मोह-माया का त्याग घर छोड़ना नहीं, बल्कि लोभ, क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और द्वेष जैसे मन के विकारों का परित्याग है, कर्म और चरित्र से ही समाज को मिलती है सही दिशा : पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी
लोभ, अहंकार और संवादहीनता से बिखर रहे परिवार, सम्मान, संस्कार और संवाद ही सुखी समाज की असली नींव : पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी
वाराणसी, 31 जुलाई। गुरुपूर्णिमा महोत्सव के समापन अवसर पर आयोजित महिला एवं युवा संयुक्त सम्मेलन में श्री सर्वेश्वरी समूह के अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान समय में परिवारों के विघटन, दाम्पत्य जीवन में बढ़ते तनाव और सामाजिक असंतोष के पीछे सबसे बड़े कारण लोभ, अहंकार और संवादहीनता हैं। उन्होंने कहा कि परिवारों को मजबूत बनाने के लिए केवल किसी एक पक्ष को दोषी ठहराने के बजाय सभी को आत्मचिंतन करना होगा।
उन्होंने कहा कि विवाह के बाद बेटी अपना घर-परिवार छोड़कर नए वातावरण में आती है। ऐसे में उसे सम्मान, सहयोग और अपनापन मिलना चाहिए। वहीं नववधू का भी दायित्व है कि वह नए परिवार की परंपराओं और परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने का प्रयास करे। दोनों पक्षों की संवेदनशीलता, समझ और सहयोग से ही सुखी एवं सुदृढ़ परिवार का निर्माण संभव है।
पूज्य गुरुदेव ने कहा कि आज अधिकांश पारिवारिक विवादों की जड़ धन का लोभ और स्वार्थपूर्ण सोच है। इसी कारण संयुक्त परिवार टूट रहे हैं तथा माता-पिता वृद्धावस्था में उपेक्षा का जीवन जीने को विवश हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक धन संपत्ति नहीं, बल्कि अच्छे कर्म, श्रेष्ठ संस्कार और महापुरुषों द्वारा दिखाया गया जीवन मार्ग है।
उन्होंने कहा कि ईश्वर ने मनुष्य को बुद्धि और विवेक प्रदान किया है। इसलिए किसी भी बात का अंधानुकरण करने के बजाय समय, परिस्थिति और विवेक के आधार पर निर्णय लेना चाहिए। कर्मफल के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है, इसलिए जीवन में सदाचार, सेवा और मानवता को सर्वोच्च स्थान देना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मोह-माया का त्याग करने का अर्थ घर-परिवार छोड़ देना नहीं है, बल्कि मन के विकारों—लोभ, क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और द्वेष—का परित्याग करना ही वास्तविक वैराग्य है। परिवार और समाज में संवाद, विश्वास तथा पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि शंका और अविश्वास संबंधों को भीतर से कमजोर कर देते हैं।
पूज्य गुरुदेव ने उपस्थित माताओं और युवाओं से महापुरुषों की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने, सेवा, सदाचार और मानवता के मार्ग पर चलने तथा आने वाले समय की चुनौतियों के लिए मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से स्वयं को तैयार करने का आह्वान किया। अंत में उन्होंने सभी के उज्ज्वल भविष्य और मंगलमय जीवन की कामना की।

महिला एवं युवा संयुक्त सम्मेलन में हुआ प्रेरक संवाद
गुरुपूर्णिमा के शुभ अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन 30 जुलाई 2026 को आयोजित सायंकालीन महिला एवं युवा संयुक्त सम्मेलन में यह गोष्ठी संपन्न हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता ने की। इस अवसर पर संस्था के उपाध्यक्ष , , , , , , तथा ने भी विचार व्यक्त किए। भजन प्रस्तुति एवं ने दी। धन्यवाद ज्ञापन ने किया, जबकि संचालन ने किया।

65वें अखिल भारतीय वार्षिक अधिवेशन में सेवा कार्यों का प्रस्तुत किया गया प्रतिवेदन
इससे पूर्व सुबह 8 बजे श्री सर्वेश्वरी समूह का 65वाँ अखिल भारतीय वार्षिक अधिवेशन आयोजित हुआ। अधिवेशन में गत गुरुपूर्णिमा से वर्तमान गुरुपूर्णिमा तक संस्था द्वारा संचालित जनकल्याणकारी गतिविधियों का विस्तृत प्रतिवेदन संस्था के मंत्री तथा प्रचार मंत्री ने प्रस्तुत किया। साथ ही दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।
अधिवेशन को संबोधित करते हुए पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने संस्था के पदाधिकारियों का आह्वान किया कि समाज केवल भाषणों से नहीं, बल्कि व्यक्ति के आचरण और चरित्र से प्रेरणा लेता है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था की वास्तविक प्रगति उसके पदाधिकारियों के आदर्श जीवन पर निर्भर करती है। नई पीढ़ी को संस्था के संस्कारों से जोड़ना प्रत्येक परिवार का दायित्व है। उन्होंने कहा कि निष्क्रिय व्यक्ति को सहयोग नहीं मिलता, जबकि कर्मशील व्यक्ति के साथ समाज स्वयं जुड़ता है। समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता, इसलिए जीवन का प्रत्येक क्षण लोककल्याण और मानव सेवा के लिए समर्पित होना चाहिए।
