जशपुर में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म मामले में आरोपी को 20 साल का सश्रम कारावास, सन्ना पुलिस की मजबूत विवेचना और प्रभावी पैरवी से मिली कड़ी सजा
ताजा खबरें


बड़ी खबर

जशपुर में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म मामले में आरोपी को 20 साल का सश्रम कारावास, सन्ना पुलिस की मजबूत विवेचना और प्रभावी पैरवी से मिली कड़ी सजा

जशपुर। जशपुर जिले के सन्ना थाना क्षेत्र में नाबालिग बालिका के अपहरण और दुष्कर्म के चर्चित मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) एवं विशेष न्यायालय (पॉक्सो) जशपुर के न्यायाधीश जनार्दन खरे ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी सुखदेव राम को विभिन्न धाराओं में दोषी मानते हुए कठोर दंड दिया। न्यायालय के आदेश के बाद आरोपी को जिला जेल जशपुर भेज दिया गया।

मामले के अनुसार 19 जनवरी 2023 को पीड़िता के पिता ने थाना सन्ना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी 14 वर्षीय पुत्री 18 जनवरी की सुबह घर से नहाने जाने की बात कहकर निकली थी, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी। परिजनों ने गांव, आसपास के क्षेत्रों और रिश्तेदारों के यहां उसकी काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसी दौरान परिवार के यहां रहकर बैल-बकरी चराने वाला युवक सुखदेव राम भी गांव से लापता था, जिससे उस पर नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने का संदेह गहरा गया।

शिकायत के आधार पर थाना सन्ना पुलिस ने अपराध क्रमांक 03/2023 दर्ज कर तत्काल विवेचना शुरू की। पुलिस टीम ने तकनीकी और वैज्ञानिक तरीके से जांच करते हुए पीड़िता को सकुशल बरामद किया। इसके बाद पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया, घटनास्थल का निरीक्षण किया गया, आवश्यक वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए गए तथा गवाहों के बयान दर्ज किए गए। जांच के दौरान आरोपी के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।

विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366क, 376(3) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूत साक्ष्य और गवाह पेश किए, जिन्हें न्यायालय ने विश्वसनीय मानते हुए आरोपी को दोषी करार दिया।

न्यायालय ने आरोपी को धारा 363 के तहत पांच वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक हजार रुपये अर्थदंड, धारा 366क के तहत पांच वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक हजार रुपये अर्थदंड, धारा 376(3) के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं दो हजार रुपये अर्थदंड तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं दो हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। न्यायालय ने सभी सजाओं को साथ-साथ चलाने का आदेश दिया।

इस मामले में आरोपी को कठोर सजा दिलाने में तत्कालीन थाना प्रभारी सन्ना निरीक्षक एल. आर. राठिया की निष्पक्ष और प्रभावी विवेचना की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अनुपम कुमार तिर्की ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी करते हुए सशक्त साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी को दोषसिद्ध कर कठोर सजा दिलाई जा सकी।

जशपुर पुलिस ने कहा है कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों में त्वरित विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन और प्रभावी न्यायालयीन पैरवी के माध्यम से दोषियों को कठोर दंड दिलाना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में कानून के तहत सख्त कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी

Leave Your Comment

Click to reload image