की बोली, जशपुर की संस्कृति और जशपुर के लोगों की आवाज—यही है ‘जशपुरांचल FM 88.4 मेगाहर्ट्ज’ की परिकल्पना।

बांस के एंटीना से शुरू हुआ सपना, अब जशपुर की पहचान बनने की ओर।

जशपुरांचल FM 88.4 मेगाहर्ट्ज — बहुत जल्द, कुनकुरी से जशपुर की अपनी आवाज!

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