क्या आदिवासी विकास विभाग में सब कुछ ठीक नहीं? मंडल संयोजक के इस्तीफे से मचा हड़कंप, सहायक आयुक्त पर मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप, विभाग में बढ़ा विवाद - सहायक आयुक्त बोले— आरोप पूरी तरह निराधार

पत्थलगांव, जशपुर। आदिवासी विकास विभाग में एक बार फिर विवाद सामने आया है। पत्थलगांव विकासखंड में मंडल संयोजक के पद पर पदस्थ परमानंद पैकरा ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए सहायक आयुक्त संजय सिंह पर मानसिक प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाया है। इस्तीफे के साथ लगाए गए आरोपों ने विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं सहायक आयुक्त ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए इसे प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।
मिली जानकारी के अनुसार परमानंद पैकरा लंबे समय से पत्थलगांव विकासखंड में मंडल संयोजक के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने अपने इस्तीफे में उल्लेख किया है कि कार्यकाल के दौरान उन्हें लगातार नौकरी से हटाने की बात कही जाती रही, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान और तनावग्रस्त रहने लगे। उनका कहना है कि उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बार-बार दबाव और प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
परमानंद पैकरा ने अपने इस्तीफे में यह भी लिखा है कि उन्होंने 16 मार्च 2026 को जशपुर कलेक्टर को एक लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की जानकारी दी थी और हस्तक्षेप की मांग की थी। उनका आरोप है कि शिकायत के बाद भी किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद परिस्थितियां लगातार उनके खिलाफ बनती चली गईं।
पैकरा का कहना है कि 11 जून को छात्रावास का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान किसी प्रकार की गंभीर कमी या अनियमितता सामने नहीं आई, इसके बावजूद उनके जून माह के वेतन पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया गया। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और दबाव बनाने के उद्देश्य से की गई। उन्होंने बताया कि उनका परिवार पूरी तरह उनके वेतन पर निर्भर है और वेतन रुक जाने से आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसी वजह से उन्होंने 14 जून को अपना इस्तीफा देने का फैसला लिया।
मामले के सामने आने के बाद विभागीय हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कर्मचारियों के बीच भी इस मामले को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोग इसे विभागीय तनाव और प्रशासनिक विवाद से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
वहीं इस पूरे घटनाक्रम पर सहायक आयुक्त संजय सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि परमानंद पैकरा को उनके मूल पद पर भेजने की प्रशासनिक प्रक्रिया चल रही है और उसी के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा रही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ व्यक्तिगत दुर्भावना के आधार पर कार्रवाई नहीं की जाती।
सहायक आयुक्त ने यह भी बताया कि वेतन रोकने की कार्रवाई कलेक्टर द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के बाद लिए गए प्रशासनिक निर्णय के तहत की गई थी। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह विभागीय प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे किसी व्यक्ति विशेष से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने मानसिक प्रताड़ना और दबाव बनाए जाने के आरोपों को निराधार और तथ्यहीन बताया।
फिलहाल मंडल संयोजक परमानंद पैकरा के इस्तीफे और उसमें लगाए गए गंभीर आरोपों ने आदिवासी विकास विभाग में नया विवाद खड़ा कर दिया है। मामला अब प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यदि मामले की जांच होती है तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस पूरे प्रकरण में क्या कदम उठाता है और आरोपों की निष्पक्ष जांच कराता है या नहीं।
परमानंद पैंकरा
संजय सिंह-सहायक आयुक्त-जशपुर
