बाल मधुमेह से जूझ रहे बच्चों और परिवारों को मिला नया संबल, जशपुर में रोगी सहायता समूह की बैठक में विशेषज्ञों ने दिए बेहतर जीवन प्रबंधन, नियमित इंसुलिन उपचार और स्वस्थ भविष्य के महत्वपूर्ण मंत्र
जशपुर 17 जून 2026/ बाल मधुमेह (टाइप-1 डायबिटीज) से प्रभावित बच्चों एवं उनके परिवारों को निरंतर उपचार, परामर्श एवं बेहतर जीवन प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जिला स्वास्थ्य समिति, जशपुर द्वारा यूनिसेफ छत्तीसगढ़ एवं एकम फाउंडेशन के तकनीकी सहयोग से रोगी सहायता समूह (Patient Support Group - PSG) की फॉलो-अप बैठक आयोजित की गई।
कार्यक्रम में 6 बाल मधुमेह प्रभावित बच्चों एवं उनके 8 अभिभावकों/देखभालकर्ताओं सहित कुल 32 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
बैठक का उद्देश्य बाल मधुमेह से प्रभावित बच्चों एवं उनके परिवारों को रोग के बेहतर प्रबंधन, नियमित रक्त शर्करा जांच, इंसुलिन उपचार, पोषण एवं स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के बारे में जानकारी प्रदान करना तथा उनकी समस्याओं एवं अनुभवों को साझा करने के लिए एक सहयोगात्मक मंच उपलब्ध कराना था।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. जी. एस. जात्रा ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि बाल मधुमेह एक ऐसी स्थिति है जिसके लिए नियमित देखभाल एवं उपचार की आवश्यकता होती है। उन्होंने परिवारों से बच्चों की नियमित जांच, समय पर इंसुलिन सेवन एवं चिकित्सकीय सलाह का पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया तथा आश्वस्त किया कि स्वास्थ्य विभाग ऐसे बच्चों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि रोगी सहायता समूह की बैठकें बच्चों एवं उनके परिवारों को मानसिक, सामाजिक एवं व्यवहारिक सहयोग प्रदान करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े रहने तथा नियमित फॉलो-अप में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में शिशु रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) डॉ. जानकी भगत ने बाल मधुमेह के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि टाइप-1 डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता, जिसके कारण रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है। उन्होंने इंसुलिन के नियमित उपयोग, रक्त शर्करा की निगरानी, संतुलित आहार, शारीरिक गतिविधियों एवं संक्रमण से बचाव के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने यह भी बताया कि उचित देखभाल एवं नियमित उपचार से बाल मधुमेह से प्रभावित बच्चे स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन व्यतीत कर सकते हैं।
जिला एनसीडी नोडल अधिकारी डॉ. उदय भगत ने प्रतिभागियों को उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं, जांच सुविधाओं एवं नियमित फॉलो-अप की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने परिवारों को उपचार में निरंतरता बनाए रखने तथा किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में तुरंत स्वास्थ्य संस्थाओं से संपर्क करने की सलाह दी।
बैठक के दौरान बच्चों एवं अभिभावकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों एवं जिज्ञासाओं का समाधान संवादात्मक चर्चा के माध्यम से किया गया। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा विशेषज्ञों से रोग प्रबंधन संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त किए।
कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डीपीएम राजीव रंजन मिश्रा,जिला कार्यक्रम प्रबंधक, शिशु रोग विशेषज्ञ, जिला एनसीडी नोडल अधिकारी तथा अन्य स्वास्थ्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि बाल मधुमेह के प्रति जागरूकता बढ़ाने, प्रभावित बच्चों को नियमित उपचार एवं परामर्श से जोड़ने तथा उनके बेहतर स्वास्थ्य एवं जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित करने के प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेंगे। यह कार्यक्रम यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह उपस्थित थे।
