मां भवानी के स्वागत को तैयार हो रहा नारायणपुर, हाथी पर सवार होकर आएंगी जगत जननी;नारायणपुर में प्रतिमाएं तैयार, भव्य पंडाल सजाने में जुटी पूजा समिति
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मां भवानी के स्वागत को तैयार हो रहा नारायणपुर, हाथी पर सवार होकर आएंगी जगत जननी;नारायणपुर में प्रतिमाएं तैयार, भव्य पंडाल सजाने में जुटी पूजा समिति

नारायणपुर। शक्ति की आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है। इसके साथ ही नारायणपुर में मां दुर्गा की भक्ति और आराधना का माहौल बनने लगा है। दुर्गा पूजा को लेकर पूजा समितियों की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। पंडालों को आकर्षक रूप देने के साथ ही मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम स्वरूप दिया जा रहा है। नवरात्र के आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है और भक्त माता रानी के दर्शन के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस वर्ष मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। देवी का हाथी पर आगमन सुख-समृद्धि और खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में नवरात्र को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। घरों से लेकर पूजा पंडालों तक भक्ति और आस्था का वातावरण नजर आएगा।

नारायणपुर दुर्गा पूजा पंडाल में अंतिम चरण में तैयारियां

नारायणपुर के दुर्गा पूजा पंडाल में हर वर्ष की तरह इस बार भी नवरात्र धूमधाम से मनाने की तैयारी की जा रही है। मूर्तिकार मां दुर्गा की प्रतिमा को अंतिम रूप दे चुके हैं, वहीं पूजा समिति पंडाल की साज-सज्जा और अन्य व्यवस्थाओं को पूरा करने में जुटी हुई है। नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के साथ धार्मिक अनुष्ठान शुरू होंगे। इसके साथ ही प्रथम दिवस से मां दुर्गा की प्रतिमा का पट खोला जाएगा, जिसके बाद श्रद्धालु माता रानी के दिव्य दर्शन कर सकेंगे।

नवरात्र शुरू होते ही पंडाल में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है। नौ दिनों तक प्रतिदिन पूजा-अर्चना, आरती और देवी के अलग-अलग स्वरूपों की उपासना की जाएगी। महापर्व को लेकर क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बनने लगा है।

नौ दिनों तक होगी मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा

नवरात्र का धार्मिक महत्व मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना से जुड़ा है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ शुरू होने वाला यह पर्व नवमी तक अलग-अलग देवी स्वरूपों की उपासना के साथ आगे बढ़ता है। श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत रखकर माता की आराधना करते हैं।  पूजा पंडाल में दुर्गा सप्तशती का पाठ, आरती और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।

नवरात्र केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि आस्था, साधना और परंपरा का भी प्रतीक है। अष्टमी और नवमी के दिन विशेष पूजा-अर्चना तथा कन्या पूजन का महत्व रहता है। श्रद्धालु मां दुर्गा से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।इसके बाद 20 अक्टूबर दशमी को विशेष हवन, पूर्णाहुति और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी है। रावण दहन के बाद दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा।

भक्ति और आस्था में डूबेगा नारायणपुर

शारदीय नवरात्र को लेकर नारायणपुर में तैयारियां अब अपने अंतिम पड़ाव पर हैं। पंडालों की सजावट, प्रतिमाओं का आकर्षक स्वरूप और धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां महापर्व के आगमन का संकेत दे रही हैं। 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले नवरात्र के साथ ही क्षेत्र में मां दुर्गा के जयकारे गूंजेंगे और श्रद्धालु नौ दिनों तक माता की भक्ति में लीन रहेंगे। भक्तों को उम्मीद है कि मां भवानी की कृपा से पुते क्षेत्र के साथ ही परिवारों में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली आएगी।

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