नारायणपुर में शारदीय नवरात्र पर महिलाओं और युवतियों ने निकाली भव्य कलश यात्रा, ढोल-नगाड़ों और ‘जय माता दी’ के जयकारों से भक्तिमय हुआ पूरा क्षेत्र, कपरी नदी से जल लाकर विधि-विधान से हुई कलश स्थापना
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नारायणपुर में शारदीय नवरात्र पर महिलाओं और युवतियों ने निकाली भव्य कलश यात्रा, ढोल-नगाड़ों और ‘जय माता दी’ के जयकारों से भक्तिमय हुआ पूरा क्षेत्र, कपरी नदी से जल लाकर विधि-विधान से हुई कलश स्थापना


 
नारायणपुर। शारदीय नवरात्र के पावन पर्व पर रविवार को नारायणपुर में भक्ति और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति नारायणपुर के सौजन्य से मां दुर्गा की आराधना के शुभारंभ पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। पारंपरिक वेशभूषा में सजी 201 महिलाओं और युवतियों ने सिर पर कलश धारण कर इस धार्मिक आयोजन में भाग लिया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन और ‘जय माता दी’ के गगनभेदी जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। कलश यात्रा ने गांव में नवरात्र पर्व की धार्मिक और सांस्कृतिक छटा बिखेर दी।
 
शारदीय नवरात्र में कलश यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह मां दुर्गा के स्वागत, शक्ति की उपासना और सुख-समृद्धि की मंगलकामना का प्रतीक है। कलश को पवित्रता, शुभता और जीवनदायिनी ऊर्जा का प्रतीक मानकर उसकी स्थापना की जाती है। नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना के साथ ही नौ दिनों तक चलने वाली देवी आराधना का विधिवत शुभारंभ हुआ। 
 
कलश यात्रा की शुरुआत नारायणपुर स्थित दुर्गा पंडाल से हुई। सिर पर कलश धारण कर निकलीं महिलाओं और युवतियों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी यात्रा में शामिल हुए। गांव की परिक्रमा करते हुए यात्रा कपरी नदी के तट पर पहुंची। यहां आचार्य सुमित दास और संजू नन्दे के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से कलश में पवित्र जल भरा गया। इसके बाद श्रद्धालु माता के जयकारे लगाते हुए कलश लेकर दुर्गा पूजा स्थल की ओर रवाना हुए। पूरे रास्ते भक्तिमय माहौल बना रहा और श्रद्धालुओं की भागीदारी ने आयोजन को भव्य स्वरूप प्रदान किया।
 
दुर्गा मंडप पहुंचने के बाद धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार देवी-देवताओं का आह्वान किया गया। तत्पश्चात कलश को विधि-विधान से स्थापित किया गया और शारदीय नवरात्र की पूजा-अर्चना शुरू हुई। नवरात्र के प्रथम दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा कर श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और क्षेत्र की मंगलकामना की।


 
आस्था और परंपरा का प्रतीक है कलश यात्रा
 
नवरात्र के दौरान निकाली जाने वाली कलश यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह सामाजिक एकता, सामूहिक सहभागिता और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का भी माध्यम है। इस आयोजन में महिलाओं और युवतियों की भागीदारी ने नारी शक्ति और धार्मिक आस्था का संदेश दिया। सामूहिक रूप से माता की आराधना करने से श्रद्धालुओं में उत्साह और एकजुटता का भाव भी देखने को मिला। नारायणपुर की कलश यात्रा ने एक बार फिर क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं के प्रति लोगों की गहरी आस्था को प्रदर्शित किया।
 
नो दिनों तक होंगे धार्मिक आयोजन, दशहरा पर होगा रावण दहन
 
सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति के सदस्यों ने बताया कि हर वर्ष की परंपरा के अनुसार इस साल भी शारदीय नवरात्र के अवसर पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई है। आगामी दस दिनों तक पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। समिति की ओर से सभी धार्मिक कार्यक्रमों को विधि-विधान और श्रद्धापूर्वक संपन्न कराने की तैयारियां की गई हैं। नवरात्र के समापन के साथ विजयादशमी का पर्व उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर रावण दहन का आयोजन भी किया जाएगा। नवरात्र के पहले दिन निकली भव्य कलश यात्रा ने पूरे क्षेत्र में उत्सव और भक्ति का वातावरण निर्मित कर दिया। माता के जयकारों के बीच शुरू हुई देवी आराधना से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। 

कलश यात्रा के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था संभालती रही पुलिस

कलश यात्रा के दौरान नारायणपुर पुलिस की सक्रियता देखने को मिली। यात्रा की शुरुआत से लेकर समापन तक पुलिस जवान श्रद्धालुओं के साथ मौजूद रहे और पूरे मार्ग पर व्यवस्था बनाए रखने में जुटे रहे। धार्मिक आयोजन में शामिल महिलाओं, युवतियों और अन्य श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसका पुलिस ने विशेष ध्यान रखा। यात्रा मार्ग पर वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए भी व्यवस्था बनाई गई, ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु बनी रहे और यात्रा के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था उत्पन्न न हो।
 

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