सावन से पहले शिवभक्तों में नाराजगी : शिव मंदिर जाने वाले रास्ते पर ट्रैक्टर से जुताई से भड़का जनाक्रोश, हजारों श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट का आरोप — ग्रामीणों ने वन विभाग को दी आंदोलन की चेतावनी, बादलखोल अभ्यारण्य में धार्मिक भावना आहत होने का मामला गरमाया 
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सावन से पहले शिवभक्तों में नाराजगी : शिव मंदिर जाने वाले रास्ते पर ट्रैक्टर से जुताई से भड़का जनाक्रोश, हजारों श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट का आरोप — ग्रामीणों ने वन विभाग को दी आंदोलन की चेतावनी, बादलखोल अभ्यारण्य में धार्मिक भावना आहत होने का मामला गरमाया 

 51 साल पुराने शिवधाम तक पहुंचने वाले मार्ग पर घास बुआई की तैयारी से मचा बवाल, श्रद्धालुओं ने कहा- ‘रास्ता बंद करने की साजिश बर्दाश्त नहीं’, मौके पर पहुंचे अधिकारियों को सुननी पड़ी खरी-खरी 

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 सावन से पहले शिवभक्तों में उबाल, जिस रास्ते से हजारों श्रद्धालु करते हैं जलाभिषेक यात्रा उसी पर चली जुताई; ग्रामीण बोले- आस्था के मार्ग से खिलवाड़ बंद करे वन विभाग 

नारायणपुर 25 जून । बादलखोल अभ्यारण्य की नारायणपुर रेंज अंतर्गत साहीडाँड़ सर्किल के साजापानी स्थित लगभग 51 वर्ष पुराने शिव मंदिर को लेकर क्षेत्र में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर तक पहुंचने वाले पारंपरिक मार्ग पर वन विभाग द्वारा ट्रैक्टर से जुताई कर घास बीज बुआई की तैयारी किए जाने का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कदम हजारों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़े मार्ग को प्रभावित करने वाला है और इससे श्रद्धालुओं की भावना आहत हुई है।

शिव मंदिर तक पहुंचने वाले मार्ग पर ट्रैक्टर से जुताई किए जाने के मामले ने न केवल धार्मिक आस्था से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि वन विभाग और ग्रामीणों के बीच बढ़ती दूरी को भी उजागर कर दिया है। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर रेंज के वर्तमान रेन्जर की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि उनके पदभार ग्रहण करने के बाद से क्षेत्र में लगातार विवाद की स्थितियां निर्मित हो रही हैं और जनता के साथ समन्वय लगभग समाप्त हो गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार साजापानी स्थित यह शिव मंदिर वर्ष 1970 के आसपास स्थापित किया गया था, उस समय यह क्षेत्र अभ्यारण्य के अधीन नहीं था। बीते पांच दशकों से अधिक समय से यह मंदिर क्षेत्र के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। सावन माह में हजारों की संख्या में श्रद्धालु जल लेकर पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष अखंड कीर्तन सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन भी होते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस मार्ग से वर्षों से श्रद्धालु मंदिर तक पहुंचते रहे हैं, उसी रास्ते पर वन विभाग द्वारा जुताई कर दी गई। आरोप है कि वन्य प्राणियों के लिए घास उगाने के नाम पर सड़क जैसी उपयोग में आने वाली भूमि को जोता गया, जिससे लोगों में यह आशंका पैदा हो गई कि मंदिर तक पहुंचने का रास्ता बाधित किया जा रहा है। मामले की जानकारी फैलते ही गांवों में चर्चा तेज हो गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण तथा श्रद्धालु मौके पर पहुंच गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने मौके पर पहुंचकर वन विभाग की कार्रवाई का विरोध किया। स्थिति को देखते हुए विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। इस दौरान लोगों ने स्पष्ट रूप से अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि मंदिर जाने वाले रास्ते को किसी भी स्थिति में बंद नहीं होने दिया जाएगा। विरोध बढ़ने पर अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि इस दौरान सड़क पर मुरुम डालकर मार्ग को व्यवस्थित करने की मांग उठाई गई। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने उच्च अधिकारियों से चर्चा के बाद आवश्यक आदेश मिलने पर मार्ग पर मुरुम बिछाने की बात कही।

हालांकि ग्रामीण इस आश्वासन से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आए। उनका कहना है कि यदि तय सीमा तक सड़क को पुनः सुगम नहीं बनाया गया तो वन विभाग के खिलाफ धरना-प्रदर्शन और जन आंदोलन किया जाएगा। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग की कार्यप्रणाली के कारण लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और इससे क्षेत्र में रोष बढ़ता जा रहा है।

स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि यह मार्ग अस्तित्व में नहीं था तो फिर मंदिर परिसर के आसपास पूर्व में वन विभाग द्वारा चबूतरे का निर्माण क्यों कराया गया, मंदिर के नाम से प्रवेश द्वार (गेट) क्यों बनाया गया और रास्ते में रपटा निर्माण जैसे कार्य क्यों किए गए। लोगों का कहना है कि इन निर्माण कार्यों से स्पष्ट है कि यह मार्ग वर्षों से उपयोग में रहा है और श्रद्धालुओं की आवाजाही का प्रमुख रास्ता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि मंदिर तक पहुंचने वाले कच्चे मार्ग पर जुताई कर श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला कार्य किया गया है। उनका कहना है कि सावन जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर से पहले इस प्रकार की कार्रवाई ने लोगों की भावनाओं को गहराई से प्रभावित किया है। क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर लगातार चर्चा और नाराजगी का माहौल बना हुआ है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि बादलखोल अभ्यारण्य की नारायणपुर रेंज में पिछले कुछ समय से विभिन्न मामलों को लेकर विवाद की स्थिति बनती रही है। उनका कहना है कि स्थानीय जनता और विभाग के बीच बेहतर समन्वय की कमी के कारण कई मुद्दों पर टकराव की स्थिति उत्पन्न हो रही है। फिलहाल श्रद्धालु और ग्रामीण मंदिर मार्ग को पूर्ववत बनाए रखने की मांग पर अड़े हुए हैं और अब सभी की नजर वन विभाग के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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